जो काम ममता बनर्जी अपने 15 सालों के शासनकाल में नहीं कर पाई ,उस काम को राज्य में सरकार बनने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार और सरकार के पहाड़ के सहयोगी दल गोरख राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के सैनिकों ने कर दिखाया. सिलीगुड़ी में फूलबाड़ी टोल प्लाजा बंद हो चुका है, जिसके लिए ट्रक ड्राइवर काफी समय से आंदोलन कर रहे थे. फुलबारी टोल प्लाजा बंद होने से ट्रक ड्राइवर काफी खुश हैं और जय श्री राम कह रहे हैं. इससे उन्हें टोल प्लाजा पर अपने ट्रक को घंटों खड़ा करने की आवश्यकता नहीं होगी.
राज्य में सत्ता बदलने के साथ ही पहाड़ में भी बदलाव दिख रहा है. सिलीगुड़ी, समतल और पहाड़ में बहुत कुछ बदलाव होने वाला है. उसका आगाज आज रोहिणी टोल प्लाजा पर टोल वसूली बंद करने से हुआ है. यहां भी फुलवारी टोल की तरह ही हालत थी. सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग जाने वाले वाहनों अथवा दार्जिलिंग से सिलीगुड़ी आने वाले वाहनों को रोहिणी टोल प्लाजा पर काफी इंतजार करना पड़ता था.इससे समय और पैसा दोनों ही बर्बाद होता था.
अगर आप सिलीगुड़ी से रोहिणी होकर दार्जिलिंग जाते हैं तो रोहिणी टोल प्लाजा पर टोल टैक्स जमा करना पड़ता था. स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के अनुसार जिसकी कोई जरूरत नहीं थी. यह एक तरह की अवैध वसूली थी, जो जीटीए के इशारे पर की जाती थी. कारण बताया जाता था कि रोहिणी सड़क के सुधार और जीटीए के अंतर्गत विकास कार्यों के लिए फंड का सदुपयोग किया जाएगा.
यह खेल काफी सालों से चला आ रहा था. स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी इस बात की जानकारी थी. लेकिन उन्होंने कभी इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया. जानकार बताते हैं कि रोहिणी टोल प्लाजा पर अवैध वसूली से इस रूट से चलने वाले वाहन चालकों के अलावा पर्यटकों के समय और धन का अपव्यय होता था. लेकिन वाहन चालकों तथा आम जनता का विरोध इसलिए सफल नहीं हो पाया, क्योंकि राज्य में टीएमसी की सरकार थी और जीटीए इस सरकार का एक स्वतंत्र हिस्सा था.
सूत्र बता रहे हैं कि जिस सड़क के नाम पर टोल वसूली होती थी, उस रोहिणी सड़क के निर्माण में सुभाष घसिंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्हीं की पहल और योगदान पर रोहिणी सड़क तैयार हुई.सड़क तो बन गई लेकिन कभी भी सड़क की दुर्दशा को सुधारने का उचित प्रयास नहीं किया गया. आज भी सड़क की अवस्था काफी खराब है.
सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग जाने वाले पर्यटक और यात्री वाहन अथवा दार्जिलिंग से सिलीगुड़ी आने वाले यात्री या यात्री वाहनों द्वारा गंतव्य स्थल पर पहुंचने में अधिक समय लगने का एक बड़ा कारण रोहिणी टोल प्लाजा और रोहिणी सड़क की खराब अवस्था है. बरसात या अन्य प्राकृतिक आपदाओं में सड़क की हालत लगातार खराब रहती है.
पिछले काफी दिनों से उत्पन्न असंतोष ने राज्य में सत्ता बदलते ही आक्रोश के रूप में फूट पड़ा, जब गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता और समर्थक भाजपा के झंडे लेकर रोहिणी टोल प्लाजा पहुंचे और टोल वसूली को बंद करवा दिया. गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा खरसांग महकमा समिति के अध्यक्ष नीमा लामा ने कहा कि यह सड़क सुभाष घीसिंग की पहल पर तैयार की गई थी. यह सड़क आम जनता की है. इसलिए टोल वसूली गैरकानूनी है. इसे हमने बंद करवा दिया.अब किसी भी वाहन चालक या यात्रियों को आज से टोल देने की जरूरत नहीं है.
बहरहाल रोहिणी टोल प्लाजा पर टोल वसूली बंद हो जाने से न केवल पहाड़ पर ही बल्कि सिलीगुड़ी, Dooars, तराई और समस्त क्षेत्र में वाहन चालकों और पर्यटकों- यात्रियों में खुशी देखी जा रही है. समतल से लेकर पहाड़ तक वे अपनी खुशी की भावना को जय श्री राम कहकर प्रकट करते हैं. पहाड़ के लोग उम्मीद करते हैं कि भाजपा सरकार पहाड़ के विकास के लिए वह सब कुछ करेगी, जो 15 वर्षों में टीएमसी सरकार नहीं कर पाई.
