तीस्ता नदी पर बना कोरोनेशन ब्रिज ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है. यह कोरोनेशन ब्रिज पहाड़, समतल और Dooars को आपस में जोड़ता है. अंग्रेजों के जमाने का बनाया गया यह कोरोनेशन ब्रिज लाख प्राकृतिक मुसीबतों को झेलते हुए अब तक वाहनों का भार उठाये जा रहा है. हालांकि इस कोरोनेशन ब्रिज के समानांतर नए ब्रिज निर्माण को भी हरी झंडी मिल चुकी है. लेकिन तब तक यही एकमात्र ब्रिज है जो अपने निहित वांछित उद्देश्यों को पूरा कर रहा है.
आजकल सेवक के आसपास तथा सिलीगुड़ी के लोग सेवक के कोरोनेशन ब्रिज का नाम सुनते ही सिहर उठते हैं. अगर घर का कोई रूठा व्यक्ति यह कहता है कि वह सेवक की तरफ जा रहा है, तो घर के लोग उसे वहां जाने से रोकते हैं. सेवक के आसपास में कुछ दुकानें भी हैं. वहां भी ब्रिज को लेकर आजकल कुछ और ही चर्चा चल रही है. एक अज्ञात डर और सनसनी रहती है. आजकल लोग बाघ पुल पर समय बिताना नहीं पसंद करते हैं. मंगपू पुलिस की सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ा दी गई है.
कोरोनेशन ब्रिज को बाघ पुल भी कहते हैं. इस ब्रिज की ढांचागत अवस्था कुछ ऐसी है कि कुछ लोगों के लिए यह मौत की खुली घाटी भी बनती जा रही है. जीवन से परेशान, मानसिक रोगियों और नकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों के लिए यह मौत के कुएं के रूप में परिणत होता जा रहा है. पूर्व में कई घटनाएं घटी हैं, जब बाघ पुल से सिलीगुड़ी और आसपास के कई व्यक्तियों ने छलांग लगाकर नीचे बहती तीस्ता नदी में अपनी जान दे दी.
आज एक बार फिर से यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तीस्ता नदी पर बना कोरोनेशन ब्रिज आत्महत्या करने वालों के लिए एक सुरक्षित स्थल के रूप में परिणत हो गया है? ऐसा इसलिए कि एक बार फिर से कुछ इसी तरह की घटना घटी है. दावा किया जा रहा है कि पिछले दिनों सिलीगुड़ी के हाकिमपाडा के मनमतो साहा नामक एक व्यक्ति ने इसी बाघ पुल से छलांग लगाकर तीस्ता नदी में अपनी जान दे दी. मिली जानकारी के अनुसार उनके परिवार के लोगों ने उनके लापता होने की सिलीगुड़ी के पानी टंकी आउटपोस्ट में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. अब मंगपू पुलिस ने उनके परिजनों को सेवक में बुला लिया है.
संभावना जताई जा रही है कि वही लापता व्यक्ति तीस्ता नदी में समा चुका है. कोरोनेशन ब्रिज के आसपास से लापता व्यक्ति की मोटरसाइकिल बरामद हुई थी. मोटरसाइकिल के नंबर प्लेट के सहारे पुलिस ने पता किया तो मोटरसाइकिल का मालिक सिलीगुड़ी से जुड़ा हुआ निकला. इसके बाद कोरोनेशन ब्रिज के आसपास के स्थानीय लोगों ने भी इस बात की पुष्टि कर दी कि मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति ने तीस्ता नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली है.
तीस्ता नदी में छलांग लगाने की सूचना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम तथा गोताखोरों ने नदी में लापता व्यक्ति की तलाश में खोज अभियान चलाया. यह अभियान आज भी जारी है. दो दिन होने जा रहे हैं. लेकिन अभी तक लापता व्यक्ति का कोई पता नहीं चला है. आपदा प्रबंधन के लोग विपरीत स्थितियों में भी काम कर रहे हैं.लेकिन अभी तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा है. बुधवार को नदी में स्पीड बोट भी उतारी गई. लेकिन तेज बहाव के कारण राहत एवं बचाव दल को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. इस समय तीस्ता नदी अपने पूरे शबाब पर बह रही है.
पुलिस और गोताखोर दल अपना काम कर रहे हैं आसपास के इलाकों में भी लापता व्यक्ति की तलाश की जा रही है. उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही लापता व्यक्ति का पता चल जाएगा. लेकिन इससे जुड़ा यह सवाल सबको परेशान कर रहा है कि बाघ पुल इतना खतरनाक क्यों बनता जा रहा है? पिछले दो वर्षों में यहां घटी आत्महत्या की कई घटनाओं को देखते हुए प्रशासन कोरोनेशन ब्रिज की ढांचागत अवस्था में सुधार के लिए कोई सुरक्षित उपाय क्यों नहीं अपना रहा है?
स्थानीय लोगों की सलाह है कि कोरोनेशन ब्रिज की साइड दीवार को और ऊंचा करने की जरूरत है, ताकि यहां से कोई नदी में छलांग लगाने की हिम्मत नहीं जुटा सके. इसके साथ ही कोरोनेशन ब्रिज की देख-देख में लगी पुलिस को अलर्ट करने की जरूरत है. अगर कोई व्यक्ति यहां चहलकदमी करता है या फिर संदिग्ध अवस्था में घूम रहा है तो पुलिस को फौरन उसकी पहचान करके सच्चाई का पता लगाना चाहिए. स्थानीय प्रशासन और सरकार को इसके साथ ही कुछ और ठोस कदम उठाने की जरूरत है.
फिलहाल लापता व्यक्ति की तलाश में उनके परिवार के लोग तीस्ता नदी में अपने परिजन की तलाश कर रहे हैं. पुलिस डिजास्टर मैनेजमेंट के साथ लगातार तलाशी अभियान जारी रखे है. घर वालों को एक उम्मीद बंधी है. पर, दिल में जल रहा उम्मीद का दीया कब बूझ जाएगा, यह किसी को पता नहीं.
