कैसे पिछले दो दिनों से अशांत पहाड़ को शांत कर दिया राजू बिष्ट ने. राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में घोषणा कर दी कि सरकारी दफ्तरों में काम काज बांग्ला भाषा में होगा. उसी दिन राजू बिष्ट ने सुवेंदु अधिकारी से बात की और कहा कि पहाड़ में नेपाली भाषा चलती है. वहां बांग्ला भाषा नहीं, नेपाली भाषा चाहिए. और सुबेंदु अधिकारी ने उनकी बात मान ली और अपनी बात को संशोधित करके कहा कि सरकारी दफ्तरों में क्षेत्रीय भाषाओं का पूर्ण सम्मान होगा.
शुक्रवार को पहाड़ में लगभग 2 लाख नाम राशन कार्ड की लाभार्थी सूची से काट दिए गए. इससे पहाड़ में लोगों में हड़कंप मच गया. मुसीबत के समय उन्हें जनप्रतिनिधि के अलावा उनका कौन सहयोग कर सकता था. वह राजू बिष्ट से मिले. राजू बिष्ट ने उन्हें भरोसा दिया और कहा कि उन्हें उनका अधिकार मिलेगा.आज ही राजू बिष्ट ने सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की है. सुवेंदु अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि पहाड़ में राशन लाभार्थी का नाम नहीं काटा जाएगा. जल्द ही इस मामले को सुलझा लिया जाएगा.
अगर पिछले 10 वर्षों के दौरान राजू बिष्ट के कार्यों तथा एक प्रतिनिधि के तौर पर उनकी कार्यशैली को देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि राजू बिष्ट पहाड़, समतल और Dooars के हीरो बनते जा रहे हैं. यहां की कोई भी समस्या हो उसका समाधान राजू बिष्ट के पास है. लोगों में राजू बिष्ट ने यह भरोसा और विश्वास एक दिन में तैयार नहीं किया है. वर्षों की उनकी मेहनत और समर्पण ने ही उन्हें जनता का चेहरा बनाया है.
राजू बिष्ट के समर्थक बताते हैं कि भाषा, संस्कृति, क्षेत्रीय अस्मिता, चाय बागान श्रमिकों के अधिकार, बंद पड़े चाय बागानों को पुन खोलने, सिनकोना बागान के कर्मचारियों की समस्याएं, सड़क ,रेल संपर्क, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, क्षेत्रीय विकास और इस तरह के अनेक मुद्दों पर राजू बिष्ट ने न केवल जनता की आवाज बुलंद की बल्कि उसे पूरा करके भी दिखाया है.
राजू बिष्ट उत्तर बंगाल में एम्स की स्थापना, कालिमपोंग में अस्पताल, सेवक में कोरोनेशन ब्रिज के समानांतर नए ब्रिज का निर्माण इत्यादि बहुत सी आवश्यकताओं को या तो पूरा कर दिया है या फिर इस राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. समर्थकों के अनुसार राजू बिष्ट प्रधानमंत्री सड़क ग्राम योजना से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना तक जरूरतमंदों को उनका हक मिले, इसके लिए वे लगातार प्रयत्नशील रहते हैं.
पहाड़ हो या तराई या Dooars के लोगों की मुसीबत का साथी व मददगार राजू बिष्ट एक ऐसा नाम है, जो सिर्फ एक सांसद ही नहीं है बल्कि इन सभी क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान भी है. पहाड़, तराई, Dooars में रहने वाले लोगों को जब भी कोई दिक्कत होती है, वे सीधे राजू विष्ट के पास पहुंचते हैं. उन्हें विश्वास है कि राजू बिष्ट उनकी समस्याओं का समाधान कर देंगे.
राजू बिष्ट के प्रति लोगों का यह विश्वास यूं ही नहीं है. पिछले 10 वर्षों से राजू विष्ट दार्जिलिंग लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने इन वर्षों में दिखा दिया है कि पहाड़ से लेकर तराई और Dooars में विकास योजनाओं को किस तरह से भूमि पर उतारी जा सकती है. समतल और पहाड़, सिलीगुड़ी के लोगों ने भी देखा है कि पिछले 10 वर्षों में राजू बिष्ट ने लोगों की समस्या समाधान के लिए किस तरह से दिल्ली दरबार से लेकर कोलकाता तक का चक्कर लगाया है.
आज सिलीगुड़ी, पहाड़ और आसपास के इलाकों में जो विकास दिख रहा है, जहां केंद्रीय सरकार का निवेश हुआ है, रेल से लेकर सड़क, पुल से लेकर भवन संरचना तक, नदी बचाओ से लेकर गुंडों और माफियाओं की दादागिरी को ललकारने, दलित और आदिवासी महिलाओं तथा चाय बागान के मजदूर और श्रमिकों को उनका अधिकार दिलाने तक, भूकंप और आपदा के समय लोगों के करीब खड़े रहने और उनका दुख बांटने तक जो भी कोई समस्या उनके सामने रखी गई, उसके समाधान तक उन्होंने चैन नहीं लिया.
राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि राजू बिष्ट की एक सच्ची जनप्रतिनिधि के तौर पर पहचान बनी है. उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की मुसीबत में सेवा की है तथा उनकी समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी माना और उसका समाधान किया है. क्षेत्र विकास और जनकल्याण से जुड़े मुद्दे और योजनाओं के लिए राजू बिष्ट ने संबंधित मंत्रालयों, अधिकारियों और सरकार के साथ लगातार संवाद करके एक समाधान प्रस्तुत किया है.
राजू विष्ट केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए भी जाने जाते हैं. राजू बिष्ट ने इसे साबित करके भी दिखाया है. निश्चित रूप से राजू बिष्ट समतल और पहाड़ का एक लोकप्रिय चेहरा बन गए हैं.
