अगर आप सिलीगुड़ी से उत्तर बंगाल में कहीं भी बस से यात्रा का प्रोग्राम बना रहे हैं, तो या तो 20 अप्रैल से पहले यात्रा कर आएं या फिर 23 अप्रैल के बाद यात्रा का प्रोग्राम बनाएं. आपकी भरसक कोशिश होनी चाहिए कि चार दिनों के लिए यात्रा प्रोग्राम कम कर दें. अन्यथा आपकी यात्रा अधूरी रह सकती है या फिर बेहद कठिनाई भरी साबित हो सकती है. खासकर अगर आप यात्री वाहनो पर निर्भर रहते हैं.
सिलीगुड़ी के यात्री परेशान होंगे और परेशान होंगे उत्तर बंगाल के यात्री. सिलीगुड़ी से जलपाईगुड़ी, कूच बिहार, अलीपुरद्वार, मालदा रायगंज आदि शहरों में बस परिवहन से जाने वालों के लिए तो मुसीबत है ही, स्थानीय स्तर पर भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए आपको परेशानी हो सकती है. सिलीगुड़ी में सिटी ऑटो परिसेवा चार दिनों के लिए लगभग ठप्प रह सकती है. हां, टोटो वाले तीन-चार दिनों में अच्छे पैसे कमा सकते हैं.
आखिर 20 अप्रैल से लेकर 23 अप्रैल तक यह समस्या क्यों आने वाली है? क्यों यात्री परेशान होंगे? दफ्तर, व्यवसाय या अन्य रोजगार में लगे यात्रियों की क्यों परेशानी बढ़ने वाली है? इसका कारण है 23 अप्रैल को होने वाला चुनाव. चुनाव कार्य में चुनाव आयोग के द्वारा छोटे बड़े वाहनों का अधिग्रहण किया जा रहा है. अधिग्रहण किए जाने वाले वाहनों की संख्या 1000 से अधिक हो सकती है.
चुनाव आयोग ने चुनाव सामग्री, जैसे ईवीएम मशीन ,मतदान सामग्री, मतदान कर्मचारी आदि को बूथ तक ले जाने और वापस लाने के लिए सड़क पर चलने वाले यात्री वाहनों का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया है. मिल रही जानकारी के अनुसार कम से कम 1100 से अधिक छोटे बड़े वाहन इस काम में लगाए जाएंगे. इन यात्री बसों या सिटी ऑटो को चुनाव कार्य में लगाए जाने के बाद सिलीगुड़ी की सड़कों पर वाहनों की कमी हो जाएगी. इससे उसे दौरान यात्री काफी परेशान होंगे
मिल रही जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल में चलने वाली बसों, मिनी बस, सिटी ऑटो, टैक्सी, जीप आदि को किराए पर लेने जा रहा है. वाहन मालिकों को सूचित कर दिया गया है. इन यात्री वाहनों के नहीं चलने से पहाड़ से लेकर समतल, Dooars की परिवहन व्यवस्था कम से कम चार दिनों तक चरमरा सकती है.
आपको बता दें कि सिलीगुड़ी शहर से पहाड़ और आसपास के इलाकों में कम से कम 500 से 600 मिनी बसें नियमित रूप से चल रही हैं. सेवक रोड पर स्थित पी सी मितल बस टर्मिनल, सिलीगुड़ी जंक्शन आदि क्षेत्रों से चुनाव आयोग परिवहन की आपूर्ति करेगा. Dooars और उत्तर बंगाल के अलग-अलग क्षेत्रों से भी बसों को किराए पर लिया जा रहा है. पूरे उत्तर बंगाल में छोटे बड़े 1500 वाहन संचालित हो रहे हैं. इनमें से 1200 से अधिक बसों का चुनाव कार्य में इस्तेमाल लिया जाएगा. तो आप समझ सकते हैं कि यात्री सेवा किस कदर प्रभावित हो सकती है!
इस परेशानी को उत्तर बंगाल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट ओनर कोऑर्डिनेशन कमिटी भी समझती है और मानती है कि इन चार दिनों में यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है. हालांकि परिवहन मालिक यात्रियों की परेशानी कम से कम हो सके, इस दिशा में भी पहल कर रहे हैं. प्रशासनिक तौर पर व्यवस्था की जा रही है कि दैनिक यात्रियों को कोई परेशानी ना हो. बस मालिक यात्रियों की परेशानी को कम करने के लिए ट्रिप बढा सकते हैं. जिला प्रशासन ने बस मालिकों से सहयोग बनाए रखने की अपील की है.
इन सभी वैकल्पिक व्यवस्थाओं के बावजूद यह कहना ठीक नहीं है कि यात्री चार दिनों में परेशान ना होंगे. क्योंकि बस की कमी होगी तो रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है. सिलीगुड़ी में सिटी ऑटो कम चलेंगे तो यात्री परेशान होंगे. हालांकि परिवहन संघों के द्वारा आश्वासन दिया गया है कि यात्री सेवा को सुचारू रूप से चलाने की व्यवस्था की जाएगी. 23 अप्रैल के बाद चुनाव कार्य में लाई जाने वाली छोटी बड़ी बसों को मुक्त कर दिया जाएगा. यानी वे सामान्य सेवा में वापस आ सकती हैं.
