मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जैसे ठान लिया है कि सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बहुत जल्द एक नायाब तोहफा देंगे. पिछले दिनों शुभेंदु अधिकारी सिलीगुड़ी आए और उत्तर कन्या में प्रशासनिक बैठक करके कोलकाता लौट गए. सूत्र बता रहे हैं कि कुछ बातें मीडिया के समक्ष हुई तो कुछ बातें पर्दे के पीछे भी हुई. उनमें से एक प्रमुख मुद्दा सिलीगुड़ी को प्रशासनिक जिला बनाने को लेकर था.
आखिर सिलीगुड़ी को जिला कैसे बनाया जाए, इसको लेकर मुख्यमंत्री के सामने कुछ आंकड़े और तथ्य भी रखे गए. आखिर सिलीगुड़ी को प्रशासनिक जिला बनाना क्यों आवश्यक है? इस संदर्भ में कुछ विधायकों ने तर्क भी रखे. विधायक आनंदमय बर्मन ने तर्क दिया कि यहां के लोगों को दार्जिलिंग जिला मुख्यालय तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. दार्जिलिंग पहुंचने में समय और पैसा दोनों ही खर्च होता है. इससे उन पर आर्थिक मार पड़ती है.
सूत्र बता रहे हैं कि शुभेंदु अधिकारी चाहते हैं कि सिलीगुड़ी को सभी मानदंडों पर तकनीकी और सामाजिक रूप से जिला घोषित करने में कोई रुकावट न रहे. इसके लिए सिलीगुड़ी को भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी रूप से तैयार करने की जरूरत होगी. विधायक आनंद मय बर्मन ने एक आंकड़ा पेश किया है, इसके साथ ही प्रस्तावित सिलीगुड़ी जिला का एक रोडमैप भी प्रस्तुत किया है. जिसके अनुसार सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर सिलीगुड़ी को जिला बनाना आसान हो सकता है.
सिलीगुड़ी को जिला बनाने के प्रस्तावित रोड मैप के अनुसार सिलीगुड़ी जिला के अंतर्गत सिलीगुड़ी, माटीगाड़ा, नक्सलबाड़ी, फांसी देवा, डाबग्राम फुलवारी विधानसभा क्षेत्र को शामिल किया जा सकता है. इसके अलावा जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज ब्लॉक के कुछ भागों को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है. इस तरह से पूरे क्षेत्र की आबादी लगभग 25 लाख हो जाएगी.
सिलीगुड़ी में जो तकनीकी और संस्थागत उपलब्धि पहले से है,वे हैं जिला अस्पताल, उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल, महकमा परिषद, सिलीगुड़ी नगर निगम, प्राथमिक विद्यालय परिषद, पुलिस कमिश्नरेट समेत सभी आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं पहले से ही मौजूद हैं. सिलीगुड़ी के अंतर्गत ही बीएसएफ,एसएसबी सीआरपीएफ और सेना की महत्वपूर्ण यूनिट कार्य करती है, जिसके कारण सिलीगुड़ी सामरिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण हो गया है.
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र बन गया है और उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा शहर भी है. कोलकाता के बाद सिलीगुड़ी का ही स्थान दिया गया है. सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, बिहार, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश सीमा से जुड़े व्यापार और आवागमन का प्रमुख केंद्र है. यहां से गुजरने वाला चिकन नेक पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ता है. यह काफी महत्वपूर्ण और संवेदनशील है.
इस तरह से सिलीगुड़ी को जिला बनाने में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए.लेकिन सिलीगुड़ी को जिला घोषित करने से पहले कुछ तकनीकी और संस्थागत कार्य भी करने होंगे. इसके लिए सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट का दायरा बढ़ाना होगा और नक्सलबाड़ी, खोडीबाडी और फांसीदेवा थाना क्षेत्र को भी इसमें शामिल करना होगा. इससे प्रस्तावित सिलीगुड़ी जिले में कानूनी, तकनीकी और पात्रता को पूरा करने में सुविधा होगी.
मुख्यमंत्री के साथ बैठक में सिलीगुड़ी को जिला बनाने को लेकर आ रही कानूनी और तकनीकी अडचनों को दूर करने की दिशा में काफी चर्चा हुई है. अगर जलपाईगुड़ी बार एसोसिएशन की बात छोड़ दें तो सिलीगुड़ी को प्रशासनिक जिला बनाने के लिए एक आम सहमति बनती जा रही है. जलपाईगुड़ी बार ऐसोसिएशन इसका विरोध कर रहा है.
उत्तर कन्या में हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में ग्राम विकास एवं पंचायत मंत्री दिलीप घोष, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री खुदीराम टुड्डू, उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशित प्रमाणिक, दार्जिलिंग भाजपा सांसद राजू बिष्ट, अलीपुरद्वार सांसद मनोज टिगा, सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष, आनंद मय बर्मन तथा उत्तर बंगाल के पांच जिलों के जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे. इस बैठक में राज्य सरकार के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल, डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता, उत्तर बंगाल के आईजी और संबंधित जिलों के डीएम तथा एसपी उपस्थित रहे.
