दार्जिलिंग जिले में कई ऐसे इलाके हैं, जो अति संवेदनशील और संवेदनशील हैं. इन क्षेत्रों में हिंसा और बम ब्लास्ट का इतिहास रहा है. संभवतःअगले हफ़्ते राज्य में चुनाव की घोषणा चुनाव आयोग के द्वारा किया जा सकता है. चुनाव आयोग चाहता है कि चुनाव की घोषणा से पहले इन क्षेत्रों में हिंसा मुक्त और भय मुक्त वातावरण कायम रह सके, ताकि मतदाता बिना किसी बाधा या भय के चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें. 1 मार्च से राज्य के जिन जिलों में केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात होंगी, उनमें दार्जिलिंग जिला भी शामिल है.
दार्जिलिंग जिले में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं. इनमें दार्जिलिंग, कर्सियांग पहाड़ी क्षेत्र में है तो सिलीगुड़ी, माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी और फांसी देवा समतल क्षेत्र में है. नक्सलबाड़ी, फांसी देवा, कर्सियांग, सिलीगुड़ी के कुछ ग्रामीण इलाकों में चुनाव के समय भय का वातावरण बन जाता है. इसलिए इन इलाकों में केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात की जा रही है. मिली जानकारी के अनुसार दार्जिलिंग जिले में केंद्रीय बलों की 9 कंपनियां तैनात की जा रही है.
अगर पूरे राज्य की बात करें तो 1 मार्च से पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में 240 कंपनियां तैनात की जा रही है. जब राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो जाएगी, तब पुन: 10 मार्च तक 240 कंपनियां राज्य के विभिन्न जिलों में पहुंच जाएंगी. इनमें सुरक्षा बलों की कंपनियों में विविधता भी रखी जाएगी. 110 कंपनियां सीआरपीएफ, 55 कंपनियां बीएसएफ ,21 कंपनियां सीआईएसएफ, आईटीबीपी तथा SSB की 27 27 कंपनियां शामिल की गई है.
गृह मंत्रालय के जिस तरह के निर्देश प्राप्त हुए हैं, उसके अनुसार प्रत्येक कंपनी में जवानों की न्यूनतम संख्या 72 होगी. ऐसा लगता है कि बंगाल के पिछले चुनाव में खूनी इतिहास को देखते हुए इस बार गृह मंत्रालय के द्वारा सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं. जिस तरह का सुरक्षा बलों की तैनाती का खाका तैयार किया गया है, उससे यह भी पता चलता है कि यहां राज्य के विभिन्न जिलों में संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों की संख्या भी बढ़ने वाली है, जिसका चयन कार्य चल रहा है. रविवार से ही यहां केंद्रीय बलों की कंपनियां पहुंचनी शुरू हो जाएगी.
उत्तर 24 परगना परगना जिला सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र में गिना जाता है. यहां 30 कंपनियां तैनात की जा रही है. उत्तर 24 परगना के बाद कूचबिहार जिला भी संवेदनशील माना जाता है. चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार कूचबिहार जिले में भी केंद्रीय बलों की 9 कंपनियां तैनात की जा रही है. आवश्यकता पड़ने पर यहां केंद्रीय बलों की कंपनियां बढ़ाई जा सकती है. उत्तर बंगाल में मालदा में संवेदनशील बूथों की पहचान कर ली गई है. प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार यहां 12 कंपनियां तैनात होगी.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मालदा जिले में 12 और उत्तर दिनाजपुर जिले में 11 कंपनियां तैनात की जा रही हैं. जबकि दक्षिण दिनाजपुर जिले में 10 कंपनियों की तनाती होगी. दार्जिलिंग जिला से सटे जलपाईगुड़ी जिले में सात कंपनियां तैनात की जा रही है. वहीं अलीपुरद्वार में पांच तथा कालिमपोंग जिले में तीन कंपनियों की तैनाती की जाएगी. दक्षिण बंगाल में सबसे अधिक संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों की श्रेणी में मुर्शिदाबाद जिला आता है. यहां प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 16 कंपनियां तैनात की जा रही हैं. हावड़ा और दक्षिण 24 परगना में 15 15 कंपनियों की तैनाती की जाने वाली है.
मालूम हो कि पिछली बार जब राज्य में विधानसभा के चुनाव हुए थे तब राज्य में 1100 कंपनियों की तनाती की गई थी. कल यानी 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होने वाला है. उसके ठीक बाद यानि 1 मार्च से केंद्रीय बलों को विभिन्न जिलों में रवाना कर दिया जाएगा. पिछली बार की तुलना में इस बार केंद्रीय बलों की कंपनियों की संख्या बढ़ाए जाने के बाद यह कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग के द्वारा निष्पक्ष चुनाव कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है.
