अगर इंसान की सोच से ही सब कुछ होने लगे तो ईश्वर की याद किसी को भी ना आए. इंसान अपने भले के लिए सोचता है. लेकिन ईश्वर की सोच कुछ अलग ही होती है. कब क्या बिखर जाए, पहले से किसी को कुछ पता नहीं होता. इंसान की भूल यह होती है कि वह हर रास्ते को मंजिल तक पहुंचने का रास्ता मान लेता है. लेकिन क्या ऐसा होता है? कुछ रास्ते जिंदगी को बिखेर भी देते हैं.
हालांकि भौतिक रूप से यह घटना सिलीगुड़ी की नहीं है और ना ही बंगाल के किसी कोने की है. पर रोज ही यहां घट रही है. भौतिक रूप से इस घटना का तार राजस्थान से जुड़ा है .इस घटना की चर्चा करना इसलिए आवश्यक है कि हमारे समाज में ऐसी घटनाएं तेजी से घट रही हैं. सिलीगुड़ी हो या कोलकाता या दिल्ली या देश का कोई भी महानगर या शहर, ऐसी घटनाएं समाज और रिश्तों के बदलते ट्रेंड की ओर इशारा करती हैं. कहीं आपके साथ ऐसी घटना न घट जाए, इसलिए आपको सतर्क करना जरूरी है.
अर्चना की शादी एक निजी बैंक में काम करने वाले मैनेजर अरण्य से हुई थी. अर्चना अलवर में रहती थी. जबकि उसका पति जयपुर में नौकरी करता था. अर्चना जब तब पति से मिलने के लिए जयपुर चली जाती थी. उनके दो बच्चे थे. ऊपर से तो यह परिवार काफी खुशहाल नजर आ रहा था. पर भीतर से हर दिन कोई ना कोई कहानी जन्म ले रही थी.
पति-पत्नी के रिश्ते में जब ऋषभ की एंट्री हुई ,तभी से पति-पत्नी के रिश्तों की डोर भी कमजोर पड़ती चली गई. ऋषभ वास्तव में एक टैक्सी चालक था. अर्चना को जब भी जयपुर जाना होता, वह ऋषभ को बुला लेती थी तथा उसकी टैक्सी में बैठकर पति से मिलने जयपुर जाती थी. यूं तो ऋषभ एक टैक्सी ड्राइवर था, परंतु धीरे-धीरे वह अर्चना की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया. दोनों में लव अफेयर हो गया. इसी के बाद से अर्चना के भीतर छिपा शैतान भी बाहर आने लगा.
अब तक अरण्य को यह पता नहीं था कि उसकी पत्नी और टैक्सी ड्राइवर ऋषभ दोनों साथ जीने और साथ मरने की कसमें खा चुके हैं. उस दिन अरण्य ऋषभ की ही गाड़ी में जयपुर से अलवर लौट रहा था. वह गाड़ी की पिछली सीट पर ऊंघने का नाटक कर रहा था. उसे सोया हुआ देखकर ऋषभ ने अर्चना को फोन किया और कहा कि अगर तुम कहो तो अरण्य को ऊपर पहुंचा दूं. यह सुनकर अरण्य को झटका लगा. तो बात यहां तक पहुंच चुकी है.
फिर उसे समझ में आ गया कि पत्नी और उसके प्रेमी से उसकी जान को खतरा है. उस दिन से वह सतर्क रहने लगा. साथ ही पत्नी की कॉल डिटेल्स तथा दूसरे सबूत जुटाने शुरू कर दिए, ताकि पुलिस को देकर पत्नी और उसके प्रेमी को जेल भिजवा सके. एक दिन पत्नी के खिलाफ सबूत तलाशने के क्रम में अरण्य ने पत्नी की कारगुजारी सामने ला दी और उसे तलाक देने का फैसला किया. अर्चना ने इसके बदले में पति से 50 लाख रुपए का मुआवजा मांगा, जिसे देने से अरण्य ने इनकार कर दिया.
जब अर्चना अरण्य को ब्लैकमेल करने पर उतारू हो गई तब अरण्य ने कानून का सहारा लेने का फैसला किया. अपनी पत्नी और उसके प्रेमी के खिलाफ एकत्र सबूत को पुलिस में दिखाए और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया. इस बीच अर्चना को भनक मिल गई तो वह अपने दोनों बच्चों को घर पर छोड़कर प्रेमी के साथ फरार हो गई. इस कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब एक दिन इस घटना के लगभग 2 महीने बाद अर्चना और ऋषभ स्वयं अलवर के एसपी के दफ्तर पहुंच गए.
पुलिस वाले पहले से ही दोनों को ढूंढ रहे थे. लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल रहा था. अब जब दोनों ही एसपी कार्यालय में हाजिर हो गए थे, तब पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. जब उनसे पूछताछ की गई तो कई ऐसी जानकारियां मिली जो यह सबक देती है कि रिश्ता कोई भी हो, उस पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए.
पति को धोखा देने वाली अर्चना जेल जा चुकी है. उसके प्रेमी ऋषभ को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है. क्या आपके आसपास में इस तरह की घटनाएं नहीं घट रही है? वर्तमान समय में रिश्ते पर आंख मूंद कर भरोसा करना ठीक नहीं है.
