पश्चिम बंगाल सरकार ने सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के लिए पात्रता संबंधी नए मानदंडों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी सहायता केवल उन लोगों तक पहुंचेगी जो निर्धारित नियमों का पालन करते हैं और वास्तव में इसके पात्र हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दो से अधिक बार विवाह किया है, जो अपने बच्चों का अनिवार्य टीकाकरण नहीं कराते या जो भारतीय नागरिक नहीं हैं, उन्हें राज्य की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
उत्तर बंगाल में वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। उनके अनुसार, सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल जरूरतमंद और योग्य नागरिकों के हित में होना चाहिए। इसी दिशा में पात्रता के नियमों को और स्पष्ट किया जा रहा है ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के अनिवार्य टीकाकरण को विशेष महत्व देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि यदि कोई परिवार बिना किसी वैध चिकित्सीय कारण के बच्चों को जरूरी टीके नहीं लगवाता है, तो उसे सरकारी सहायता योजनाओं के लिए अयोग्य माना जा सकता है। सरकार का मानना है कि टीकाकरण केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है।
राज्य की अन्नपूर्णा योजना के आवेदन फॉर्म में भी टीकाकरण से संबंधित जानकारी को शामिल किया गया है। आवेदकों को अपने बच्चों के टीकाकरण की स्थिति दर्ज करनी होगी। इसके अलावा यह भी बताना होगा कि बच्चे किस प्रकार के विद्यालय में पढ़ रहे हैं और परिवार पहले से किन सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहा है। सरकार का कहना है कि इन जानकारियों से पात्रता का निष्पक्ष आकलन करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नागरिकता की पुष्टि के बाद ही योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि करदाताओं के पैसे से संचालित योजनाओं का उपयोग केवल वैध नागरिकों के कल्याण के लिए होना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बच्चों के नियमित टीकाकरण की स्थिति संतोषजनक मानी जाती है। राज्य में अधिकांश बच्चों को समय पर आवश्यक टीके लगाए जा रहे हैं और सरकारी स्वास्थ्य केंद्र इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। केंद्र सरकार के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत पोलियो, टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी, खसरा, रूबेला, निमोनिया, रोटावायरस डायरिया और अन्य गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए निशुल्क टीके उपलब्ध कराए जाते हैं।
सरकार का कहना है कि इन नए मानदंडों का उद्देश्य किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना है। आने वाले समय में इन नियमों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इनका सीधा असर लाखों संभावित लाभार्थियों पर पड़ सकता है।
