फिलहाल पश्चिम बंगाल में मौसम ज्यादा गरम नहीं है.आसमान में बादल और कमजोर धूप की वजह से अप्रैल में जान निकालने वाली गर्मी का असर यहां नहीं हो रहा है. परंतु अगर इसी हफ्ते या अगले हफ्ते के प्रारंभ में अगर तापमान एकदम से 4 से 5 डिग्री बढ़ जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए. मौसम विभाग ने चेतावनी दे दी है कि अचानक जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में हीट वेव का खतरा बढ़ गया है. प्रचंड गर्मी पड़ने वाली है.
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि देश के कई राज्यों में खासकर मैदानी राज्यों में भीषण गर्मी पड़ने वाली है. हालांकि पश्चिम बंगाल में कुछ इलाकों में 18 या 19 अप्रैल को हल्की-फुल्की बारिश हो सकती है. परंतु देश के अधिकांश राज्यों में भीषण लू चल सकती है. पहली बार देश के कई राज्य इसी महीने 45 डिग्री सेल्सियस गर्मी की चपेट में होंगे. अगर अप्रैल महीने में ही तापमान 45 डिग्री सेल्सियस हो जाए तो मई और जून महीने का आलम क्या होगा, यह आसानी से समझा जा सकता है.
मौसम विभाग के ताजा अपडेट के बाद विशेषज्ञ और डॉक्टर भी चिंतित हैं और लोगों को गर्मी से होने वाली बीमारी से बचने के लिए टिप्स दे रहे हैं. मौसम विभाग की ओर से कहा गया है कि मध्य और पूर्वी भारत में हीट वेव की स्थिति बनने वाली है. देश के कई शहरों में अगले दो-चार दिनों में 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच सकता है. इनमें नागपुर, भोपाल, भुवनेश्वर आदि शहर शामिल हैं.इसी तरह से उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई भागों में तापमान इसी महीने 45 डिग्री तक जा सकता है.
ऐसी स्थिति में जब आपका शरीर एकदम से बढ़ी गर्मी को सहन करने के लिए तैयार नहीं होता, तब आप इस चुनौती का मुकाबला कैसे करेंगे. विशेषज्ञों के द्वारा आम लोगों को कुछ सलाह दी गई है कि वह कैसे बढ़ती गर्मी और तापमान में खुद को क्रियाशील और स्वस्थ रख सकते हैं. उनके अनुसार अगर तापमान अचानक ही 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है तो कई लोगों को सांस लेने की समस्या हो सकती है. उनके दिल की धड़कन बढ़ सकती है.अगर पार 40 डिग्री से ऊपर पहुंच जाए तो खुद को ठंडा रखने की जरूरत पड़ती है. अगर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाए तो दिमाग को कूल रखना और भी ज्यादा चुनौती पूर्ण हो जाता है.
कई लोगों को शरीर में ऐंठन, डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, मांसपेशियों में ऐंठन आदि समस्याएं हो जाती हैं. अगर आप पहले से ही मधुमेह, किडनी रोग से पीड़ित है तो आपको यह ज्यादा समस्या हो सकती है. कई लोग तेज गर्मी की चपेट में आकर उल्टी और कमजोरी महसूस करने लगते हैं. तेज गर्मी में कुछ लोगों का दिमाग ठीक से काम करना बंद कर देता है. कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जो शारीरिक और मानसिक होने पर आपके लिए कुछ बचाव करना जरूरी है.विशेषज्ञों ने कहा है कि डिहाईड्रेशन से बचना जरूरी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के गाइडलाइंस के अनुसार बदलते मौसम में धूप से ज्यादा से ज्यादा बचने का प्रयास करें. अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को बंद रखें .पंखे और कूलर का सही उपयोग करें. विशेषज्ञ और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की भी सलाह है कि ऐसे में हर व्यक्ति को रोजाना दो से तीन लीटर पानी पीना चाहिए. इसके साथ ही शराब और कैफीन के सेवन से बचना चाहिए. ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियां खाएं.ज्यादा टाइट कपड़े ना पहने. बच्चों की सावधानी जरूरी है. बीमार लोगों का भी ध्यान रखना चाहिए.
