पहले चरण का चुनाव 23 अप्रैल को हुआ था, तब आज की तरह ना तो ज्यादा आतंक, दहशत और भय का वातावरण देखा गया था. इतनी ज्यादा हिंसक घटनाएं भी पहले चरण के चुनाव में नहीं हुई थी. कई मतदान केन्द्रों पर सामान्य झड़प के अलावा मुर्शिदाबाद इलाके में सर्वाधिक हिंसक घटनाएं हुई थीं.
भाजपा प्रत्याशी और पूर्व सांसद अर्जुन सिंह ने नोवापाड़ा क्षेत्र के माया पली में बूथ संख्या 82- 83 के बाहर नकली ईवीएम रखने का आरोप लगाया. दक्षिण 24 परगना के फलता में भाजपा प्रत्याशी देवांशु पांडा ने भी टीएमसी कार्यकर्ताओं पर ईवीएम से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया. हावड़ा के बाली स्थित एक स्कूल के मतदान केंद्र पर ईवीएम खराब होने के बाद मतदाता आक्रोशित हो गए.
हंगामे को बढ़ता देख केंद्रीय बलों ने मोर्चा संभाला और स्थिति पर नियंत्रण पाया. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. नदिया जिले के चापरा क्षेत्र में भाजपा के पोलिंग एजेंट पर लोहे के राड से हमला किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई है. पणिहाटी में RG कर पीड़िता की मां और भाजपा प्रत्याशी रत्ना देवनाथ को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेर लिया. भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा.
इसी तरह से भवानीपुर में हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा. जब सुवेंदु अधिकारी एक पोलिंग बूथ का दौरा करने पहुंचे थे तो उनके बूथ से बाहर निकलते ही कार्यकर्ताओं ने जय श्री राम के नारे लगाए. इसके बाद वहां मौजूद भीड़ ने विरोध करते हुए जय बंगला के नारे लगाए. और देखते ही देखते वहां तनाव और उत्तेजना फैल गई. सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंच कर भीड़ को खदेड़ दिया.
आज के चुनाव में हिंसा की छाप दिखाई दी. सुबह जैसे ही मतदान शुरू हुआ, विभिन्न इलाकों से हिंसा, मारपीट, मतदाताओं को डराने धमकाने, सुरक्षा बल के साथ बहस, लाठी चार्ज और झड़पों की खबरें आने लगीं. टीएमसी और बीजेपी के बीच संघर्ष की घटनाओं के बीच नदिया जिले में बीजेपी एजेंट पर हमला, हावड़ा में EVM खराबी को लेकर झड़प, फलता मतदान केंद्र पर ईवीएम में कमल के चुनाव चिन्ह पर टेप का चिपकाया जाना, भवानीपुर में सुबेंदु अधिकारी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बीच मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ.
आज अंतिम चरण के चुनाव में बंगाल के सात जिलों की 142 सीटों के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजामों के बीच मतदान हुआ. मतदान करने के बाद बाहर निकले अभिषेक बनर्जी ने कहा भी था कि एक राफेल की कमी रह गई थी. हालांकि उन्होंने इसे व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा था. पर इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण, निर्भीक और निष्पक्ष मतदान के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए थे.
इन सभी के बावजूद चापड़ा, शांतिपुर, निमतला और भांगढ़ जैसे इलाकों में हिंसक घटनाएं हुई है. मतदान केंद्र संख्या 53 पर भाजपा के पोलिंग एजेंट के साथ मारपीट की गई. हावड़ा के एक मतदान केंद्र के बाहर हंगामा देखने को मिला. यहां सुबह लगभग 8:30 बजे मतदान शुरू हो सका था. कई मतदान केन्द्रों में सुरक्षा बलों ने मतदाताओं को सुरक्षित मतदान केन्द्र में लाकर उन्हें घर तक पहुंचाया.
लेकिन इन सभी के बावजूद एक बात काफी महत्वपूर्ण है कि इस बार बंगाल चुनाव में हिंसा की उस तरह की घटनाएं नहीं घटी, जो इससे पहले के चुनाव में घटती रही है. वाममोर्चा और उससे पहले कांग्रेस के जमाने से यहां हिंसा के बीच चुनाव संपन्न होते रहे हैं. कई निर्दोष लोग मारे जाते हैं. पहली बार यह दाग भी धुला है. कहीं ना कहीं चुनाव आयोग शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने में सफल रहा है. आलोचक भी यह बात मानते हैं कि पहली बार बंगाल में खूनी रक्तपात का इतिहास भी मिटा है.
अंतिम चरण के मतदान में मतदाताओं ने पहले चरण के चुनाव की तरह ही बढ चढ़कर भाग लिया. बंपर वोटिंग हुई. जैसा कि अनुमान भी लगाया जा रहा था. ममता बनर्जी के चुनाव क्षेत्र भवानीपुर में 6 घंटे में 61% वोटिंग हुई. यहां ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी से है. आपको बताते हैं चलें कि दूसरे और अंतिम चरण के लिए सात जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर कुल 3 करोड़ 21 लाख 73 हजार 837 मतदाता थे. जिनमें से पुरुषों की संख्या 1 करोड़ 64 लाख 35 हजार 627 थी.
मतदान के लिए 41 000 से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए गए थे. हर मतदान केंद्र की वेब कास्टिंग की व्यवस्था की गई थी. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2321 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनात की गई थी. कोलकाता में सबसे अधिक 273 कंपनियां लगाई गई थी. इसके अलावा 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए थे. ड्रोन कैमरे से भी मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जा रही थी. अंतिम चरण के चुनाव में कुल 1448 उम्मीदवार मैदान में थे. भांगढ़ सीट पर सबसे अधिक 19 उम्मीदवार थे. हुगली जिले की गोगाहट सीट पर सबसे कम पांच उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे.
आज मतदाताओं ने अंतिम चरण के चुनाव में किस्मत आजमा रहे विभिन्न दलों के कई महत्वपूर्ण नेताओं की किस्मत का फैसला कर दिया. इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सुबेंदु अधिकारी, राज्य मंत्री सुजीत बोस, फिरहद हकीम, ज्योति प्रिया मलिक, ब्रातय बसु, अर्जुन सिंह, स्वप्न दास गुप्ता, रुद्र नील घोष, मीनाक्षी मुखर्जी, कलातन दास गुप्ता और नौशाद सिद्दीकी आदि शामिल है.
आज अंतिम चरण के चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी है. यह चुनाव दीदी बनाम मोदी के बीच था. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे चुनाव का नेतृत्व किया तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अकेले अपनी पार्टी का नेतृत्व कर रही थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था कि राज्य में भाजपा की सरकार बन रही है. प्रधानमंत्री ने तो यहां तक कहा था कि भाजपा का मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण में आऊंगा. आज टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने अपने एक बयान में कहा है कि अगर बंगाल में भाजपा चुनाव हारी, तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस्तीफा दे देंगे?
तृणमूल सांसद ने एक वीडियो संदेश में दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं को राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर भाजपा के चेहरे के रूप में पेश किया है. ऐसे में अगर 4 मई को भाजपा हारती है तो प्रधानमंत्री अपने पद से इस्तीफा देने का साहस दिखाएं!
