दुश्मन की ताकत हुई कमजोर. चीन की चालाकी धरी रह गई. बांग्लादेश हाथ मलता रह गया. पाकिस्तान की दाल गल नहीं पाई. क्योंकि जिस चिकन नेक की सुरक्षा को लेकर बंगाल से लेकर पूरा देश चिंतित और आशंकित रहता था, अब यह चिंता और आशंका दूर हो गई है.
पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सिलीगुड़ी गलियारे में से 120 एकड़ हिस्सा केंद्र सरकार को सौंप दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी गलियारे को केंद्र के हवाले करने की प्रक्रिया जारी कर दी गई है. यह वही भाग है, जो नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और तिब्बत क्षेत्र से होकर गुजरता है. यही कारण है कि यह खासा संवेदनशील हो जाता है.
सिलीगुड़ी गलियारे का यह भाग सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस भाग में अगर जरा सी भी गड़बड़ी होती है तो इसका असर न केवल सिक्किम, बल्कि उत्तर पूर्व के अन्य सात राज्यों पर भी पड़ना तय माना जाता है. कई बार चीन इस भूभाग पर अपनी नापाक हरकतें दिखा चुका है. हमारे देश के जवान रात दिन इस सामरिक क्षेत्र की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं और उनकी कोशिश यह रहती है कि यहां परिंदा भी पड़ न मार सके!
पश्चिम बंगाल की सुवेंदु सरकार ने अपने तय कार्यक्रम के अनुसार सेवेन सिस्टर्स को जोड़ने वाले एक मात्र सिलीगुड़ी से गुजरने वाले महत्वपूर्ण संवेदनशील चिकन नेक को केंद्र सरकार के हवाले कर पूरे प्रदेश खासकर सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल को सुरक्षा के दृष्टिकोण से अभेद्य बना दिया है . अब केंद्र सरकार ही चिकन नेक की सुरक्षा, मजबूती, स्थायित्व और उसके भविष्य को लेकर तमाम तरह की योजनाओं का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी, जो दुश्मन को करारा जवाब देगा.
आपको बताते चलें कि भारत बांग्लादेश खुली सीमा पर बाड़ लगाने का काम जल्द ही शुरू होने वाला है. सुवेंदु सरकार ने इसके लिए जमीन आवंटित कर दी है. केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियां जल्द ही बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए अपनी सुनियोजित योजना को अमली जामा पहनाने में जुट गई है. पिछली तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने बांग्लादेश से घुसपैठ को रोकने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया था और घुसपैठ के लिए केंद्रीय एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया था.
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. बंगाल में बीजेपी की सरकार है. ऐसे में डबल इंजन की सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है. चिकन नेक को अभेद्य किला बनाने के लिए बंगाल की शुभेंदु सरकार ने नेशनल हाईवे के 7 हिस्सों को एन एच ए आई और एन एच आई डी सी एल को सौंपने की मंजूरी दे दी है. इन 7 हिस्सों में से पांच सिलीगुड़ी गलियारा या चिकन नेक से होकर गुजरते हैं.
इस संबंध में बंगाल सरकार के मुख्य सचिव के दफ्तर से एक प्रेस नोट भी जारी किया जा चुका है. पिछली तृणमूल कांग्रेस की सरकार में केंद्रीय एजेंसियों ने राज्य सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखा था, लेकिन तत्कालीन ममता बनर्जी की सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और कम से कम 1 साल तक यह प्रस्ताव लंबित रहा. भारतीय जनता पार्टी ने इस संबंध में ममता बनर्जी की सरकार द्वारा त्वरित कदम न उठाने के पीछे बांग्लादेश से घुसपैठ को प्रोत्साहन माना था और इस पर काफी हंगामा भी किया गया था.
सिलीगुड़ी के नजदीक चिकन नेक का जो भाग काफी संवेदनशील माना जाता है, वह नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के बीच फंसा हुआ है. यह हिस्सा लगभग 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा है. इसी भाग पर चीन की गिद्ध दृष्टि कब से टिकी हुई है. बांग्लादेश भी जब तब आंखें दिखाने लगता है और पाकिस्तान की हेकड़ी भी समय-समय पर सामने आती रहती है.
भारत के लिए यह भाग इतना महत्वपूर्ण है कि अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर सेवेन सिस्टर्स पर पड़ना तय है. उत्तर पूर्व के सात राज्यों की कनेक्टिविटी से लेकर विकास और बुनियाद तक सब तरह से यह बाधित हो सकती है. केंद्र सरकार की योजना है कि इस क्षेत्र में एक मजबूत और चौड़े हाईवे का निर्माण किया जाए. सुरक्षा जानकार पहले से ही केंद्र सरकार को अपनी राय देते रहे हैं.
तृणमूल कांग्रेस की सरकार में केंद्र के पास करने के लिए कुछ नहीं था. लेकिन अब डबल इंजन की सरकार हो जाने से केंद्र और केंद्रीय एजेंसियों के लिए यह आसान हो गया है. बंगाल सरकार के इस ऐतिहासिक कदम के बाद विशेषज्ञ कयास लगा रहे हैं कि अब सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल के लोगों को डर के साए में जीने की जरूरत नहीं रह गई है और ना ही उत्तर पूर्वी राज्यों में अस्थिरता का खतरा है.
इसका एक और सबसे बड़ा लाभ यह होने वाला है कि बरसात और मानसून के समय पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन या उत्तर पूर्व राज्यों से गुजरने वाले नेशनल हाईवे के टूटने या खंडित होने का कोई खतरा नहीं रहेगा. न केवल सिक्किम सुरक्षित रहेगा, बल्कि असम से लेकर उत्तर पूर्व के सभी राज्य कनेक्टिविटी, विकास और स्थायित्व के मामले में हर तरह के भय और चिंता से मुक्त रहेंगे. केंद्र सरकार की योजना में दार्जिलिंग की पहाड़ियों, Dooars, सिक्किम, भूटान, उत्तर बंगाल के बांग्लादेश से सटे इलाके जैसे मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तरी 24 परगना आदि क्षेत्रों में भी बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होने की गुंजाइश बढ़ गई है.

