बंगाल में पीएम मोदी का झालमुड़ी खाने और एक आम आदमी की तरह बातचीत करने का अंदाज लोगों को इतना भा गया है कि अब तो आम हो या खास, राजनीतिक दल हो या सामाजिक संगठन, नौकरी पेशा हो या मजदूर, सभी उसी झालमुड़ी की दुकान के रास्ते से होकर गुजरते हैं, जिस रास्ते से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला गुजरा था.
यह दुकान रातों रात चर्चित हो गयी है और चर्चित हो गया है दुकानदार विक्रम साव. बिहार के गया जिले का रहने वाला विक्रम साव ने सोचा तक नहीं था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसकी दुकान में झालमुड़ी खाने आएंगे. राजनीतिक दलों को प्रभावित करने वाला यह इवेंट लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. इसका ताजा उदाहरण टीएमसी की इसी रास्ते से गुजरने वाली महिलाओं की रैली है. इस रास्ते से गुजरने वाला दुकान में एक बार झालमुड़ी खाने जरूर जाता है. क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुकान में जाकर झालमुड़ी खाई थी.
मजे की बात तो यह है कि राजनीतिक दलों को आकर्षित करने वाला विक्रम साव खुद बंगाल का मतदाता नहीं है. लेकिन उसने बंगाल के मतदाताओं को जरूर प्रभावित करने की कोशिश की है. हालांकि वह सफाई में कहता है कि इस घटना को राजनीतिक चश्मे के दृष्टिकोण से ना देखा जाए.
विक्रम साव की यह दुकान 10-12 साल पुरानी है. वह बताता है कि उसकी दुकान पहले भी चलती थी. लेकिन पीएम मोदी वाली घटना के बाद उसकी दुकान चर्चा का केंद्र बन गई है. उसकी दुकान पर पहले से ज्यादा भीड़ लगने लगी है और वह रातों-रात एक सेलिब्रिटी की तरह ही हो गया है.
ऐसा तो होना ही था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किसी दुकान में जाना और कुछ खरीददारी करना खुद ही चर्चा का विषय बन जाता है. इस घटना के बाद आम और खास लोगों से विक्रम साव घिर गया है. अब छोटे बड़े मीडिया चैनल के लोग भी उससे संपर्क करने लगे हैं. वह व्यस्त रहने लगा है.
आपको बता दें कि यह घटना झाड़ग्राम की है. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर में चुनाव रैली समाप्त करके रास्ते से लौट रहे थे. तब उन्होंने पास में ही स्थित झालमुड़ी की दुकान में जाकर झालमुड़ी का स्वाद चखा था. तब झालमुड़ी विक्रेता विक्रम साव को भी अंदाजा नहीं था कि वह रातों रात सेलिब्रिटी बन जाएगा.
टीएमसी को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं भाजपा इसका फायदा ना उठा ले. यही कारण है कि जब रास्ते से तृणमूल कांग्रेस महिलाओं की रैली निकल रही थी, तब महिलाओं के हाथ में प्ले कार्ड थे, जिसमें लिखा था कि भाजपा के देबो ना! अब देखना होगा कि इस दिलचस्प घटना का चुनाव में किस राजनीतिक दल को कितना लाभ मिलता है!

