फुलबारी To सालूगाड़ा यातायात करने वाला एक सिटी ऑटो जैसे ही हाशमी चौक पार करने के बाद विधान मार्केट में सवारी उठाने के लिए एक जगह रूका, तभी उसके आगे पीछे दो-तीन टोटो आ गये और यात्रियों को ढूंढने लगे.उधर सिटी ऑटो का चालक भी सवारी का इंतजार कर रहा था. कुछ देर में टोटो में एक दो सवारी बैठ गई. सिटी ऑटो सवारी का इंतजार करता रह गया. टोटो चालक को देखकर सिटी ऑटो के चालक ने बुरा सा मुंह बनाया. टोटो चालक जैसे अपनी सफलता पर मुस्कुरा कर आगे बढ़ गया.
सिलीगुड़ी में महीने, 2 महीने पर सिटी ऑटो और टोटो की जंग चलती रहती है. दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकते. दोनों की शिकायत रहती है कि वे एक दूसरे की रोजी-रोटी छीन रहे हैं. खासकर सिटी ऑटो चालकों की शिकायत रहती है कि सिलीगुड़ी में कुकुरमुत्ता की तरह बढ गये टोटो के कारण उनकी सवारियां कम हो रही है. इसलिए वे आए दिन टोटो से भिड़ जाते हैं.
सिलीगुड़ी में पिछले दो दिनों तक सिटी ऑटो की हड़ताल रही. उनकी मांग थी कि सिलीगुड़ी प्रशासन टोटो पर नियंत्रण करे. उनके लिए निर्धारित रूट पर ही वे टोटो चलाएं. उन्होंने कई बार प्रशासन का ध्यान भी आकृष्ट कराया था. लेकिन आरोप है कि प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया. फिर बिना किसी निर्णय के ही सिटी ऑटो चालकों की हड़ताल समाप्त हो गई. बुधवार से सिलीगुड़ी की सड़कों पर सिटी ऑटो दौड़ रहे हैं. प्र
टोटो और सिटी ऑटो वालों की जो शिकायत है अपनी जगह पर वह सही है सिटी ऑटो वालों का आप है कि सिलीगुड़ी में चल रहे बहुत संकट फोटो के कारण उनकी कमाई घट गई है हालांकि वे यह बात नहीं करते हैं कि प्रशासन टोटो को बंद कर दे उनका सेट पिया खाना है कि सिर्फ यह कहना है कि फोटो को उनके निर्धारित रोड पर ही चलने की अनुमति दी जाए दूसरी तरफ फोटो चालकों का रोना आता है कि प्रशासन ने उनके लिए जो निश्चित रूप निर्धारित किया है उससे उन्हें इतनी भी कमाई नहीं होती की घर परिवार का घर चला सके
ऊपर से ईएमआई और अनेक प्रकार के खर्च होते हैं जिनकी भरपाई भी टोटो चला कर नहीं कर पाते हैं सिटी ऑटो चालकों की शिकायत रहती है कि फोटो के कारण सिटी ऑटो कैसे सवारी फोटो में चले जाते हैं और उन्हें खाली गाड़ी ले जानी पड़ती है उनका कहना है कि वह भाड़े पर गाड़ी चलाते हैं उन्हें रोज शाम को मलिक को ₹500 से ₹700 देना पड़ता है उसके बाद उनके पास इतना भी नहीं बच पाता है कि वह अपने घर परिवार का खर्च निकल सके इस तरह से दोनों की शिकायत अपनी अपनी जगह सही है लेकिन इसका समाधान एक दूसरे की रोजी-रोटी छीनकर नहीं किया जा सकता है
सिलीगुड़ी प्रशासनिक सूत्रों ने भी बताया कि टोटो हो अथवा सिटी ऑटो दोनों को रोजी-रोटी कमाने का पूरा अधिकार है अगर टोटो को बंद किया जाता है कि उनके सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा फिर वह कैसे अपना घर परिवार चलाएंगे इससे शहर में व्यवस्था बढ़ेगी चोरी चिंताई और अपराधी घटनाओं में बेथित बढ़ोतरी होगी इसलिए सिटी ऑटो चालकों को ऐसी कोई मांग नहीं करनी चाहिए कि किसी की रोजी रोटी प्रभावित हो प्र
प्रशासन ने पहले ही फोटो के लिए रूट निर्धारित कर दिया है सिलीगुड़ी प्रशासन इस बात की कोशिश कर रहा है कि सभी टोटो चालक अपने निर्धारित रूप में ही गाड़ी चलाएं इन नियमों का वह पालन भी कर रहे हैं फिर भी कुछ एकड़ घटनाएं गलत रूट की हो सकती हैं प्रशासन की उस पर नजर बनी हुई है उधर टोटो चालकों का कि प्रशासन से मांग है कि उनके लिए कोई सीमा डेरा नहीं रखा जाए और सिलीगुड़ी में सभी मार्गों पर 22 चलाने की अनुमति दी जाए फो
टोटो चालकों की मांगों को लेकर सीटू समर्थित ई-रिक्शा यूनियन का धरना प्रदर्शन पिछले दिनों हुआ था सिलीगुड़ी कोर्ट कोर्ट के पास मुख्य डाकघर के सामने गांधी मूर्ति के नीचे यह धरना कार्यक्रम आयोजित हुआ था इस कार्यक्रम में सीपीएम के जिला सचिव सुमन पाठक सीटों की ओर से मोहन पांडा विमल पाल उदयन दास गुप्ता आदि कई नेताओं ने कहां की ई रिक्शा चालक के कारण सड़क जाम नहीं होती यातायात नियंत्रण के लिए दूसरे तरीके अपनाए जानी चाहिए उनका आरोप था कि सिलीगुड़ी में फोटो चालकों के कारण नहीं बल्कि जहां-था पार्किंग सड़कों पर पार्किंग के कारण ही जाम लगता रहता है फोटो अचानक चाहते हैं कि प्रशासन उन्हें शहर में सुचारू रूप से चलने देने की अनुमति दे.
ऐसा नहीं लगता है कि सिलीगुड़ी प्रशासन उनकी यह मांग मांगने का लगा परंतु यह भी सही है कि फोटो चालकों को उनके निश्चित रूप पर चलने से भी नहीं रोका जाएगा जहां तक सिटी ऑटो की बात है उन्हें अपने निर्धारित रोड पर ही बगैर किसी प्रतिस्पर्धा या हिंसा की भावना रखें अपना महान चलना चाहिए हनुमान चालक अपनी मेहनत और किस्मत से कमाता है इसके भाग में जितना होता है वह उतना ही कमाता है उससे ज्यादा नहीं कमा पाता कमा सकता है इस संतोष और भावना से दोनों वहां चालू दोनों तरह के वाहन चालकों को आपस में अच्छे संबंध रखते हुए अपना काम करना चाहिए.
