वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य सक्रिय राजनीति से लगभग दूर हो चुके हैं. लेकिन जब मौका मिलता है तो वह अपनी पार्टी का चुनाव प्रचार भी करते नजर आते हैं. सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से वामपंथी उम्मीदवार शरदिंदू चक्रवर्ती हैं. अशोक भट्टाचार्य अपनी पार्टी के उम्मीदवार को जिताने के लिए सिलीगुड़ी की जनता से अपील कर रहे हैं.
अशोक भट्टाचार्य ने राजनीति में गहरा अनुभव प्राप्त किया है. उन्होंने एक लंबे अरसे तक वामपंथी राजनीति की. सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर के रूप में भी लोग उन्हें जानते हैं. अब उम्र दराज होने के चलते वे सक्रिय राजनीति से दूर हो चुके हैं. पर आज भी अशोक भट्टाचार्य को सिलीगुड़ी के लोग सुनते हैं. अशोक भट्टाचार्य एक ऐसी शख्सियत हैं,जिन्हें तृणमूल कांग्रेस से लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेता भी उतना ही सम्मान देते हैं, जितना कि खुद वामपंथी नेता और कार्यकर्ता.
सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा है. उसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार गौतम देव और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शंकर घोष चुनाव मैदान में है. शंकर घोष सिलीगुड़ी के विधायक भी हैं. इस तरह से सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में है.
सभी दलों के उम्मीदवारों के द्वारा अपने-अपने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है. जगह-जगह रैलियां, बैठक, जनसंपर्क का कार्यक्रम चल रहा है. हर दल अपने प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहा है. इस बार कहने के लिए तो कांग्रेस वामोर्चा और तृणमूल कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन सभी दलों का निशाना टीएमसी नहीं बल्कि बीजेपी है. इससे सिलीगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस को एक पॉजिटिव माइलेज मिल रहा है.
पिछले दिनों अपनी पार्टी के उम्मीदवार का चुनाव प्रचार करते हुए वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने कुछ ऐसा कह दिया कि इसके बाद एक तरफ टीएमसी गदगद है तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है. खासकर चुनाव लड़ रहे शंकर घोष तो अवाक है. किसी समय शंकर घोष अशोक भट्टाचार्य के शिष्य हुआ करते थे. आखिर अशोक भट्टाचार्य ने ऐसा क्या कह दिया कि शंकर घोष उनसे नाराज हो गए. जबकि गौतम देव बाग-बाग हो गए.
शरदेंदु चक्रवर्ती के समर्थन में प्रचार करने उतरे अशोक भट्टाचार्य ने एक बड़ा बयान दिया, जिसकी राजनीतिक दलों में चर्चा हो रही है.हालांकि अशोक भट्टाचार्य का बयान कोई नया नहीं है. वे पहले से ही भारतीय जनता पार्टी के विरोध में इस तरह के बयान देते रहे हैं. पर लोगों को आश्चर्य इसलिए हो रहा है कि इस समय उन्हें टीएमसी पर हमलावर होना चाहिए. जबकि अशोक भट्टाचार्य ने भाजपा पर ही निशाना साध दिया और टीएमसी को कुछ नहीं कहा.
जानकार लोग मानते हैं कि अशोक भट्टाचार्य टीएमसी के विरोध में कभी खुलकर हमलावर नहीं हुए. जबकि भाजपा के विरोध में वह अक्सर हमलावर नजर आते हैं. अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक बुलडोजर पार्टी है. वह कभी पश्चिम बंगाल की सत्ता में नहीं आएगी. उन्होंने राज्य के लोगों से भाजपा को वोट नहीं देने की अपील की.
भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को भाजपा को हराने के लिए टीएमसी- वाममोर्चा और कांग्रेस की संयुक्त रणनीति मानते हैं. उनके अनुसार हिंदू वोटो में बिखराव करने के लिए यह रणनीति बनाई गई है ताकि टीएमसी को इसका लाभ मिले. भाजपा और राजनीतिक आलोचकों के मत अलग-अलग हो सकते हैं
पर इस घटना से टीएमसी के उम्मीदवार गौतम देव काफी खुश हैं. उन्होंने अशोक भट्टाचार्य के बयान को हाथों हाथ लिया है. गौतम देव ने कहा है कि अशोक बाबू एक प्रबुद्ध और वरिष्ठ व्यक्ति हैं. वह उनका सम्मान करते हैं. अगर वह इस तरह की बात कहते हैं तो इसका जरूर कोई ना कोई अर्थ है. इसे हल्के से नहीं लिया जा सकता है. भाजपा के विधायक और सिलीगुड़ी से चुनाव लड़ रहे शंकर घोष ने अशोक भट्टाचार्य के खिलाफ कुछ कहा तो नहीं है, परंतु सिर्फ इतना जरूर कहा है कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पूरे राज्य में शून्य हो चुकी है.
