कलकत्ता उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के स्पष्ट निर्देश के बाद मंगलवार सुबह सिलीगुड़ी में एक बड़े पैमाने पर बुलडोजर अभियान चलाया गया, जिसके तहत क्षेत्र में बने कई अवैध निर्माणों को ढाह दिया गया। जमीन को लेकर पिछले लंबे समय से चली आ रही कानूनी जटिलताओं और अदालती फैसलों के बाद हुई इस अचानक कार्रवाई से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ा विवाद प्रभावित परिवारों के दावों को लेकर सामने आया है। उड़े हुए आशियानों के बीच खड़े स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से इस जमीन पर लगातार निवास कर रहे थे और यही उनके जीवनभर की पूंजी व सिर छुपाने का एकमात्र ठिकाना था। हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के तहत होने की बात कही जा रही है, लेकिन प्रभावित लोगों ने गंभीर आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस के जबरन घरों से बाहर निकाला गया और उनके आशियानों को बुलडोजर से रौंद दिया गया।
अचानक हुई इस बेदखली के कारण पीड़ित परिवार भीषण संकट और खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हैं। उनका मुख्य दर्द यह है कि प्रशासन ने उनके लंबे अरसे से वहां रहने और मानवीय पहलुओं पर विचार किए बिना तथा बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना ही यह सख्त कदम उठाया। हालांकि घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है, लेकिन प्रशासनिक और पुलिस बलों की मौजूदगी के चलते फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अब स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस गंभीर समस्या के निष्पक्ष और उचित समाधान की मांग कर रहे हैं।

