23 अप्रैल को होने वाले प्रथम चरण के चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने बाइक और स्कूटर के पीछे यात्री बैठाने पर रोक लगा दी है. जब तक कि मतदान संपन्न नहीं हो जाता. रात में सड़कों पर बाइक भी नहीं चलेगी.
सिलीगुड़ी में रैपिडो सेवा की मांग बढ़ी है. आमतौर पर यात्री रैपिडो सेवा को सुरक्षित और सरल मानते हैं. अगर कोई अन्य वाहन उपलब्ध नहीं हो तो ऐसे में आप फोन करके खुद के लिए रैपिडो सेवा ले सकते हैं. लेकिन चुनाव आयोग के निर्देश के बाद रैपिडो सेवा पर भी ब्रेक लग गया है. क्योंकि चुनाव आयोग ने कहा है कि बाइक के पीछे किसी भी व्यक्ति को नहीं बैठाया जा सकता. जबकि रैपिडो सेवा में चालक और सवारी दोनों रहते हैं.
स्पष्ट है कि सिलीगुड़ी और उन सभी क्षेत्रों में जहां 23 अप्रैल को मतदान होना है, यात्रियों की मुसीबत बढ़ गई है. एक तो पहले से ही यात्री सेवाओं की कमी हो गई है. अब रैपिडो की सेवा बंद हो जाने से आसानी से समझा जा सकता है कि यात्रियों की मुश्किल तो बढ़ेगी ही. इसके साथ ही रैपिडो सेवा से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित होगी.
जो लोग दफ्तरों में काम करते हैं अथवा कारोबार या व्यवसाय में लगे हैं और जिनका बाइक अथवा स्कूटर के बिना काम नहीं चलता, उनकी भी समस्या बढ़ गई है. सवाल यह है कि दो-तीन दिनों तक दफ्तर या व्यवसाय का कार्य कैसे होगा?
सिलीगुड़ी एक छोटा शहर है. यहां घर-घर बाइक अथवा स्कूटर मिल जाएंगे. इससे व्यवसाय और कहीं आने-जाने का काम लिया जाता है. सड़कों पर यात्री सेवा परिवहन की कमी दिख रही है.
सवाल है कि इस स्थिति में लोग क्या करेंगे? हालांकि चुनाव आयोग ने यह फैसला शांतिपूर्ण और हिंसा मुक्त चुनाव के दृष्टिकोण से लिया है. लिहाजा जनता को होने वाली व्यापारिक और आर्थिक दिक्कतों का सामना करते हुए चुनाव आयोग का सहयोग करना चाहिए. इसके अलावा कोई रास्ता भी नहीं है.

