क्या कभी किसी ने यह कल्पना की थी कि सिलीगुड़ी में बुलेट ट्रेन चलाई जा सकती है? यह दिवास्वप्न जरूर हो सकता है, पर हकीकत में एक छोटे शहर को इतनी बड़ी उपलब्धि मिले तो हैरानी ही नहीं, किसी फेंटेसी फिल्म की तरह ही लगता है. पर कभी-कभी कल्पना भी उड़ान भरने लगती है. ऐसा लगता है कि स्वप्न को हकीकत का अमली जामा पहनाने का भारत ने बीड़ा उठा लिया है.
इसका प्रमाण है मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन, जो जापान की तकनीक से विकसित की जा रही है. अब इसकी तस्वीर भी सामने आ चुकी है. दावा किया जा रहा है कि इस बुलेट ट्रेन से मुंबई से अहमदाबाद की दूरी सिर्फ 2 घंटे में पूरी हो जाएगी. 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का शिलान्यास के साथ इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत की थी.
इस परियोजना को 2023 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन कोविद महामारी और अन्य चुनौतियों के कारण इसकी समय सीमा बढ़ गई है. वर्तमान में 2027 28 तक देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलने की उम्मीद है. ऐसे में देश की दूसरी सिलीगुड़ी वाराणसी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलाए जाने की बात भले ही आज एक दिवा स्वप्न की तरह लगती हो, पर जो खबर सामने आ रही है वह सिलीगुड़ी, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के दिल की धड़कन और उत्कंठा बढ़ाने वाली है.
यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता है कि 2031 तक सिलीगुड़ी से लेकर बिहार होते हुए वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलने लगेगी. बुलेट ट्रेन पर चढ़ने का सौभाग्य तो एक कल्पना ही है. दावा किया जा रहा है कि बुलेट ट्रेन की स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी. ऐसे में पटना से वाराणसी का सफर केवल 50 मिनट में, जबकि वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक यात्रा पूरी करने में महज 2 घंटे 55 मिनट का ही समय लगेगा. है ना हैरानी की बात!
आमतौर पर सरकारें काम कम और वादे ज्यादा करती हैं. यह पहली बीजेपी सरकार है जो वादे भी करती है और इसके साथ ही काम भी शुरू कर देती है. जब बजट में सिलीगुड़ी में बुलेट ट्रेन चलाने की बात कही जा रही थी, तो किसी के भी गले यह नहीं उतर रहा था. कुछ लोग तो यह भी कह रहे थे कि हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और होते हैं. जबकि कुछ लोगों का मत था कि सरकार की लोक लुभावन योजना है. परंतु आपको बता दें कि मोदी सरकार ने जैसा कहा, वैसा करके दिखाया भी है. जुलाई महीने से सिलीगुड़ी वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर काम शुरू हो जाएगा.
वाराणसी से पटना, गया होते हुए मुजफ्फरपुर, दरभंगा, कटिहार होते हुए सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन चलेगी. लगभग 3 घंटे में आप बुलेट ट्रेन से वाराणसी से सिलीगुड़ी आ सकते हैं यानी वाराणसी में चाय पीजिए और सिलीगुड़ी में जलपान करिए. इसका फायदा कम समय, व्यापारिक कार्यों में गति, रोजगार के अवसर तथा पूर्वी क्षेत्रों के आर्थिक विकास के रूप में सामने आएगा. यह पूर्वी भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना होगी, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने का काम करेगी. आप समझ सकते हैं कि इस परियोजना का कितना बड़ा लाभ इन क्षेत्रों को मिलने वाला है.
सिलीगुड़ी वाराणसी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को शुरू करने के लिए सभी बुनियादी कदम उठाए जा रहे हैं. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सर्वे टीम का गठन कर दिया है. मिली जानकारी के अनुसार जुलाई से सर्वे और ग्राउंड सर्वे का काम शुरू हो जाएगा. इन तमाम सर्वे के आधार पर कॉरिडोर का अंतिम रूप और तकनीकी ढांचा तैयार हो जाएगा. सूत्रों ने बताया कि इस बुलेट ट्रेन परियोजना की डीपीआर अगले साल मार्च तक तैयार हो जाएगी. एक बार डीपीआर की मंजूरी मिलने के बाद कॉरिडोर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा और कोई अवरोध या बड़ी बाधा सामने नहीं आई तो सिलीगुड़ी वासियों का बुलेट ट्रेन पर चढ़ने का सपना 2031 में जरूर पूरा होगा. फिर सिलीगुड़ी, पटना और वाराणसी सिमटकर एक नुक्ते के रूप में नजर आएगी!
