पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने केंद्र को 142.79 एकड़ जमीन सौंप दी है. इसके बाद केंद्र सरकार के द्वारा बांग्लादेश की बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश BGB के द्वारा आक्रामक रूख अपनाए जाने के बावजूद बाड़बंदी का काम जोरो से शुरू कर दिया गया है. भारत की सीमा सुरक्षा बल फेंसिंग का काम तेजी से कर रही है. लेकिन BGB इसे रोकने की कोशिश कर रही है.
भारत बांग्लादेश की सीमा दुनिया की सबसे लंबी जमीनी सीमाओं में से एक है. इसकी कुल लंबाई 4096 किलोमीटर है, जो पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय ,त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है. इस सीमा पर सीमा सुरक्षा बल भारत की तरफ सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है. जबकि बांग्लादेश की तरफ बीजीबी तैनात रहती है. हाल के महीनो में बांग्लादेश के जवानों के द्वारा फेंसिंग कार्य में बाधा डालने, पत्थर फेंकने और सीमा सुरक्षा बल के जवानों से बहस करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी है.
पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल के लोगों से वादा किया था कि राज्य में भाजपा की सरकार आने पर बांग्लादेश की खुली सीमा पर बाड़बदी की जाएगी. बंगाल सरकार के द्वारा जमीन सौंपने के बाद इस पर काम शुरू हो चुका है. सीमा सुरक्षा बल के जवान बांग्लादेश के जवानों के द्वारा बाधा डालने के बावजूद अपना काम तेजी से कर रहे हैं. इससे भारतीय सीमावर्ती गांवों में खुशी देखी जा रही है.
पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद, नादिया, मालदा,कूचबिहार आदि ऐसे इलाके हैं जहां बांग्लादेश की खुली सीमा देखी जाती है. काफी भाग में बाड़बंदी नहीं की गई है. क्योंकि इसके लिए पिछली सरकार ने बीएसएफ को जमीन नहीं दी थी. स्थानीय भारतीय लोग खुली सीमा के कारण रात में सो नहीं पाते थे. उनके घरों में सीमा पार से आए चोर डकैतों, मवेशी तस्करों आदि के द्वारा अप्रिय घटनाओं को अंजाम दिया जाता था. इससे उनका जीना दूर हो गया था. उन्होंने कई बार केंद्र सरकार, बीएसएफ और राज्य सरकार को भी अवगत कराया. लेकिन राज्य सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध नहीं कराए जाने से फेंसिंग का काम अधर में लटका रहा.
अब सीमा पर फेंसिंग का काम शुरू हो गया है तो स्थानीय लोगों के चेहरे पर विजय की मुस्कान देखी जा रही है. यहां के लोगों में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है. उनके लिए देश प्रथम है. वे कहते भी हैं कि जब देश सुरक्षित रहेगा, तो राज्य भी सुरक्षित होगा. यही कारण है कि बीएसएफ के द्वारा फेंसिंग के कार्य में वे बढ़ चढ़कर सहयोग कर रहे हैं. गांव के कई लोगों ने स्वेच्छा से अपनी जमीन सरकार को दान में दे दी है.
कूचबिहार जिले के माथाभंगा एक ब्लॉक के सत्यग्राम मानबाड़ी इलाके के तीन निवासियों ने भारत बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी काम को आसान करने के लिए स्वेच्छापूर्वक 33 डेसिमिल जमीन दान कर दी है. सरकार को जमीन देने वाले विकास राय बताते हैं कि उन्होंने गांव, राज्य और देश की सुरक्षा और भलाई के लिए जमीन दान की है. उन्होंने कहा कि यह काम पहले ही हो जाना चाहिए था. बहरहाल काम देर से शुरू हुआ है. लेकिन उन्हें विश्वास है कि बाड़ लगाने से घुसपैठ की घटनाओं में कमी आएगी. इसके साथ ही मवेशी तस्करी और फसलों को भी नुकसान नहीं होगा.
एक दूसरे दानदाता ने केंद्र सरकार की पहल का स्वागत किया है. भारत माता की जय कहते हुए इस दानदाता ने विश्वास व्यक्त किया कि जल्दी फेंसिंग का काम पूरा होगा और वह अपने घर में सुरक्षित होंगे. निश्चित रूप से बॉर्डर पर फेंसिंग का काम शुरू होने से भारत बांग्लादेश इलाके में रहने वाले भारतीय हिंदू परिवार के लोग काफी खुश हैं. उन्होंने दिवाली मनानी शुरू कर दी है. यहां के लोगों का कहना है कि पिछले कई सालों से उनके मवेशी सीमा पार से आए तस्कर चुरा ले जाते थे. इसके अलावा रात के समय यहां घुसपैठ देखी जाती थी, जिसके कारण सीमावर्ती इलाकों के रहने वाले लोग काफी परेशान और चिंतित रहते थे.
मालदा समेत बांग्लादेश की कई खुली सीमाओं पर निवास करने वाले भारतीय लोगों को लगता है कि जल्द ही बांग्लादेश से लगती खुली सीमा बंद हो जाएगी. इससे न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि बंगाल में घुसपैठ रुक जाएगी. बंगाल में नई सुवेंदु सरकार ने आते ही बांग्लादेशी घुसपैठ की कमर तोड़ दी है. इसके लिए देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पीठ ठोकी है और विश्वास व्यक्त किया है कि जल्द ही बंगाल से घुसपैठिए वापस बांग्लादेश चले जाएंगे.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर राज्य के प्रत्येक जिलों में अवैध घुसपैठियों के लिए शिविर बनाए जा रहे हैं, जहां से उन्हें उनके देश भेज दिया जाएगा. सीमा पर रहने वाले भारतीय लोग इससे काफी सुकून महसूस कर रहे हैं और बंगाल तथा भारत सरकार की पहल का दिल खोलकर स्वागत कर रहे हैं. सरकार को 20 डिसमिल जमीन देने वाले एक अन्य दानदाता ने कहा कि पहले जब यहां बाड़ नहीं थी तो बांग्लादेशी नागरिक आ जाते थे. वह रात में मवेशी चुरा ले जाते थे. हमारे घर में डकैती भी डालते थे. अब यह सब बंद हो जाएगा.
हालांकि फेंसिंग का काम पूरा होने में अभी समय लगेगा. लेकिन एक पहल शुरू हो गई है और सीमावर्ती गांव में रहने वाले लोगों का आत्मविश्वास भी बढा है. वातावरण में सकारात्मक बढी है. यह उनकी बातों से ही दिख जाता है. वह चाहे रविंद्र हो या शैलेंद्र या माणिक राय हो या हृदय बर्मन सब के सब खुश नजर आ रहे हैं. उनके लिए देश प्रथम है. जब देश सुरक्षित रहेगा, तभी वह भी सुरक्षित रहेंगे. इस तरह की भावना सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के दिल में बसी हो तो हर मुश्किल छोटी नजर आती है. ऐसे ही लोगों के चलते देश और राज्य सुरक्षित है. अंधेरा छट चुका है. रोशनी की उजास फूटने लगी है.

