February 6, 2023
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी के सिनेमा हॉल में खाने पीने की महंगी चीजों पर एतराज क्यों?

आपने सिलीगुड़ी शहर के मल्टीप्लेक्स अथवा सिनेमा हॉल में जाकर पिक्चर जरूर देखा होगा. इंटरवल के समय आपने पॉपकॉर्न, कोल्ड ड्रिंक, फ्रेंच फ्राइस आदि का स्वाद भी चखा होगा.

वेगा सर्कल,सालूगाडा स्थित सिनेमा हॉल अथवा कोई भी अन्य मल्टीप्लेक्स हो, वहां खाने पीने की चीजें सबसे ज्यादा महंगी बिकती हैं. वेगा सर्कल में तो पॉपकॉर्न ₹300 से लेकर ₹450 तक मिलता है. जबकि कोल्ड ड्रिंक की कीमत प्रिंटेड मूल्य से अत्यधिक होती है. वहीं फ्रेंच फ्राई कम से कम ₹150 में मिलता है. कई लोगों का सिनेमा देखने का मूड ही खराब हो जाता है, जब उन्हें खाने-पीने के लिए अत्यधिक कीमत चुकानी पड़ती है.

कई लोग तो सिनेमा हॉल पर अपनी भड़ास निकालने लग जाते हैं. जबकि कुछ लोग कान पकड़ लेते हैं कि अब दोबारा सिनेमा हॉल में आएंगे. केवल सिलीगुड़ी के सिनेमा हॉल में ही खाने पीने की चीजें महंगी मिलती हो, ऐसा नहीं है. बल्कि पूरे देश में मल्टीप्लेक्स अथवा मूवी थिएटर का ऐसा ही हाल है.

कई सामाजिक संगठनों के लोग सिनेमा हॉल की मनमानी को लेकर अदालत का दरवाजा तक खटखटा आए हैं.कुछ लोग सिनेमा हॉल के खिलाफ प्रदर्शन भी करते हैं. कहीं-कहीं तो तोड़फोड़ भी होने लगती है. कई सामाजिक संगठनों ने इसे सिनेमा दर्शकों को ठगने का तरीका बता मामले तक दर्ज कराए हैं. पर इन सबके बावजूद सिनेमा हॉल में खाने पीने की वस्तुओं की महंगाई जारी है.

अब तो जिस तरह का सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है, उसके बाद तो सिनेमा हॉल मालिक और सिनेमा हॉल प्रबंधन अपनी छाती और चौड़ी कर लेंगे. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आज स्पष्ट कर दिया है कि सिनेमा हॉल मालिकों को अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है. वह अपने हिसाब से खाने पीने की चीजों की कीमत निर्धारित कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दर्शक पर यह निर्भर करता है कि वह वस्तुओं को खरीदे या नहीं. सिनेमा हॉल दर्शक को मजबूर नहीं कर सकता.

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की खंडपीठ ने थिएटर मालिकों और मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय के 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त व्यवस्था दी है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मल्टीप्लेक्स में खाना बेचना एक व्यवसाय है, जिसको रोका नहीं जा सकता. खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें मल्टीप्लेक्स और मूवी थिएटर में लोगों को खुद का खाने पीने का सामान ले जाने की अनुमति दी गई थी.

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