एजेंसी से बुकिंग कराई गई गैस की डिलीवरी डिलीवरी मैन आपके घर जाकर करता है. क्या आपको लगता है कि सील सही होने के बावजूद सिलेंडर में गैस कुछ कम है. अगर आप डिलीवरी मैन को अपनी शंका बताएंगे तो उसका यही जवाब होता है कि यह आपका वहम है. अगर तौलवाना हो तो आप कहीं और तौलवा लें. लेकिन आपकी गैस पूरी है.
जबकि सच तो यह है कि सिलेंडर में गैस पूरी नहीं होती है. 1 किलो से लेकर 2 किलो तक गैस कम हो सकती है. फिर भी आप संतोष कर लेते हैं कि चलो गैस तो मिल गई! जब से देश भर में गैस की किल्लत हुई है, तब से गैस की अवैध रिफलिंग और कालाबाजारी की घटनाएं बढ़ गई हैं. सिलीगुड़ी, माटीगाड़ा और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों मे घटी घटनाएं इशारा कर रही हैं कि यहां उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 1 किलो से 2 किलो तक गैस कम मिल रही है. ऐसा खेल काफी दिनों से खेला जा रहा है. फिर भी प्रशासन खामोश है.
आपको याद होगा, पिछले महीने 9 जून को माटीगाड़ा ब्लाक के न्यू चामटा स्थित एक गोदाम में पुलिस ने छापा मारा था. यहां अवैध रूप से गैस सिलेंडरों से गैस निकाल कर रिफलिंग की जा रही थी. इसकी जानकारी होने पर माटीगाड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और दो ट्रकों में लदे लगभग 400 से अधिक गैस सिलेंडरों को बरामद किया था. यह सभी सिलेंडर घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के थे.
पुलिस ने मौके से नोजल पाइप, नकली सील और वजन मापने की मशीन भी बरामद की थी. पुलिस ने ट्रक चालकों को जरूर गिरफ्तार किया था. लेकिन इस कांड की जांच हो रही है या नहीं, कौन-कौन लोग पकड़े गए, क्या पुलिस ने गैस एजेंसी के मालिक से पूछताछ की? इस प्रकरण में और भी लोग पकड़े गए हैं या नहीं, इत्यादि बहुत से प्रश्न अभी तक अनुत्तरित हैं.
सूत्र बता रहे हैं कि इस मामले की जांच अब ठंडी पड़ गई है. हालांकि प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि इस प्रकरण की जांच कोलकाता एनफोर्समेंट ब्रांच करेगी. यह जानकारी सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त सैयद वकार रजा ने दी है. इन मामलों में प्रशासनिक लापरवाही का ही नतीजा है कि इस धंधे में लगे लोगों का मनोबल बढ़ता जाता है. पुलिस को अपनी सीमा, दायरा, जांच की दिशा और सूत्र तलाशने में ही कई दिन लग जाते हैं और इसका फायदा तस्कर सबूत छिपाने में कर लेते हैं.
अगर माटीगाड़ा गैस रिफिलिंग कांड की जांच तेजी से होती और इस धंधे में लगे लोगों के खिलाफ पुलिस कठोर कार्रवाई करती तो यह मामला वहीं पर रुक जाता. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जिसके कारण सिलीगुड़ी में अवैध रिफलिंग का धंधा तेजी से जोर पकड रहा है. पिछले दिनों एक बार फिर से सिलीगुड़ी नगर निगम के 6 नंबर वार्ड में महानंदा पाड़ा में रहने वाले कई उपभोक्ताओं ने हंगामा किया था कि उनके एजेंसी से प्राप्त गैस सिलेंडरों में गैस भरी नहीं होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्येक सिलेंडर में 1 किलो से 2 किलो तक गैस कम आ रही है.
उपभोक्ताओं के इस आरोप के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उपभोक्ताओं की शिकायत की जांच कराई. मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने पिकअप वैन में लदे सिलेंडरों का वजन कराया तो पता चला कि प्रत्येक सिलेंडर में 1 किलो 2 किलो और यहां तक कि तीन-तीन किलो गैस कम थी. इसके बाद पुलिस ने मौके से 20 सिलेंडर को जब्त कर लिया.
अगर सिलीगुड़ी में इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है तो साफ लगता है कि इसमें प्रशासन की ढिलाई है. अगर दोषी लोगों के खिलाफ पुलिस सख्त एक्शन ले तो अवैध रिफलिंग की घटनाएं अपने आप थम जाएंगी. प्रशासनिक सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार पुलिस इस तरह के गोरख धंधे पर रोक लगाने के लिए प्रयत्नशील है. लोगों को जागरूक किया जा रहा है. पुलिस प्रशासन की सख्ती और उपभोक्ताओं की जागरूकता से ही ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है.

