बांग्लादेश में BNP ने बंपर जीत हासिल कर ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक ने बीएनपी के नेता तारिक रहमान को बधाई दी है और उम्मीद जाहिर की है कि भारत बांग्लादेश संबंधों में मधुरता आएगी. बांग्लादेश में मजबूत सरकार होने से टीएमसी के नेतृत्व वाली ममता बनर्जी की सरकार को ज्यादा खुशी है. विशेषज्ञों को लगता है कि बांग्लादेश में स्थिर सरकार होने से भारत में घुसपैठ कम होगी और चुनाव में टीएमसी को इसका लाभ भी हो सकता है. कम से कम घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा टीएमसी पर पहले की तरह आक्रामक नहीं होगी.
बांग्लादेश में एक स्थिर सरकार होने की खुशी ममता बनर्जी में भी दिख रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई देते हुए एक पोस्ट डाला है. इसमें उनकी भावनाएं झलकती है जिसमें उन्होंने लिखा है कि शुभोनंदन! बांग्लादेश में मेरे सभी भाइयों और बहनों, सभी लोगों को मेरी हार्दिक बधाई. सभी को रमजान मुबारक. इस बड़ी जीत के लिए तारिक भाई और उनकी पार्टी को मेरी बधाई. दुआ है, आप सभी अच्छे और खुश रहें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर तारिक रहमान से बात भी की है.
लेकिन इस जीत के अलग-अलग पहलू हैं. पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी और असम के धुबरी जिला सीमा के पार जमात ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है. बंगाल और असम से सटे इलाके जमात के कब्जे में आ गए हैं. जमात के इतिहास को देखते हुए विशेषज्ञ दोनों ही राज्यों के लिए चिंता का कारण बता रहे हैं. जमात की जीत से भारत विरोधी संगठन सक्रिय हो सकते हैं. भारत बांग्लादेश सीमा से सटी 78% सीटें जमात के खाते में आई है. ऐसे में कुछ विशेषज्ञ चुनाव के समय इन क्षेत्रों में अशांति का भी कयास लगा रहे हैं.
एक दूसरा पहलू यह भी है कि पश्चिम बंगाल और असम दोनों राज्यों की सीमाएं बांग्लादेश से लगती हैं. इस तरह से कुल 4000 किलोमीटर की सीमा भारत से लगती है. ऐसे में भारत की शांति और सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश जरूरी है. अगर बांग्लादेश के हालात खराब होते हैं तो इससे बंगाल की राजनीति काफी प्रभावित होगी. ऐसे में भी विशेषज्ञ मानते हैं कि बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यहां की राजनीति प्रभावित हो सकती है. इसका लाभ भाजपा को या टीएमसी को मिलेगा, यह कहना मुश्किल है.
असम और बंगाल दोनों ही राज्यों में घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा बन चुका है. बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच जुबानी जंग काफी समय से चल रही है. वर्तमान में बांग्लादेश के हालात काफी खराब हैं और वहां हिंदुओं पर काफी अत्याचार हो रहा है. भारत ने इसका पहले भी विरोध बताया था. शुभेंदु अधिकारी, जो बंगाल बीजेपी के नेता हैं, उन्होंने यहां तक कह दिया था कि बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देंगे.
खैर, अब बांग्लादेश में बीएनपी को भारी जीत मिली है. दूसरी तरफ जमाते इस्लामी को भारी हार का सामना करना पड़ा है. जमाते इस्लामी बांग्लादेश का एक कट्टरवादी संगठन है. उसके मुकाबले बीएनपी उदारवाद के रास्ते पर चलने की बात करता है. पार्टी का इतिहास ठीक-ठाक है. लेकिन शेख हसीना की तरह भारत के अच्छे संबंधों का हिमायती कभी नहीं रहा. हालांकि खालिदा जिया के बेटे ने भारत के साथ अच्छे संबंधों की वकालत जरूर की है.
बीएनपी के नेता तारिक रहमान को उदारवादी नेता माना जाता है. स्वयं तारिक रहमान ने भी भारत के साथ अच्छे रिश्ते की कामना की थी. अब वह प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. ऐसे में भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे होंगे. यह उम्मीद की जा रही है. विशेषज्ञ भी ऐसा मान रहे हैं. उनके अनुसार बीएनपी जमाते इस्लामी से ज्यादा उदार है.
तारिक रहमान बीएनपी की नेता खालिया जिया के निधन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं और उन्होंने बांग्लादेश के लोगों से वादा किया है कि उनके पास बांग्लादेश के लिए एक अच्छी प्लान है. अब वह प्लान क्या है, भारत भी इस पर नजर जमाए हुए है. अगर इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो खालिदा जिया का भारत के साथ संबंध खराब नहीं रहा. भारत यह भी उम्मीद कर रहा है कि बांग्लादेश की नई सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव कम करेगी.
भारत बांग्लादेश सीमा के कई ऐसे इलाके हैं जहां कोई बाड़ नहीं है. इन्हीं इलाकों से जानवरों की तस्करी, नशीली दवाइयां का व्यापार और नकली करेंसी का व्यापार होता है. बांग्लादेश में मजबूत सरकार और स्थिर सरकार होने से भारत की सीमाएं सुरक्षित होगी. दोनों पक्ष बातचीत करेंगे और उसका समाधान ढूंढेंगे. इसके साथ ही बांग्लादेश में आतंकवाद को प्रश्रय भी नहीं मिलेगा.
भारत और बांग्लादेश लंबे समय से व्यापारिक साझेदार रहे हैं. भारत की व्यापारिक पॉलिसी को परवान चढ़ाने के लिए भी एक स्थिर बांग्लादेश जरूरी है. जब शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थी तब भारत और बांग्लादेश के बीच काफी अच्छे संबंध थे. उम्मीद की जा रही है कि तारिक रहमान भारत और बांग्लादेश के ऐतिहासिक मैत्री संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे.
सबसे बड़ी बात यह है कि बांग्लादेश भारत के लिए एक ट्रांसिट रूट भी है. यह सिलीगुड़ी गलियारा को लेकर कहा जाता है, जो उत्तर पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है. अगर बांग्लादेश में एक मजबूत सरकार बनती है तो सिलीगुड़ी गलियारा भी अधिक सुरक्षित होगा. वर्तमान में सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. क्योंकि पूर्व में बांग्लादेश ने इसे लेकर धमकी भी दी थी. उम्मीद की जा रही है कि बांग्लादेश की नई सरकार के स्थिर होने से सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं होगा.
