रात्रि के लगभग 11:00 बज रहे थे. राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर 3 ट्रक एक दूसरे के पीछे आते हुए नजर आए. ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने आगे वाले ट्रक चालक को रोका और उससे अपनी गाड़ी साइड करने के लिए कहा. चालक घबराया और बोला, सर मेरे पास माल के कागजात और बिल सब पूरे हैं. मेरी गाड़ी बीच में मत अटकाइये. आप बेशक मेरे सारे कागजात चेक कर लीजिए. अगर किसी तरह की कोई कमी हो तो बताइए.मैं अभी मालिक को फोन कर दूंगा.
लेकिन ड्यूटी अधिकारी ने ट्रक चालक की एक न सुनी और कहा कि आपके कागजात चेक करने होंगे. उसमें समय लगेगा. तब तक अपनी गाड़ी को साइड कर लो. लेकिन ट्रक चालक एक ही बात कहता रहा कि उसे अर्जेंट है. उसे जाना होगा. अगर वह अभी नहीं निकला तो उसका काफी नुकसान हो जाएगा. ड्यूटी अधिकारी ने कहा कि उसे अभी थाना चलना होगा. पुलिस से बहस करने के आरोप में भीतर कर दूंगा. तुम्हारी गाड़ी जब्त कर ली जाएगी. इसलिए जैसा कहा जा रहा है, वैसा करो.
पुलिस अधिकारियों की संख्या एक से अधिक थी. पीछे आ रहे दूसरे ट्रक चालक को भी रोका गया और उसे गाड़ी साइड में लगाने के लिए कहा गया. उस समय चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था. रात्रि का समय था और यह पूरा ग्रामीण इलाका था. जहां दूर-दूर टिमटिमाती रोशनी नजर आ रही थी. ट्रक चालक ने गाड़ी रोक दी और ट्रक से उतर गए. पुलिस के मांगने पर उन्होंने अपने कागजात भी दिखाए. उनके कागजात ओके थे.
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से निवेदन किया कि उनकी गाड़ी को रोका न जाए. क्योंकि गाड़ी में लदे माल को निर्धारित समय के भीतर ही गंतव्य स्थान पर ले जाना है. ट्रक के कागजातों को चेक करने के बाद जब उसमें कोई त्रुटि नहीं पाई गई तब एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि सर्विस टैक्स तो तुम्हें देना ही होगा. बगैर सर्विस टैक्स दिए हम यहां से जाने नहीं देंगे. जब सर्विस टैक्स के नाम पर एक पुलिस वाले ने ट्रक चालक से ₹50000 की मांग की तो उसने इतनी बड़ी राशि देने से इनकार कर दिया.
पुलिस अधिकारी और ट्रक चालक के बीच कुछ तनातनी भी हो गई. इस पर पुलिस वालों ने ट्रक चालकों के ट्रक को ही जब्त कर लिया. सोशल मीडिया में इस तरह की खबर फैली, तो पुलिस महकमा के साथ ही सुवेंदु अधिकारी की सरकार में हड़कंप मच गया. फिर सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इसे गंभीरता से लिया. बाद में राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपनी सरकार की पॉलिसी पर उठ रहे सवाल को लेकर एक बड़ा कदम उठाया. उन्होंने अपनी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाया और आरोपी 3 पुलिस वालों को सस्पेंड करने का फरमान जारी कर दिया.
लोग कहते हैं कि पुलिस मंत्री हो तो ऐसा! पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पुलिस मंत्री थी. लेकिन उन्होंने वह कुछ नहीं किया जो आज मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कर दिखाया है. मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस मंत्री सुबेंदु अधिकारी ने अपने ही विभाग के तीन पुलिस अफसरो को ट्रक चालकों से रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित कर दिया. लोग कहते हैं कि भाजपा का भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस जमीन पर दिखने लगा है.
राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले ट्रक चालकों से पुलिस के द्वारा रिश्वत लेना कोई आज का विषय नहीं है. ट्रक चालक के पास पूरे कागजात रहते हुए भी रिश्वतखोर पुलिस वाले कोई ना कोई कमी निकाल कर उनसे तोलाबाजी करने लगते हैं. बहुत से ट्रक चालक पुलिस से दुश्मनी करना नहीं चाहते. इसलिए वे जो भी संभव होता है, पुलिस वालों की जेब में रखकर निकल जाते हैं. लेकिन कोई कोई ट्रक चालक ऐसे भी होते हैं जो गलती ना होने पर पुलिस वालों से बहस करने लगते है और तब बात मीडिया और लोगों के सामने आती है.
आजकल पश्चिम बंगाल के दालखोला, चोपड़ा, इस्लामपुर आदि क्षेत्रों में बाहर से आने वाले ट्रक चालकों के साथ पुलिस की कुछ ज्यादा ही ज्यादतियां देखी जा रही हैं. इनके पास सारे कागजात होते हैं. लेकिन कभी सर्विस टैक्स के नाम पर तो कभी किसी और रूप में चंदा लेने, चंदा या टैक्स न देने पर ट्रक को जब्त करने की घटनाएं बहुत हो रही है. जब शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तभी उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह प्रधानमंत्री के नक्शे कदम पर चलते हुए ना खाएंगे और ना किसी को खाने देंगे के सिद्धांत पर चलते रहेंगे.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और अपने खुफिया सूत्रों से बंगाल के इन क्षेत्रों में होने वाले वाहन चालकों और पुलिस वालों के बीच सर्विस टैक्स के नाम पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत पाने के बाद इन कार्यों में लिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का फरमान जारी कर दिया. रिश्वतखोर पुलिस अधिकारियों को रंगे हाथो धर दबोचने के लिए पुलिस की एक टीम बनाई गई और उसके बाद एक विशेष अभियान में रंगे हाथों पकड़े जाने पर तीन पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया. इस अभियान में पांच लोग पकड़े गए हैं. उनमें तीन पुलिस अधिकारी थे.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि हमारी सरकार में किसी भी नागरिक, व्यापारी या ट्रांसपोर्टर से कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा. अगर कोई पुलिस वाला उनसे अवैध वसूली करता है तो ऐसे भ्रष्टाचारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जाएगा. आपको बताते चलें कि मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी की सरकार ने इससे पहले राज्य विधानसभा में गुंडा दमन विधेयक पारित करवा कर यह संदेश दे दिया है कि राज्य में अपराधियों और असामाजिक तत्वों का कोई स्थान नहीं है.
