इंतजार की घड़ियां समाप्त हुई. यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट फ्लोर पर आ चुका है. काम तेजी से शुरू हो चुका है. जल्द ही प्रोजेक्ट से संबंधित सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया जाएगा और नियत समय तक यह ग्रीन कॉरिडोर सिलीगुड़ी, बिहार और उत्तर प्रदेश के विकास को पंख लगाएगा.
सिलीगुड़ी से गोरखपुर तक बनने वाली ग्रीन एक्सप्रेसवे परियोजना का काम शुरू हो चुका है. ग्रीन एक्सप्रेसवे के बन जाने से सिलीगुड़ी और गोरखपुर के बीच की दूरी काफी घट जाएगी. एक अनुमान के अनुसार सिलीगुड़ी से गोरखपुर की दूरी मात्र 7-8 घंटे में पूरी कर ली जाएगी.
सिलीगुड़ी के निकट ठाकुरगंज में इस ग्रीन एक्सप्रेसवे को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. ठाकुरगंज के छोटे बड़े गांवों में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निर्देश पर अधिकारी डेरा डाले हुए हैं और एक्सप्रेसवे के लिए भूमि चिन्हित कर रहे हैं. जिन लोगों की भूमि एक्सप्रेसवे के लिए ली जा रही है, उन्हें प्राधिकरण की ओर से उचित मुआवजा दिया जा रहा है.
सिलीगुड़ी गोरखपुर एक्सप्रेसवे सीमांचल को पश्चिम बंगाल व उत्तर पूर्वी राज्यों से हाई स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि आवागमन अधिक सुगम तथा सुरक्षित भी होगा. इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से सिलीगुड़ी, उत्तर पूर्वी राज्यों तथा उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी. सिलीगुड़ी में उद्योगों का विस्तार व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विकास के नए-नए रास्ते खुलेंगे.
जानकारों का मानना है कि सिलीगुड़ी गोरखपुर एक्सप्रेसवे परियोजना से सबसे ज्यादा लाभ सिलीगुड़ी को होने वाला है. यहां ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स तथा छोटे व्यवसायों के अवसर बढ़ेंगे. इससे रोजगार के क्षेत्र में नए रास्ते खुलेंगे. सिलीगुड़ी गोरखपुर एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर सिलीगुड़ी से लेकर बिहार और सीमांचल के लोगों में काफी खुशी देखी जा रही है.
सिलीगुड़ी के व्यापारियों में भी उत्साह देखा जा रहा है. क्योंकि उन्हें दिल्ली तथा देश के दूसरे महानगरों से त्वरित परिवहन का लाभ मिलेगा. ट्रांसपोर्ट के खर्च भी कम होंगे. माल जल्दी गोदाम तक पहुंचेगा. काफी समय से यह चर्चा थी कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण परियोजना को लेकर काम शुरू करने वाला है.अब काम शुरू हो जाने से लोगों की उम्मीद जग गई है.
भूमि अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत किया जा रहा है. जिन किसानों से भूमि ली जाएगी, उन्हें बाजार भाव के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यह एक्सप्रेसवे बिहार में कई जिलों से होकर गुजरेगा. उन इलाकों में पहले से ही भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा है.

