September 9, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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माटीगाड़ा इलाके में 9 साइबर खाते के उजागर होने से पुलिस के भी होश उड़े! क्या आप अपना बैंक खाता ‘किराए’ पर देते हैं? तो हो जाएं सावधान!

महाराष्ट्र की साइबर अपराध शाखा एसटीएफ की पुलिस माटीगाड़ा पहुंची. माटीगाड़ा थाने की पुलिस ने महाराष्ट्र एसटीएफ का पूरा सहयोग किया और एक संयुक्त अभियान चलाकर माटीगाड़ा, शिव मंदिर, बागडोगरा, कावाखाली आदि इलाकों से दो युवकों समेत कम से कम 9 ऐसे बैंक खातों का पर्दाफाश किया, जिन खातों का उपयोग साइबर ठगी के लिए किया जाता था. राहुल राय और विकास राय नामक दो युवक फिलहाल पुलिस के हिरासत में है. और भी कई लोग पकड़े जा सकते हैं.

इन दिनों सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय हो गया है जो आपका आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि दस्तावेज लेकर आपका बैंक में खाता खुलवाता है. इन लोगों की तरफ से खातेदार को हर महीने 20 से 30% कमीशन देने का प्रलोभन दिया जाता है. सिलीगुड़ी के मेडिकल, कावाखाली, फुलबारी, शिव मंदिर, बागडोगरा, डाबग्राम और निचले इलाकों में रहने वाले गरीब, बेरोजगार और निर्धन युवक और युवतियां, महिलाएं, कुछ छात्र उनके जाल में फंसकर अपना महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंप कर हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं.

सूत्रों ने बताया कि अधिकांश खातेदारों को यह पता नहीं होता कि उनके बैंक खाते में रकम कहां से आती है, कौन ट्रांसफर करता है, आदि.उन्हें तो बस यही कहा जाता है कि तुम आम खाने से मतलब रखो. ऐसे लोग इतने मजबूर होते हैं कि उनके नाम से जारी ATM कार्ड भी उनका अपना नहीं होता. उनके डेबिट कार्ड पर गिरोह के लोगों का कब्जा होता है, जो उनके खाते का उपयोग रकम निकालने, ट्रांसफर करने और सभी वित्तीय लेनदेन के लिए करते हैं. खातेदार को तो सिर्फ अपने किराए से मतलब होता है. यानी कमिशन से मतलब होता है जो 2000 से लेकर 5000 तक हो सकता है.

पर बैठे-बैठे कमाई करने के प्रलोभन में इन लोगों को पता नहीं है कि वे कितनी बड़ी कीमत चुका रहे हैं. कुछ समय पहले तक तो पुलिस ऐसे लोगों पर ज्यादा फोकस नहीं करती थी. परंतु जिस तेजी से वर्तमान में साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में पुलिस के अधिकारियों ने साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए अब ऐसे लोगों को ही अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है जो अपना बैंक खाता किराए पर देते हैं. महाराष्ट्र साइबर ठगी के मामले में उत्तरायण चौकी की पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक खातेदार युवक को हिरासत में लिया है.

आरोप है कि साइबर ठगी के जरिए हासिल लगभग ढाई लाख रुपए उसके बैंक खाते से ट्रांसफर किए गए थे. गिरफ्तार आरोपी की पहचान विकास राय के रूप में हुई है. यह व्यक्ति कावाखाली का रहने वाला है. सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार लगभग ढाई लाख रुपए साइबर ठगों ने विकास के बैंक खाते में जमा किए थे. जांच के क्रम में पुलिस ने उसके खाते में संदिग्ध लेनदेन पाया और उसके बाद विकास को हिरासत में ले लिया.

बुधवार को सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने माटीगाड़ा, शिव मंदिर, बागडोगरा आदि इलाकों में अभियान चलाकर कम से कम 9 ऐसे बैंक खातों की पहचान की है, जिनका उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रुपए के लेनदेन के लिए किया जाता था. पुलिस ने शिव मंदिर इलाके में राहुल राय नामक एक अन्य युवक को गिरफ्तार किया है. विकास राय को कावाखाली से पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. राहुल राय से पूछताछ के बाद 9 फर्जी बैंक खातों का पता चला है. जिनका उपयोग साइबर अपराधी करते थे. सूत्रों ने बताया कि यहां से कई अन्य युवक युवतियों को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है. जो जाने अनजाने साइबर ठगी के खेल में साइबर ठगों का साथ दे रहे थे.

सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पहले पुलिस ने सिलीगुड़ी के बस्ती इलाकों में एक अभियान चलाया और कई ऐसे लोगों को हिरासत में लिया जिनके बैंक खातों का उपयोग साइबर ठग वित्तीय लेनदेन के लिए करते थे. पुलिस का मानना है कि साइबर ठग तक पहुंचने के लिए खातेदार तक पहुंचना जरूरी है. सिलीगुड़ी में इन दिनों ऐसा गिरोह सक्रिय हो गया है जो अशिक्षित, अनपढ़ और ग्रामीण लोगों को अपना शिकार बना रहा है.

साइबर ठगों ने लोगों को लूटने के लिए विभिन्न तरीके अपना लिए हैं. डिजिटल अरेस्ट तो पुरानी बातें हो गई है. उनके द्वारा रोज ही नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं. हाल ही में उत्तराखंड में साइबर ठगी के एक मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने एक करोड़ 20 लाख 18 हजार रुपए की साइबर ठगी के मामले में मालदा से एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है, जिसने एक महिला को विभिन्न उपक्रमों से डिजिटल अरेस्ट कर रखा था. उसका नाम शांतनु दास है. शातिर दिमाग के इस साइबर ठग ने अपना शिकार फांसने के लिए विभिन्न हथकंडे अपनाए थे.

आप व्यापारी हो या विद्यार्थी, अभिभावक हो या नौकरीपेशा, उन्हें आपकी कुंडली का पता होता है. वह आपकी कमजोरी को भी जानते हैं और उसे भुनाने का प्रयास करते हैं. कभी उनकी तरफ से कहा जाता है कि आपके बैंक खाते में काफी धनराशि ट्रांसफर की गई है तो कभी कहते हैं कि आपके बैंक में आवश्यकता से अधिक लेनदेन किया गया है, इसलिए आपके खिलाफ विभिन्न स्थानों में एफआईआर दर्ज कराया गया है.

वे कहते हैं कि आपके बैंक खातों का सत्यापन किया जाएगा. वह खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, वकील, जज बताते हैं. वे लिंक भेजते हैं. व्हाट्सएप पर कॉल करते हैं. कभी कहते हैं कि आपकी बेटी की दुर्घटना हो गई है. तो कभी कुछ. बहाना ऐसा कि निशाने पर लगे.

आमतौर पर साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए साइबर क्राइम पुलिस बैंक खातों, पंजीकृत मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए संबंधित बैंकों, सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों और मेटा से पत्राचार करती है. तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य के विश्लेषण के दौरान पुलिस को उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है और इसी के जरिए पुलिस साइबर ठग तक पहुंचती है.

साइबर ठग आपके मन की बात जान लेते हैं और इसीलिए उन्हें शिकार फसाने में आसानी होती है. बहरहाल जितनी जल्दी हो सके आप उनके जाल से बाहर आ जाएं उसी में आपकी भलाई है कभी भी अपना बैंक खाता किसी अजनबी को किराए पर ना दें अपने सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज संभाल कर रखें सुरक्षित रखें याद रखें लालच हमेशा बुरी बला होती है

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