रविवार से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है. यह 10 अक्टूबर तक चलेगा. 10 अक्टूबर को अमावस्या है. महालया के साथ ही पितृ पक्ष का समापन और पितरों का तर्पण हो जाएगा. 15 दिनों की यह अवधि किसी भी शुभ कार्य के लिए उपयुक्त नहीं होती है. ऐसे में 15 दिन आप क्या करें और क्या नहीं करें, अगर शास्त्रों में विश्वास करते हैं तो इसे जानना और समझना जरूरी है.
वास्तव में पितृ पक्ष पितरों को याद करने, उन्हें सम्मान देने और इस अवधि दान पुण्य करने का समय माना जाता है. अगर आपने ऐसा किया तो जीवन में जो भी आप काम करेंगे, उसमें सफलता मिलने की अधिक संभावना रहती है. आपको आत्मिक शांति मिलती है. पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में खुशहाली आती है.
यह साल में एक बार आता है. आमतौर पर पितृ पक्ष की शुरुआत भादो महीने की पूर्णिमा तिथि को हो जाती है. पूर्णिमा को श्राद्ध होता है. जबकि उसके अगले दिन पितृ पक्ष का पहला दिन होता है. पितृ पक्ष अमावस्या तिथि को समाप्त होता है. शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान परिवार के पितर अपने लोक से उतर कर स्वजनों के घर लौटते हैं और आशा करते हैं कि उनके स्वजन उनका तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि के जरिए उनकी आत्मा को संतुष्ट करें. इसके बाद वह अपने स्वजनों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करके वापस अपने लोक में लौट जाते हैं.
अगर आपके घर में किसी बड़े बुजुर्ग की मृत्यु हो चुकी है तो उनकी तिथि को याद करके उसके अनुसार उन्हें प्रतिदिन तर्पण दे. उन्हें याद करें. घर में शांति बनाए रखें. उनके सम्मान में कोई कमी नहीं रखें. जब तक कि उनका श्राद्ध कर्म नहीं हो जाता है, तब तक सभी तरह के पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए तर्पण, पिंडदान और धर्म करें. लेकिन अगर पितरों की तिथि याद ना हो तो पूरे पितृपक्ष तक नियमों का पालन करें और अमावस्या पर नदी में नहा कर पितरों का तर्पण श्राद्ध करें.
बहुत से लोगों को अपने पितरों की मृत्यु की तिथि याद नहीं रहती है. ऐसे लोगों को पूरे पितृ पक्ष तक तर्पण करना चाहिए. ऐसा शास्त्रों में कहा गया है. आमतौर पर लोग पूरे पितृपक्ष तक अपने पितरों का तर्पण करते हैं और अमावस्या के दिन नदी में नहा कर सभी विधि विधान से पितरों का तर्पण करते हैं.
उस दिन गरीब और जरूरतमंद को दान देना सबसे बड़ा पुण्य का काम होता है. सिलीगुड़ी में महानंदा के तट पर महालया के दिन पितरों का तर्पण व श्राद्ध करने का एक अलग ही नजारा प्रस्तुत हो जाता है. लोग अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध के साथ ही शुभ दिन की शुरुआत में उल्लास प्रकट करते हैं.
अब जानिये कि पितृ पक्ष के दौरान क्या करें और क्या नहीं करें. अगर आप अपने पितरों के प्रति श्रद्धा रखते हैं तो इस दौरान मांसाहारी भोजन का परित्याग करें. शराब नहीं पीएं. अपने घर और आंगन को स्वच्छ रखें. घर में हर चीज को करीने से रखें. वातावरण जितना अधिक शांत रहेगा, उतना ही ज्यादा आपको लाभ मिलेगा. यह ध्यान रखें कि इस दौरान घर में किसी तरह का क्लेश अथवा लड़ाई झगड़ा नहीं होना चाहिए.
पितृ पक्ष के दौरान अपने आहार में से कुछ हिस्सा निकाल कर गाय, कुत्तों तथा अन्य जानवरों को खिलाने की परंपरा रही है. अपने पूर्वज के चित्र को दक्षिण दिशा में अथवा दक्षिण पश्चिम दिशा में रखें. इस दौरान भूल से भी कोई शुभ कार्य नहीं करें. जैसे शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई इत्यादि. इसके अलावा कार खरीदने, गहने खरीदने, जमीन आदि खरीदने से भी परहेज करें.
ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान बाल नहीं कटवाना चाहिए. इसके अलावा नाखून भी नहीं काटना चाहिए. जिस दिन आप अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध करेंगे, उसे अपने परिवार की परंपरा के अनुसार ही निभाएं. क्योंकि पितरों के तर्पण और श्राद्ध की परंपरा अलग-अलग हो सकती है.
इस साल 10 अक्टूबर को पितृपक्ष समाप्त होता है. उसके अगले दिन नवरात्रि शुरू हो जाएगी. इन कुछ नियमों का पालन करके आप अपने पितरों के आशीर्वाद का अधिकारी हो सकते हैं.
