आज AI सिर्फ हमारे सवालों के जवाब नहीं दे रहा, बल्कि वह खुद फैसला भी लेना शुरू कर चुका है. और यही बात दुनिया के बड़े ए आई अध्ययनकर्ताओं को डरा रही है. AI से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां खुद कह रही हैं कि रेगुलेशन जरूरी है. ऐसे में चिंता जायज है. और यह सवाल भी गंभीर है. क्या AI आने वाले समय में इंसान के नियंत्रण से बाहर हो जाएगा?
यह कोई कहानी नहीं है. ना ही यह कोई रील है. यह एक सच्ची घटना है, जिसने अमेरिका समेत दुनिया भर के देशों में हलचल मचा रखी है. लोग डरे हुऎ हैं . विद्यार्थी सहमे हुऎ हैं. अमेरिकी कांग्रेस में तो भूचाल आ गया है. भारत में भी लोग आश्चर्य से इस घटना को देख रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनल पर यह घटना तेजी से वायरल हो रही है.
सिलीगुड़ी में रहने वाला ऐसा कोई भी परिवार नहीं होगा, जहां घर के लोग, महिला, वृद्ध, युवा-युवती और सबसे ज्यादा छात्र एआई एप चैट जीपीटी का इस्तेमल ना करते हो. चैट जीपीटी छात्रों के लिए एक कुंजी की तरह है. छात्र ही क्यों, बल्कि सभी उम्र, व्यवसाय और पेशे के लोग अपने मोबाइल में चैट जीपीटी डाउनलोड करके मुश्किल समय में उसकी सलाह लेते हैं. इसका उन्हें लाभ भी मिलता है.यही कारण है कि लोगों का भरोसा चैट GPT पर लगातार प्रगाढ होता जा रहा है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबाॅट chat GPT वर्तमान समय में हर उम्र व वर्ग के लोगों के लिए एक भरोसेमंद साथी बन गया है. छात्र तो चैट GPT से इस तरह से जुड़ गए हैं कि इसके बगैर उनकी पढ़ाई भी नहीं हो पाती है. छात्रों के लिए तो चैट GPT उनके विद्यार्थी जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है. न केवल विद्यार्थियों के लिए ही बल्कि सभी उम्र, व्यवसाय और पेशे के लोगों के लिए यह किसी संजीवनी बूटी की तरह ही चमत्कारिक भी हो गया है. क्योंकि प्रश्न के बाद तुरंत ही सटीक जवाब उपलब्ध हो जाता है.
यही कारण है कि आजकल दुनिया भर में चैट GPT की मांग बढ गई है और उसकी सलाह को रामबाण माना जा रहा है. पर क्या वास्तव में चैट GPT द्वारा दी गई सलाह अथवा समस्या का समाधान उतना ही विश्वसनीय और सुरक्षित है? ऐसा मानना शायद ठीक नहीं होगा. क्योंकि हाल ही में अमेरिका में एक छात्र ने चैट GPT की सलाह मानकर समस्या का समाधान ढूंढना चाहा. लेकिन हो गई उसकी मौत. अब इस पर विवाद छिड़ गया है. छात्र के घर वालों का आरोप है कि उनका लड़का ड्रग्स और नशीले पदार्थ का सेवन करता था. उसने चैट GPT से drugs से जुड़े कुछ सवालों के जवाब मांगे थे.
चैट बाॅट ने छात्र को समस्या का समाधान बताया. छात्र के ड्रग से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में Chat gpt ने बताया कि क्रैटोम और इंजेक्शन को साथ लेना सुरक्षित हो सकता है. चैट gpt की सलाह लेकर छात्र ने मरने से पहले क्रैटोम इंजेक्शन और अल्कोहल का सेवन किया था. उसके बाद उसकी हालत खराब होने लगी. जब तक उसे अस्पताल पहुंचाया गया, उसकी मौत हो चुकी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई है. इसमें छात्र की मौत हृदय गति रुकने के कारण बताई गई है. अमेरिका में इस पर भारी विवाद छिड़ गया है. चैट gpt की जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है.
पीड़ित परिवार ने कहा है कि अगर कोई ए आई सिस्टम किसी उपयोगकर्ता को गलत सलाह देता है और उसके कारण उसका काफी नुकसान होता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? इसी पर चर्चा शुरू हो गई है. ओपन AI की प्रतिक्रिया सामने आई है. इस कंपनी के द्वारा बताया जा रहा है कि जिस मॉडल का इस्तेमाल छात्र ने किया था, उसे अब बंद किया जा चुका है. कंपनी की ओर से सफाई दी गई है कि ए आई सिस्टम में अत्यधिक सुरक्षा उपाय और संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा जा रहा है.
भारत समेत दुनिया भर के देशों में जब चैट gpt का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है, वहां इस तरह की घटनाएं चैट GPT के प्रति लोगों के विश्वास को खंडित करती है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि संवेदनशील विषयों पर इसकी सीमाएं क्या होनी चाहिए और अगर गलत सलाह की स्थिति आती है तो जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए? दुनिया भर के विशेषज्ञ भी इस पर चिंतित हैं और इस सवाल को हल करने की दिशा में सक्रिय हो गए हैं.
