सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल को स्वच्छ करने तथा खासकर शहरी क्षेत्रों को कचरा मुक्त बनाने के साथ ही स्वच्छता तथा साफ सफाई की कसौटी पर खरा करने के इरादे से बंगाल की नई सरकार ने तैयारी कर ली है. अगर आप सिलीगुड़ी में रहते हैं तो सावधान हो जाइए. क्योंकि 1 सितंबर से यहां काफी कुछ बदलाव लागू हो जाएंगे. आपको अभी से ही इसकी आदत डाल लेनी चाहिए.
पूरे बंगाल में 1 सितंबर से साफ सफाई और स्वच्छता को लेकर एक विशेष क्रांति शुरू होने वाली है. आप सार्वजनिक स्थानों पर थूक नहीं सकेंगे, ना ही सड़क किनारे या इधर-उधर पेशाब कर सकेंगे. पकड़े जाने पर देना होगा जुर्माना. घर का कचरा निकलता है तो कचरे की प्रकृति के अनुसार उसे अलग-अलग बाल्टियों में रखना होगा. क्यूआर कोड से आप चिन्हित किए जाएंगे. इसलिए विशेष सावधानी रखने की जरूरत है.
आप चाह कर भी कुछ नहीं छुपा सकेंगे. कूड़े कचरे को वास्तविक जगह पर ही निपटाना होगा. अगर सड़क पर कचरा पड़ा मिला तो आप एक विशेष ऐप के जरिए कचरे की तस्वीर संबंधित विभाग को भेज सकेंगे. तुरंत ही नगर निगम के कर्मचारी मौके पर पहुंच कर कचरा उठा ले जाएंगे. साफ सफाई कर्मचारियों की गाड़ी में जीपीएस tracker लगा होगा. इससे सफाई कर्मचारियों के कार्यों की गतिविधियों को भी देखा जा सकेगा.
और भी कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. स्वच्छ app लगभग शुरू किया जाने वाला है. हर नागरिक को इससे जुड़ना होगा. घर से कचरा निकालने से लेकर कचरा फेंकने और कचरा निष्पादन यानी कचरे की पूर्ण निपटान की स्क्रिप्ट तैयार की जा चुकी है. बहुत से लोग कह रहे हैं कि सिलीगुड़ी में इस तरह का तामझाम कोई नई बात नहीं है. जब टीएमसी का बोर्ड था, तब भी इस तरह के फैसले किए गए थे. उससे पहले वाम मोर्चा बोर्ड में भी कुछ इसी तरह के कदम उठाए गए थे.
सिलीगुड़ी में प्लास्टिक का कचरा कोई आज का विषय नहीं है. वर्षों से यहां बाजारों में तथा यत्र तत्र बिखरी प्लास्टिक की पनियां देखी जा रही है. इन पर रोक लगाने के लिए पूर्व में भी बंगाल सरकार और सिलीगुड़ी नगर निगम ने जोरदार तैयारी की थी. लेकिन उनका प्रयास विफल रहा. मौजूदा सरकार प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए बोतल क्रशर मशीन लगाने वाली है. जिससे प्लास्टिक कचरे का निस्तारण होगा. बंगाल सरकार ने कचरा निपटान की उन्नत प्रौद्योगिकी विकसित कर ली है. अगले साल तक यह हाईटेक तकनीकी काम करना शुरू कर देगी.
सिलीगुड़ी में ईस्टर्न बाईपास इलाके में कचरे का विशाल जखीरा है. इन्हें हटाने और कचरे से नई वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाने वाली है. ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका है.योजना बन चुकी है. सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, सरकार स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी कदम उठा रही है.वातावरण को स्वच्छ तथा दुर्गंध मुक्त रखने के लिए सरकार की जो योजना है, वह कुछ इस प्रकार से है. मंदिरों से निकलने वाले बासी फूलों से अगरबत्ती तैयार किया जाएगा. प्राकृतिक अबीर भी तैयार किए जाएंगे. इसके अलावा तालाब पोखर से जलकुंभी को निकाल कर हस्तशिल्प में उसका उपयोग करना आदि शामिल है.
लेकिन घूम फिर कर बात वापस उसी स्थान पर आ जाती है कि ऐसा तो हर प्रशासन में किया जा रहा था. लेकिन सिलीगुड़ी को इसमें कितनी सफलता मिली,शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं है. सिलीगुड़ी प्रशासन और सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने बंगाल को स्वच्छ बनाने की जो हाईटेक रणनीति तैयार की है, अगर उसका कार्यान्वयन निष्पक्ष, संतुलित और शाश्वत तरीके से होता है तो शायद सिलीगुड़ी की सूरत बदल सकती है. अन्यथा सुवेंदु अधिकारी की यह योजना भी पूर्ववर्ती सरकार और शासन अधिकारियों की तरह ही हवा हवाई निकलेगी.

