सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण यानी SJDA घोटाले की दोबारा फाइल खुलने वाली है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी संकेत दे चुके हैं कि आईपीएस अधिकारी के जय रामन, जिनका इतिहास बताता है कि वह भ्रष्ट अधिकारियों के लिए किसी सिंघम से कम नहीं है, इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
इस खबर के चर्चा में आने के बाद एसजेडीए के भ्रष्ट अधिकारियों और कार्मिकों के पांव तले की भूमि खिसकने लगी है. उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही है. उन्हें अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा है. क्योंकि 2013 में SJDA घोटाले की जांच करने वाला आईपीएस अधिकारी के जयरामन पहले भी बड़े-बड़े कारनामे कर चुका है. उसने डीएम तक को गिरफ्तार किया है. यह वह पुलिस वाला है, जो अपनी कर्तव्य निष्ठा, ईमानदारी, समर्पण और सिद्धांत के लिए जाना जाता है.
पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने अपने चुनावी वादे के अनुसार संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों की जांच के लिए दो जांच आयोग का गठन किया है. कोलकाता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्ति न्यायाधीश विश्वजीत बसु संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच करने वाले आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं. जबकि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के जय रामन को इस आयोग का सदस्य बनाया गया है.
यह वही पुलिस अधिकारी है, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आगे भी नहीं झुका. ममता बनर्जी जब उसे तोड़ नहीं सकी तो उसे सस्पेंड कर दिया. ममता बनर्जी की सरकार में अपनी ईमानदारी की कीमत चुकाने और दर- दर की ठोकरें खाने के बाद आज उसे अपने संघर्ष और ईमानदारी की जीत का एहसास जरूर हुआ है, जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने SJDA घोटाले की दोबारा जांच का उसे ही दायित्व सौंप दिया.
आप के जयरामन के बारे में जरूर जानना चाहेंगे. साल 2013 की बात है. राज्य में टीएमसी की सरकार थी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी थी. सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण बोर्ड में एक बड़े घोटाले की रिपोर्ट सामने आई. SJDA पर 200 करोड रुपए के घोटाले के आरोप लगे. उस समय मालदा के जिला मजिस्ट्रेट आई ए एस किरण कुमार SJDA बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत थे. जबकि आईपीएस अधिकारी के जय रामन सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त होते थे. के जय रामन को घोटाले की जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया.
यह वही आईपीएस अधिकारी हैं, जिसने SJDA घोटाले की जांच की. जांच के क्रम में के जय रामन को कुछ ऐसे सूत्र मिले जो किरण कुमार को संदिग्ध बनाते थे. के जय रामन को किरण कुमार की गिरफ्तारी के लिए कुछ और सबूतों की जरूरत थी. किरण कुमार को कटघरे में लाने के लिए उनके खिलाफ सबूत और साक्ष्यों की तलाश कर रहे के जय रामन को इसी बीच सफलता मिली. सूत्र बताते हैं कि जैसे ही के जय रामण को किरण कुमार के खिलाफ सबूत मिल गए, उन्होंने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. एसजेडीए अधिकारी और मालदा के डीएम की गिरफ्तारी से सिलीगुड़ी समेत पूरे उत्तर बंगाल में सनसनी फैल गई.
के जय रामन ने अपनी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया था और उन्हें लग रहा था कि सरकार उन्हें शाबासी देगी. मगर ऐसा हुआ नहीं. जल्द ही के जय रामण को राज्य सरकार के सचिवालय से एक बुलावा आ गया. सूत्र बताते हैं कि नवान्न पहुंचने से पहले ही के जय रामण को पता चल गया था कि उनके कारनामे से सरकार खुश नहीं है. कहा जा रहा है कि के जय रामन के नवान्न पहुंचने से पहले ही कुछ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मुख्यमंत्री के सामने क्या कहने और क्या बर्ताव करने की बात बता दी थी, जिसका सीधा अर्थ यह था कि उन्हें सच नहीं कहना है. लेकिन यह बात उनके जमीर को स्वीकार नहीं थी.
अपनी निर्भीक और कठोर छवि के लिए जाने जाने वाले के जय रामन पर अनुशासनहीनता और उद्दंडता का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री सचिवालय ने उन्हें निलंबित कर दिया. निलंबन की अवधि समाप्त होने के बाद के जय रामन जैसे भटक रहे थे. टीएमसी सरकार में उन्हें कोई अच्छी पोस्ट नहीं मिली. लेकिन एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि झूठ सच पर कितना ही भारी क्यों ना हो, एक न एक दिन सच सामने आ ही जाता है. काफी संघर्ष और भाग दौड़ के बाद आखिरकर हवा का रुख घूमा. सत्ता परिवर्तन हुआ और राज्य में भाजपा की सरकार आई. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने के जय रामण की ईमानदारी, कर्तव्य निष्ठा और समर्पण की कद्र करते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेवारी सौंप दी है.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सिंघम बन चुके के.जयरामन पश्चिम बंगाल कैडर 1997 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. इससे पहले वह वायु सेना में भी काम कर चुके हैं.वर्तमान में वह एडीजीपी और आईजीपी उत्तर बंगाल के तौर पर तैनात थे. पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी ईमानदारी और समर्पण की बात चुनाव आयोग के कानो में पहुंची तो चुनाव आयोग ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी थी. सुबेंदु अधिकारी भी ऐसे ईमानदार पुलिस अधिकारी के प्रशंसक बन गए. अब उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई है.
पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अपने चुनावी वादे के अनुसार संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों की जांच के लिए दो जांच आयोग का गठन किया है. कोलकाता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विश्वजीत बसु संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच करने वाले आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के जय रामण को इस आयोग का सदस्य बनाया गया है. यह दोनों ही आयोग 1 जून से अपना काम शुरू कर देंगे.
