यूं तो अपने साइबर ठगी के बड़े-बड़े कारनामे देखे सुने होंगे. कई लोग साइबर अपराधियों के शिकार भी हुए होंगे. लेकिन हाल के दिनों में साइबर ठगी का जो तौर तरीका बदला है, उसकी तो आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि किस तरह से ये साइबर ठग लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. आप उनकी ठगी के अंदाज और कारनामे जानेंगे तो एक बार दहल जाएंगे और आपके मुंह से निकलेगा कि क्या ऐसा भी होता है!
आपको सावधान करने के लिए यह रिपोर्ट है. पिछले कुछ महीनों से सिलीगुड़ी में साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं. जब कोलकाता पुलिस उनके पीछे पड़ गई तो उन्होंने सिलीगुड़ी को अपना निशाना बनाया है. पिछले दो महीनों में सिलीगुड़ी में साइबर ठगी के दर्जनों मामले सामने आए हैं. कुछ मामले तो ऐसे हैं कि पीड़ित व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए सिलीगुड़ी साइबर थाना में गए ही नहीं. इस बीच सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने सिलीगुड़ी के लोगों को सचेत करना शुरू कर दिया है.
साइबर ठगों का जाल कुछ इस तरह से फैला है कि छोटे बड़े सभी उनके बिछाए जाल में फंसते जा रहे हैं. आम आदमी की तो बात ही छोड़िए. अब तो पुलिस अधिकारी और कानून के जानकार भी उनके शिकार हो रहे हैं. साइबर ठगो का मनोबल किस कदर बढ़ा हुआ है कि उन्होंने व्यापारी तो व्यापारी, साधारण तो साधारण, वकील और बुद्धिजीवियों को भी अपना शिकार करना शुरू कर दिया है.
सिलीगुड़ी कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील महिला ने अपनी पसंद की कोई वस्तु मंगाने के लिए ऑनलाइन ऑर्डर किया था. जब महिला का ऑर्डर डिलीवरी बॉय लेकर आया तब वकील महिला ने अपने मोबाइल से भुगतान कर दिया. डिलीवरी बॉय उन्हें बॉक्स देकर चला गया. जब महिला वकील ने डिलीवरी बॉय के जाने के बाद बॉक्स खोला तो यह देखकर दंग रह गई थी कि बॉक्स में केवल दो खाली बोतलें थीं. उन्होंने तुरंत डिलीवरी बॉय को शिकायत करते हुए फोन किया.
इस पर डिलीवरी ब्वॉय ने उन्हें एक नंबर दिया. यह कंपनी का कस्टमर केयर सर्विस केयर सर्विस नंबर था तुरंत ही महिलाओं के लिए वकील ने उक्त नंबर पर फोन मिलाया तो दूसरी तरफ से महिला वकील की शिकायत सुनने के बाद रिफंड के लिए उनसे एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया. महिला वकील ने कस्टमर केयर सर्विस की ओर से मिले निर्देशों के अनुसार ऐप डाउनलोड करके प्रोसेसिंग कर दी. बस इसके बाद उनके साथ साइबर फ्रॉड हो गया.
महिला वकील के बैंक खाते से दो बार में 70000 रू कट गए. उन्होंने बैंक की तरफ से आए मैसेज को पढ़ा तो उनका सर चकराने लगा. उन्हें समझ में आ गया कि वह साइबर फ्रॉड की शिकार हो गई है. वह तुरंत ही सिलिगुड़ी साइबर थाना पहुंची और मामले की लिखित जानकारी दी. सिलीगुड़ी साइबर थाना ने जब कस्टमर केयर सर्विस और डिलीवरी बॉय को दोबारा फोन किया गया तो यह नंबर ही बंद हो गया. बहरहाल, सिलीगुड़ी साइबर थाना में महिला वकील की लिखित शिकायत दर्ज करके मामले की छानबीन शुरू कर दी गयी है.
साइबर अपराधी रोज एक नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. उनका अनुसंधान आम आदमी की सोच से काफी अलग है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के अधिकारी बताते हैं कि आजकल साइबर स्कैमर्स लोगों को लूटने के नये-नये तरीके अपना रहे हैं. इस समय साइबर अपराधियों की एक और अनोखी कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम चल रही है. इसके तहत कोई अनजान व्यक्ति आपको किसी भी योजना या प्रोडक्ट या उत्पाद को लेकर या किसी भी शिकायत को लेकर आपको * 21*xxxxxxxxx# या इसी तरह का कोई अन्य कोड डायल करने के लिए कह सकता है.
अगर कुछ इस तरह से आपके साथ होता है तो फौरन सावधान हो जाएं. क्योंकि यह साइबर ठगों का एक नया तरीका हो सकता है. सिलीगुड़ी मेट्रो पोलिटन पुलिस की तरफ से सिलीगुड़ी के लोगों को चेतावनी जारी करते हुए कहा गया है कि अगर भूलवश आपने उनके कहे अनुसार मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव कर दिया या इस तरह का कोड डायल कर दिया तो आपका मोबाइल हैक हो सकता है. इस तरह से आपकी कॉल वॉइस, ओटीपी, बैंक से जुड़े सभी सिस्टम उनके नियंत्रण में आ जाएंगे. इस तरह से साइबर ठग बड़ी आसानी से आपको लूट सकते हैं.
हालांकि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस बार-बार सिलीगुड़ी के लोगों से अपील करती रही है कि किस तरह से साइबर अपराधियों से बचा जा सकता है.लेकिन खुद को पढ़ा लिखा समाज और खुद पर ज्यादा भरोसा करने वाले लोग छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. साइबर ठग इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन पर हमला कर देते हैं. सिलीगुड़ी पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक से सावधान रहें. अगर आपको लगता है कि आपकी कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव हो गई है तो तुरंत ## 002# या ## 21# डायल कर उसे निष्क्रिय कर दें. साइबर ठगी की शिकायत तुरंत 1930 पर करें या पुलिस से संपर्क करें.
