March 11, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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दिवाली पर सिलीगुड़ी में ग्रीन पटाखे जलाने के समय का रखें ध्यान अन्यथा होगी कार्रवाई!

यह निश्चित हो गया है कि इस दिवाली देश भर में केवल ग्रीन पटाखे ही जलाए जा सकेंगे. आप सोच रहे होंगे कि ग्रीन पटाखे पर्यावरण के लिए अनुकूल हैं, इसलिए उसे जलाने के लिए कोई बंदिश या समय की पाबंदी नहीं होगी और आप जब चाहे ग्रीन पटाखे जला सकते हैं, तो ऐसा नहीं है. इसके लिए राज्यों में अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है. सिलीगुड़ी समेत पूरे प्रदेश में ग्रीन पटाखों को फोड़ने का समय निर्धारित कर दिया गया है.

पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने फैसले में कहा है कि 20 अक्टूबर यानी काली पूजा और दीपावली की रात केवल 2 घंटे के लिए ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे. बोर्ड ने इसके लिए समय निर्धारित किया है जो रात्रि 8:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक ही मान्य होगा. निर्धारित अवधि के भीतर ही पटाखा प्रेमी पटाखा जला सकेंगे. बोर्ड ने यह फैसला प्रदेश में प्रदूषण कम करने के दृष्टिकोण से लिया है.

इस बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सभी संबंधित संस्थाओं और प्रशासनिक सहयोग से यह सुनिश्चित कर रहा है कि सिलीगुड़ी और पूरे प्रदेश में अवांछित पटाखे अथवा नुकसान दायक पटाखे बिक्री न हो सके. सिलीगुड़ी में भी संबंधित इकाइयां यह सुनिश्चित कर रही है और अवांछित या अवैध पटाखों की बिक्री रोकने के लिए सभी तरह के कदम उठा रही हैं. पुलिस प्रशासन इसमें भरपूर सहयोग कर रहा है.

पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष कल्याण रूद्र ने कहा है कि राज्य में बिना लाइसेंस वाले पटाखे की बिक्री रोकने के लिए सभी तरह के कदम उठाए जा रहे हैं. पुलिस और जांच एजेंसियां इस दिशा में सभी तरह के कदम उठा रही हैं.पश्चिम बंगाल में पटाखा उत्पादकों और विक्रेताओं की एक संस्था है, सारा बांग्ला आतिशबाजी उन्नयन समिति. इसके अध्यक्ष हैं बावला राय. उन्होंने भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फैसले को उपयुक्त बताया है और भरोसा दिलाया है कि राज्य में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही बेचे जाएंगे.

आपको बताते चलें कि ग्रीन पटाखों पर QR कोड होता है. इस पर CSIR -NEERI का सर्टिफिकेट लगा होता है. जब आप QR कोड स्कैन करेंगे तो उसका संपूर्ण विवरण मिलेगा. ये पटाखे पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और कम प्रदूषण फैलाते हैं. इन पटाखों के निर्माण में किसी तरह के रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता. धुआ भी कम होता है. सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड निकलता है. सामान्य पटाखे 160 डेसीबल आवाज पैदा करते हैं. जबकि ग्रीन पटाखे 100 से 125 डेसीबल तक सीमित आवाज करते हैं.

यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश भर में केवल ग्रीन पटाखे ही दीपावली अथवा छठ पूजा में जलाए जा सकेंगे. हर राज्य में पटाखे जलाने का अलग-अलग समय निर्धारित है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दिल्ली और एनसीआर इलाके में सुबह 6:00 से 7:00 तक और रात्रि 8:00 से 10:00 तक ही ग्रीन पटाखे फोड़े जा सकेंगे.

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