राजनीति में राजनेताओं को नरम गरम से गुजरना पड़ता है. यह प्रकृति का नियम है कि जो नेता जितना ही बड़ा और लोकप्रिय होता है, उसे उतनी ही ज्यादा तारीफों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है. तारीफ नेता के काम पर होती है. इससे नेता की लोकप्रियता बढ़ती है. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें नेता या सरकार का काम पसंद नहीं आता. ऐसे में वे लोग नेता या सरकार की बुराई करने लगते हैं. नेता या मंत्री की आलोचना होने लगती है.
किसी नेता की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है और जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है. लेकिन आलोचना का अपना तरीका होता है. यह मर्यादा में ही की जा सकती है. अगर आप किसी मंत्री के काम से खुश नहीं है तो आप नाराजगी व्यक्त कर सकते हैं. लेकिन किसी राजनेता या राजनेता की मां को गाली देना लोकतंत्र के खिलाफ है और यह अपराध हो जाता है. हमारे देश में बड़े-बड़े नेता हुए हैं. उन्हें भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता है. विपक्ष अक्सर उन्हें निशाना बनाता है. ऐसे लोकप्रिय नेता तथा उनकी मां को कुछ लोगों ने गलियां दी. उसे देश बर्दाश्त नहीं कर सका. प्रधानमंत्री या उनके जैसे राजनेताओं की सेहत पर तो कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन उन्हें गाली गलौज से अपमानित करने वाले लोगों को पुलिस और कानून की चक्की में पीस जाना पड़ता है. आपको याद होगा कि बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी तथा उनकी मां को गाली देने वाले युवक का क्या हाल हुआ था.
अब बंगाल में कुछ इसी तरह का कांड सुर्खियों में है. सिलीगुड़ी के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले 11वीं कक्षा के छात्र ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को न केवल अभद्र भाषा में गाली दी बल्कि उनकी मां को भी नहीं बख्शा . यह घटना स्कूल के भीतर घटी है. जैसा कि आप वीडियो में देख रहे हैं. किस तरह से यह छात्र सर्वप्रथम सुवेंदु अधिकारी की तस्वीर को पैरों से कुचलने की चेष्टा करता है और फिर अभद्र भाषा में उन्हें और उनकी मां को गाली देने लगता है.
आरोपी छात्र सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 34 स्थित सूर्यसेन कॉलोनी का निवासी है। आरोप है कि रील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे शहर में इसकी चर्चा शुरू हो गई।
मामले की जानकारी मिलने पर मंगलवार रात स्थानीय कुछ निवासी और भाजपा समर्थकों का एक वर्ग छात्र के घर के सामने जमा हो गया। आरोप है कि इस दौरान छात्र पर अंडे फेंके गए और उसके साथ मारपीट भी की गई।
स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस मौके पर पहुंची और छात्र को सुरक्षित निकालकर सिलीगुड़ी के न्यू जलपाईगुड़ी थाने ले गई। बुधवार को उसे जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
इस लड़के की हिम्मत तो देखिए कि उसने इस पूरे कांड का एक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया. बस हो गया हंगामा! इसमें कोई शक नहीं है कि सुबेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने मात्र डेढ दो महीने में ही वह काम कर दिखाया, जो 5 साल सत्ता में रहने के बाद भी बहुत कम मुख्यमंत्री ऐसा कर पाते है. ऐसे मुख्यमंत्री को अभद्र भाषा में गाली देना भला कैसे हजम हो सकता था! सोशल मीडिया पर उसका पोस्ट वायरल होते भी मामला पुलिस थाना में पहुंच गया.
17 साल का यह लड़का एनजेपी इलाके में अपने माता-पिता के साथ रहता है. एनजेपी थाने में उसके खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर एनजेपी पुलिस ने तुरंत ही अपनी सक्रियता बढ़ाई और अपने संसाधनों का प्रयोग करते हुए उक्त लड़के का पता लगाते हुए उसके घर पर पहुंच गई. पुलिस ने न केवल आरोपी लड़के को ही गिरफ्तार किया बल्कि उसके परिवार के कुछ सदस्यों को भी गिरफ्तार किया है. सूत्रों ने बताया कि आरोपी युवक के पिता को पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.
एनजेपी पुलिस ने छात्र को जलपाईगुड़ी कोर्ट में पेश करके रिमांड पर ले लिया है, जहां उससे पुलिस पूछताछ करेगी कि आखिर उसने मुख्यमंत्री तथा उनकी मां के खिलाफ इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग क्यों किया? किसके इशारे पर किया? क्या उसने अपनी मर्जी से यह सब किया था या इसके पीछे कोई और है? पुलिस लड़के से यह भी पूछताछ कर रही है कि आखिर उसने इतनी बड़ी हिम्मत कैसे दिखायी. वह भी उस मुख्यमंत्री के बारे में जिसे अभी सत्ता में आए डेढ 2 महीने से ज्यादा नहीं हुए हैं. पुलिस आरोपी लड़के से यह भी जानना चाहेगी कि क्या उसने सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसा नाटक किया था? फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है.
हालांकि आरोपी लड़का नाबालिग है. इसलिए कानून में कितनी सजा होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पुलिस उसके खिलाफ क्या धारा लगाती है. परंतु इससे जुड़ा एक बड़ा सवाल यह है कि छात्रों को पढ़ाई लिखाई से मतलब रखना चाहिए ना कि राजनीति करनी चाहिए .स्कूल को राजनीति का केंद्र नहीं बनने देना चाहिए. ऐसे अनुशासन हीन छात्रों के कारण स्कूल की प्रतिष्ठा धूमिल होती है. पुलिस यह भी जांच करना चाहेगी कि जब वह वीडियो बना रहा था, तब क्या कक्षा में टीचर भी मौजूद थे? या फिर छात्र के दोस्त?
जो भी हो, इस तरह की घटना निंदनीय है. पुलिस प्रशासन को बंगाल की संस्कृति और मर्यादा को कायम रखने के लिए सभी तरह के कदम उठाने की जरूरत है. ऐसे छात्रों पर स्कूल प्रबंधन को कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई करने की जरूरत है. अब देखना होगा कि आरोपी छात्र के खिलाफ स्कूल प्रबंधन क्या निर्णय लेता है.
