अब सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में 1 सितंबर से सरकारी दफ्तरों में बांला भाषा में कामकाज को प्राथमिकता दी जाएगी. राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस बात की घोषणा कर दी है. हालांकि राज्य में पहले से ही सरकारी दफ्तरों में बांग्ला भाषा और अंग्रेजी भाषा में काम होते रहे हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि क्या सरकार अंग्रेजी भाषा में कामकाज बंद कर देगी? या उसे एक ऐच्छिक विषय के रूप में स्वीकार करेगी?
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्य में बांग्ला भाषा को बढ़ावा देने के लिए कई तरह के बदलाव किए थे. हालांकि यह पूरी तरह सफल नहीं हो सका था. बांग्ला भाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जरूर. लेकिन इसके साथ ही अंग्रेजी तथा दूसरी सर्वमान्य भाषा को भी विकल्प के रूप में कामकाज का हिस्सा रखा जाना चाहिए. इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता के साथ ही जनता और अधिकारी दोनों को ही काम करने में सुविधा होती.
बंगाल में सभी वर्गों के लोग निवास करते हैं. उनकी अलग-अलग मातृभाषाएं हो सकती हैं. परंतु अंग्रेजी उन सभी की एक सर्वमान्य भाषा हो सकती है. अगर बांग्ला भाषा के साथ ही सरकारी दफ्तरों में अंग्रेजी भाषा में काम करने की सुविधा मिले तो प्रशासनिक अधिकारियों जैसे आईपीएस, आईएएस, सचिव स्तर के लोगों को भी काम में आसानी होती. इसके साथ ही गैर बांग्लाभाषी लोगों को अपने आवेदन समेत सरकारी दस्तावेज प्रक्रिया पूरी करने और समझने में मुश्किलातों का सामना नहीं करना पड़ता.
बंगाल में रहने वाले अधिकतर गैर बांग्ला भाषी बांग्ला भाषा तो बोल लेते हैं किंतु बांग्ला लिपि की जानकारी न होने के कारण अनेक लोगों को पढ़ने और लिखने में असुविधा होती है. हालांकि उनके बच्चे विद्यालय में बांग्ला भाषा में पढ़ते लिखते भी हैं. आमतौर पर आईपीएस, आईएएस अधिकारियों की पढ़ाई लिखाई अंग्रेजी भाषा में होती है. ऐसे आईपीएस, आईएएस अधिकारियों को बांग्ला भाषा में काम निपटाने में असुविधा हो सकती है.
मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार सितंबर से किसी भी सरकारी दफ्तर में फाइलों का संचालन, पत्राचार, प्रशासनिक कार्य इत्यादि बांग्ला भाषा में संपन्न होंगे. अगर सरकार ने यह फरमान जारी करते समय इसका भी उल्लेख किया होता कि बांग्ला भाषा को सर्वोपरि रखते हुए अंग्रेजी भाषा को एक वैकल्पिक भाषा के रूप में स्वीकार किया जाएगा, तो शायद सभी वर्गों को काम करने में सुविधा होती. ऐसा लगता है कि सुवेंदु सरकार ने बिना सोचे समझे इस फैसले को लागू कर दिया है.
सूत्र बता रहे हैं कि हालांकि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फिलहाल इस तरह का कोई फैसला करने के पक्ष में नहीं थे. परंतु केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे के समय अमित शाह ने मुख्यमंत्री को बांग्ला भाषा के संरक्षण, संवर्धन, विकास और उसके अध्ययन को बढ़ावा देने के संबंध में सुझाव दिया था और एक पत्र भी तैयार करके भेजा था जो बांग्ला भाषा में लिखा गया था.
पिछले दिनों अमित शाह ने कोलकाता में राष्ट्रीय पुस्तकालय में नवनिर्मित देश के पहले शब्द संग्रहालय का उद्घाटन किया था. इस अवसर पर गृह मंत्री ने बंगाल की भाषा और संस्कृति की सराहना की थी. कुछ लोग यह भी बताते हैं कि राष्ट्रवादी नेता और विचारक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देने के लिए अमित शाह ने बांग्ला भाषा में एक पत्र तैयार करवा कर अधिकारी को भेजा था.अमित शाह ने बांग्ला भाषा के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने का शुभेंदु अधिकारी से आग्रह भी किया था.
बहरहाल मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार बंगाल सरकार के सभी विभागों में सरकारी पत्राचार मुख्य रूप से बांग्ला भाषा में किया जाएगा. हालांकि केंद्र सरकार के साथ संवाद के लिए बांग्ला के साथ हिंदी का भी उपयोग किया जाएगा. राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में मातृभाषा के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी सरकार पूरी तरह तैयार है.
अब देखना होगा कि 1 सितंबर से राज्य में बांग्ला भाषा में प्रशासनिक कार्यों को करने में कितनी सफलता मिलती है. वैसे राज्य सरकार का इस पर आधिकारिक पत्र आने वाला है. इसके बाद पूरी स्थिति साफ हो जाएगी.

