पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। ममता बनर्जी ने CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करने के साथ ही पश्चिम बंगाल में SIR यानी Special Intensive Revision से पहले की मतदाता सूची के आधार पर विधानसभा चुनाव दोबारा कराने की मांग उठाई है। उनका यह बयान राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है।
23 सितंबर को फेसबुक लाइव के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और इसके लिए चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठने चाहिए। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी के राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की व्यापक अनियमितता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार CEC के पद पर बने रहेंगे, तब तक देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
ममता ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को भी एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ इस विषय पर चर्चा हुई है और जल्द ही इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक की जाएगी।
विवाद की एक अहम कड़ी उस रिपोर्ट से जुड़ी है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए जाने का दावा किया गया था।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस दावे पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग के मुताबिक, SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और प्रक्रिया में लिए गए निर्णय सर्वसम्मति से थे। आयोग ने यह भी कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय या सुझाव सामने आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
अब ममता बनर्जी ने SIR से पहले की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर पश्चिम बंगाल में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग को प्रमुख मुद्दा बना दिया है। उनके इस बयान के बाद राज्य में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।
