अगर आप यह सोच रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस शासित सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड ने बिना नक्शा पास कराए भवन में रहने का अधिकार दे दिया या फिर अवैध निर्माण के खिलाफ तृणमूल प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तो इसका यह मतलब नहीं है कि आपके भवन को सरकार ने नहीं तोड़ने का सर्टिफिकेट दे दिया है! सावधान हो जाइए! क्योंकि सिलीगुड़ी नगर निगम की प्रशासकीय इकाई ने तृणमूल कांग्रेस के समय में की गई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी है.
आप जिस भवन में रहते हैं, सिलीगुड़ी नगर निगम की एक टीम उसका सर्वे कर रही है. यह टीम अवैध निर्माण अथवा बिना नक्शा पास कराए बने या बनाए जा रहे भवनों की सूची राज्य सरकार को जारी करने वाली है. सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ एक सख्त रूख अपनाया है. इसका संकेत सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 41 में तृणमूल शासित बोर्ड द्वारा अमार पाडा, अमादेर समाधान योजना के तहत बनाए गए करीब नौ लाख रुपए के पार्क को खंडित करके दे दिया है.
आजकल सिलीगुड़ी के इस पार्क की खूब चर्चा हो रही है. कहा जा रहा है कि पार्क का निर्माण सड़क पर तो अवैध तरीके से हुआ ही है, इसके साथ ही चारों तरफ रेलिंग और भीतर कुछ पौधे लगाकर इसका बिल ₹9 लाख कर दिया गया. स्थानीय लोगों को निर्माण के हिसाब से यह राशि काफी बड़ी लगती है. यही कारण है कि सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन ने पार्क निर्माण की अनियमितता और घोटाले की आशंका को देखते हुए जांच कराने का फैसला किया है.
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यहां इलाके में इस पार्क की आवश्यकता ही नहीं थी. क्योंकि यहां पार्क होने से जल जमाव और जल निकासी की समस्या हो रही है. दूसरे में सड़क भी संकरी हो गई है. स्थानीय लोगों को भी पार्क का कोई लाभ नहीं मिल रहा है. ऐसे में सिलीगुड़ी नगर निगम प्रशासन ने जेसीबी मशीन लगाकर तृणमूल कांग्रेस द्वारा बनाए गए इस पार्क को ही ढाह दिया है. जाहिर है कि जब सिलीगुड़ी प्रशासन तृणमूल कांग्रेस के बनाए पार्क को तोड़ सकता है तो आम जनता के अवैध निर्माण को कितनी राहत दे सकता है!
सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत रहने वाले ऐसे लोग डरे हुए हैं, जिनका भवन अवैध तरीके से बना है या फिर उन्होंने भवन का नक्शा ही पास नहीं कराया है. ऐसे लोग भी डरे हुए हैं जिन्होंने भवन का नक्शा तो पास कराया ,लेकिन भवन उस नक्शे के अनुसार बना ही नहीं है. ऐसे लोग भी डरे हुए हैं, जिन्होंने दो मंजिला भवन का प्लान तो स्वीकृत कर लिया, लेकिन वहां तीन या चार मंजिला भवन बनाया गया है. सिलीगुड़ी नगर निगम की सर्वे टीम ऐसे सभी भवनों की पड़ताल कर रही है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी में बिना नक्शा पास कराए बने भवनों की संख्या अत्यधिक है. इसी तरह से सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बने भवनों की तादाद भी अत्यधिक है. सूत्रों ने दावा किया कि सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 1, वार्ड नंबर 3, वार्ड नंबर 4, वार्ड नंबर 5, वार्ड नंबर 18, वार्ड नंबर 42, वार्ड नंबर 43 और वार्ड नंबर 46 में अधिकतर अवैध निर्माण हुए हैं. वैसे तो सिलीगुड़ी नगर निगम के लगभग सभी वार्डों में अवैध निर्माण हुए हैं. परंतु इन वार्डो में सर्वाधिक अवैध अथवा गैर कानूनी तरीके से निर्माण हुए हैं.
सिलीगुड़ी नगर निगम की प्रशासकीय इकाई के फरमान और राज्य सरकार की सख्ती के बाद इन इलाकों में रहने वाले लोग भविष्य की चिंता में डूबे हुए हैं. राज्य सरकार ने सिलीगुड़ी नगर निगम को शहर में हुए अवैध निर्माण की पहचान करके एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके भेजने का निर्देश दिया है. इसके लिए 13 सदस्यों की एक टीम तैयार की गई और सर्वे भी कराया गया. जब तृणमूल कांग्रेस की राज्य में सरकार थी, तो तृणमूल कांग्रेस शासित सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड ने यह रिपोर्ट राज्य सरकार को नहीं भेजी थी.
अब सिलीगुड़ी नगर निगम की प्रशासकीय इकाई रिपोर्ट तैयार करके राज्य सरकार को भेजने जा रही है. ऐसे में आप समझ सकते हैं कि यह आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं होने जा रहा है. सिलीगुड़ी नगर निगम की प्रशासक आर. विमला ने कहा है कि राज्य सरकार ने रिपोर्ट मांगी है तो राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई है. आगे भी होती रहेगी.
यानी संकट बढ़ गया है. ऐसे में आपको सतर्क हो जाने की जरूरत है! अवैध निर्माण अथवा बिना नक्शा के बनाए गए भवन स्थाई नहीं होते हैं. भूकंप के दृष्टिकोण से भी यह जोखिम पूर्ण हो सकते हैं. इसलिए हमेशा सही और विधि सम्मत भवन निर्माण किया जाना चाहिए!
