सिलीगुड़ी, समतल तथा Dooars पर चक्रवात का साया साफ दिख रहा है. पिछले दो दिनों से इन इलाकों में हल्की-फुल्की बारिश के साथ ही तेज हवाओं का शोर सुनाई पड़ रहा है. उधर भूटान में बादल फटने के बाद भूटान से बहने वाली नदियों के आगोश में स्थित Dooars के तटवर्ती इलाकों के लोग रात से ही सो नहीं पा रहे हैं.
हालांकि जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिला प्रशासन ने भूटान सरकार से चेतावनी मिलने के बाद संभावित बाढ़ से बचाव और राहत की सभी तरह की व्यवस्था कर रखी है. यहां बाढ़ राहत सेंटर भी बनाए गए हैं. लेकिन लोग इस कदर डरे हैं कि जरा सा भी मौसम खराब होता है और हवाएं तेज चलने लगती हैं, तो उनका दिल उछलकर हलक में फंसने लगता है. उनमें जैसी भगदड़ मच जाती है.
अब सारा दारोमदार इंद्र देवता पर टिका हुआ है. गनीमत है कि अभी बारिश ने विकराल रूप नहीं दिखाया है. परंतु आसमान में काले बादल और सन सन बहती हवाओं का नश्तर कहीं ना कहीं बादलों के बरसने का संकेत दे रहा है. अगर इंद्र देवता की कृपा हुई तो जान माल की भारी तबाही बच जाएगी.
जलपाईगुड़ी से लेकर अलीपुरद्वार जिले के लोगों में दहशत का आलम यह है कि स्थानीय प्रशासन के द्वारा माइकिंग के जरिए उन्हें चिंता और भय से मुक्त करने का आश्वासन दिया जा रहा है. लेकिन नदियों के किनारे बसे लोग लोग कभी-कभी बादलों की ओर आसमान की तरफ देखते हैं, तो कभी कल कल बहती नदी के जल को जैसे आंखों ही आंखों में मापने लग जाते हैं.
भूटान में रात से ही स्थानीय प्रशासन ने माइकिंग के जरिए लोगों को सूचित कर दिया था. बादल फटने तथा ग्लेशियर झील टूटने की आशंका से लोगों में दहशत इस कदर सवार हो गई कि उन्होंने आधी रात को ही सुरक्षित स्थानों की ओर भागना शुरू कर दिया. Dooars में स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के द्वारा सुबह से ही माइकिंग की जा रही है. लोगों को सचेत किया जा रहा है. उन्हें आश्वासन भी दिया जा रहा है कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं. प्रशासन ने संकट से निबटने का पर्याप्त इंतजाम कर रखा है.
जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों के तटवर्ती इलाकों में लोग भय तथा अनिश्चितता के वातावरण में जी रहे हैं. नागराकाटा और बानरहाट सबसे ज्यादा बाढ़ और आपदा के जोखिम में है. यहां भूटान से आने वाली कई नदियां तबाही ला सकती हैं. हालांकि ये नदियां कोई बड़ी नहीं हैं. लेकिन इतिहास गवाह है कि देखते ही देखते नदी में विनाश लीला मच जाती है!
इसलिए यहां प्रशासन काफी अलर्ट है. यहां के निवासियों को संभावित खतरे को लेकर पल-पल की सूचना दी जा रही है. लोगों को आश्वस्त किया जा रहा है. स्थानीय जिला प्रशासन ने संभावित आपदा और खतरे से निपटने के लिए सभी तरह की तैयारी पूरी कर ली है.
राहत की बात है कि अभी तक बारिश नियंत्रण में है. लेकिन अगर भूटान में ग्लेशियर झील टूटती है अथवा वहां बादल फटने की घटनाएं होती है तो Dooars के लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में Dooars में बहने वाली नदियों का जलस्तर एकाएक बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा.
अलीपुरद्वार जिले के अंतर्गत कुमार ग्राम ब्लॉक के अंतर्गत संकोष नदी बहती है. यहां एक बड़ी आबादी नदी तट पर निवास करती है. पिछली रात से ही यहां के लोग जाग रहे हैं.परंतु अब प्रशासन की ओर से उन्हें राहत भरी खबर दी जा रही है. मोबाइल पर मौसम विभाग की ओर से भी मैसेज भेजे जा रहे हैं. शायद खतरा टल गया है.
जैसा कि आशंका थी कि संकोष नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाएगा. मौजूदा हाल यह है कि अभी तक नदी का पानी बढा नहीं है. लेकिन अगर रात में बरसात होती है तो स्थिति बेकाबू हो सकती है. अब इन दोनों जिलों के लोग तथा जिला प्रशासन के अधिकारी भूटान की पहाड़ियों में होने वाली बारिश पर नज़रें गड़ाए हुए हैं.
अगर फिर से कोई बादल फटने की घटना सामने आती है तो निश्चित रूप से Dooars में तबाही का रौद्र रूप सामने आ सकता है.अब लोगों ने जान माल की तबाही रोकने के लिए इंद्र देवता की प्रार्थना करनी शुरू कर दी है. अगर आज रात बारिश नहीं हुई तो संभावित खतरा टल सकता है.
