सिलीगुड़ी के निकट नक्सलबाड़ी, खोरीबाड़ी और फांसी देवा थाना क्षेत्र के इलाके नेपाल, बिहार और बांग्लादेश की सीमा से जुड़े हुए हैं. किसी समय इन इलाकों में जंगल और चाय बागान के अलावा कुछ नहीं था. यहां आबादी के नाम पर कुछ बस्तियां थीं. लेकिन धीरे-धीरे इन क्षेत्रों में आबादी बढी है और इसके साथ ही रोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है. दूसरी ओर यह भी सच है कि इन इलाकों में अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है.
हालांकि अपराधियों पर नकेल कसने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में थाना भी स्थित हैं और पुलिस भी हमेशा एक्टिव रहती है. परंतु इन क्षेत्रों में अपेक्षित विकास तथा भय मुक्त वातावरण के लिए थाना क्षेत्रों को अधिक से अधिक संसाधनों और शक्ति से समृद्ध करने की आवश्यकता रहती है. नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही बिहार की सीमा पर स्थित होने के कारण यहां अपराधी अपराध करने के बाद आसानी से सीमा पार चले जाते हैं.
अगर यहां कानून, प्रशासन और पुलिस बल की संगठित व समृद्ध व्यवस्था हो तो इस स्थिति पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है. साथ ही यहां विकास और विस्तार भी अधिक होगा. वर्तमान में यह सभी इलाके दार्जिलिंग जिला पुलिस के नियंत्रण में आते हैं. स्थानीय स्तर पर यहां कोई एकीकृत प्रशासनिक इकाई नहीं है.
इन्हीं क्षेत्रों में चिकन नेक स्थित है, जो सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है. इन इलाकों में अधिक से अधिक सुरक्षा और अपराधों पर नियंत्रण की आवश्यकता रहती है. हालांकि सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने सभी तरह के प्रबंध किए हैं, परंतु स्थानीय स्तर पर इन सभी थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले इलाकों की सुरक्षा अधिक सघन और मजबूती से की जाए तो इन इलाकों में विकास और विश्वास का सकारात्मक वातावरण निर्मित होगा. इसके साथ ही चिकन नेक की सुरक्षा अधिक मजबूती से हो सकेगी.
काफी समय से यह मांग की जा रही थी कि सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया जाए और उसमें इन थाना क्षेत्रों को भी शामिल किया जाए. पूर्व टीएमसी सरकार तो यह काम नहीं कर पाई. लेकिन राज्य की भाजपा सरकार यह पहल करने जा रही है. नक्सलबाड़ी, खोरीबाडी और फांसी देवा क्षेत्रों को भी सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट में शामिल करने के लिए सभी तरह की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अब केवल राज्य सरकार की औपचारिक अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है.
माटीगाड़ा नक्सलबाड़ी के विधायक आनंदमय बर्मन ने कुछ समय पहले 20 मई को इन इलाकों की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री से बात की थी. उन्होंने उत्तर कन्या में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी, जब मुख्यमंत्री सिलीगुड़ी दौरे पर आए थे. उन्होंने इस संबंध में प्रस्ताव भी रखा था. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया था कि जल्द ही प्रस्ताव को मान लिया जाएगा. अब जानकारी मिल रही है कि राज्य सरकार के गृह विभाग ने प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. राज्य के परिवहन मंत्री तथा वित्त राज्य मंत्री आनंदमय बर्मन ने इसकी पुष्टि भी कर दी है.
इन इलाकों के निवासियों को किसी भी दिन राज्य सरकार का यह बड़ा तोहफा मिल सकता है. सूत्र बता रहे हैं कि राज्य सरकार किसी भी दिन इसकी औपचारिक घोषणा कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो सिलीगुड़ी शहर से सटे इन इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार तो होगा ही, कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से अपराध पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीनों थाना क्षेत्रों के कमिश्नरेट में शामिल होने से कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, साइबर अपराध की जांच और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा.
जानकारों के अनुसार तेजी से विकसित हो रहे इन इलाकों में आधुनिक पुलिसिया व्यवस्था लागू होने से यहां के लोगों को प्रशासनिक सुविधा आसानी से प्राप्त हो सकेगी. उम्मीद की जा रही है कि दुर्गा पूजा से पहले राज्य सरकार इस संबंध में अधिसूचना जारी कर देगी. फांसी देवा विधानसभा के विधायक दुर्गा मुर्मू बताते हैं कि सरकार के इस फैसले से यहां के लोग काफी खुश हैं और सरकार के निर्णय का स्वागत किया है.
दुर्गा मुर्मू को विश्वास है कि सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट में शामिल करने से इन क्षेत्रों के लोगों को अपने छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए दार्जिलिंग नहीं जाना पड़ेगा. पुलिस सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही सुलभ होगी. उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत आने से यहां कानून व्यवस्था और निगरानी प्रणाली दोनों मजबूत होगी. बहरहाल देखना होगा कि राज्य सरकार इन इलाके के लोगों का सपना कब तक पूरा करती है.
