अगर यह कहा जाए तो कोई गलत नहीं होगा कि सिलीगुड़ी चिकन नेक को दुश्मन देशों से उतना बड़ा खतरा नहीं है, जितना कि आस्तीन के सांपों से खतरा बढा है. ये आस्तीन के सांप हैं तस्कर, जो अपने ही लोगों को बर्बाद करके सिलीगुड़ी चिकन नेक को अव्यवस्थित करना चाहते हैं.वे रातों-रात अमीर बनने के लिए ऐसा कर रहे हैं. यहां की भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल में मानव तस्कर से लेकर ड्रग्स तस्कर तक सक्रिय हैं.
उत्तर बंगाल का भौगोलिक परिवेश, जलवायु और परिस्थितियां ऐसी हैं कि तस्करों के लिए सिलीगुड़ी जैसे एक स्वर्ग बन गया है. वह चाहे मानव तस्कर हों या ड्रग्स तस्कर, सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में ज्यादा सक्रिय हैं और यहीं से पूरे चिकन नेक को अव्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे हैं.वे उत्तर बंगाल की नौजवान पीढी को नशे में धकेल रहे हैं. सिलीगुड़ी की स्थिति ऐसी है कि यह विभिन्न पड़ोसी देशों की सीमाओं पर स्थित है.
उत्तर बंगाल में गरीबी और बेरोजगारी बहुत ज्यादा है. इसका लाभ तस्करों को मिल जाता है. सिलीगुड़ी और आसपास की लड़कियों को सब्जबाग बाग दिखाने तथा उन्हें अच्छी जिंदगी या अच्छी नौकरी का प्रलोभन देकर मानव तस्कर बड़ी आसानी से उन्हें अपने जाल में फांस लेते हैं. जैसे हाल ही में नौकरी और बेहतर जीवन शैली का झांसा देकर 2 नाबालिग लड़कियों को नेपाल ले जाने की मानव तस्करों ने कोशिश की थी. पानीटंकी के पास आरोपी मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया.
खोड़ीबारी पुलिस ने जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है, इनमें से एक गुजरात का रहने वाला महेश भूरालाल है जबकि दूसरे का नाम नवीन कुमार है, जो बिहार का रहने वाला है. अब यह दोनों व्यक्ति पुलिस रिमांड में हैं. पुलिस उनसे पूछताछ करके मानव तस्करी की जड़ तक पहुंचना चाहती है. मानव तस्कर और ड्रग्स तस्कर तो यहां पहले से ही सक्रिय हैं, पिछले कुछ सालों में सुपारी की तस्करी भी उत्तर बंगाल में ज्यादा देखी जा रही है.
उत्तर बंगाल में सुपारी की भी पर्याप्त खेती होती है. अथवा सुपारी को भूटान या असम से लाया जाता है. रास्ता चिकन नेक ही है. देश के दूसरे भागों में बंगाल की सुपारी को महंगी दर पर बेचा जाता है. इसलिए सुपारी तस्कर सक्रिय हैं. जयगांव थाना की पुलिस ने कबाड़ के कारोबार की आड़ में कथित तौर पर चलाए जा रहे सुपारी तस्करी के नेटवर्क का खुलासा किया है. पुलिस ने लगभग 12 टन सुपारी जब्त की है. इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सुपारी की तस्करी के लिए तस्करों ने एक भूटान वाहन का इस्तेमाल किया था. जिस पर उन्होंने उत्तर प्रदेश का नंबर प्लेट लगा दिया था.
जयगांव पुलिस ने सुपारी तस्करी के आरोप में गोदाम के मालिक फारूक अब्दुल्ला व रफीकुल इस्लाम को गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जयगांव पुलिस यह पता लगा रही है कि तस्करी की सुपारी को कहां से लाया गया था और कहां ले जाने की योजना थी और इसके पीछे और कौन-कौन से लोग शामिल थे. अब बात कर लेते हैं ड्रग्स तस्करों की. ऐसा कोई भी दिन नहीं बीतता, जब सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल में ड्रग्स तस्करी के मामले सुर्खियों में नहीं आते हैं.
सिलीगुड़ी चिकन नेक में drugs तस्करों का जाल किस तेजी से फैल रहा है, इस आंकड़े से ही पता चल जाता है. सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से पिछले महीने सितंबर 2026 तक मादक पदार्थों की तस्करी के क्रम में 657 मामले दर्ज किए गए हैं और लगभग 1300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने कथित तस्करों के कब्जे से भारी मात्रा में गांजा, ब्राउन शुगर, हेरोइन आदि बरामद किए. लेकिन इसके बावजूद सिलीगुड़ी drugs तस्करों का स्वर्ग बना हुआ है.
ड्रग्स तस्कर मादक पदार्थों की तस्करी के लिए हमेशा नए-नए रास्ते अपनाते रहे हैं. ये तस्करी के खेल में गांव के भोले भाले महिला और पुरुषों को भी शामिल कर रहे हैं. भूख, बेरोजगारी और गरीबी से टूटे लोग ऐसे कामों को करने के लिए तैयार हो जाते हैं. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के अंतर्गत भक्ति नगर से लेकर प्रधान नगर, माटीगाड़ा,बागडोगरा, एनजेपी आदि थानों की पुलिस ड्रग्स तस्करों के पीछे हाथ धोकर पड़ी है. लेकिन असली ड्रग्स तस्कर तो नहीं पकड़े जाते, अलबत्ता उनके मोहरे जरूर पकड़ लिए जाते हैं.
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ड्रग्स तस्करी के खेल में ज्यादातर मालदा के लोगों की सक्रियता देखी जा रही है. क्योंकि हर दूसरा तीसरा तस्कर मालदा का ही होता है. पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करके अदालत तक पहुंचाती है. लेकिन हमारी न्यायिक प्रक्रिया ऐसी है कि आरोपी ज्यादा समय तक जेलों में नहीं रह पाते हैं. उनकी जमानत बड़े तस्कर आसानी से करा लेते हैं. ऐसे मामलों में सजा की बात कौन करे, सच्चाई तो यह है कि 1 साल में दर्ज 50 मामलों में केवल चार-पांच की ही कोर्ट में सुनवाई पूरी हो पाती है.
जमानत मिलने के बाद फिर से उनका वही धंधा शुरू हो जाता है. विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जब तक ड्रग्स तस्करी पर पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में तेजी नहीं आती, तब तक उत्तर बंगाल में मानव तस्करी, drugs तस्करी व अन्य तस्करियों पर रोक लगाना आसान नहीं होगा. यह पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती है. परोक्ष रूप से पुलिस भी मानती है. तस्करी रोकने के लिए पुलिस को सजगता कार्यक्रम में भी चुस्ती बढाने की जरूरत है. नौजवान लड़के लड़कियों में सही गलत की समझ विकसित करने के लिए काउंसलिंग आदि की भी व्यवस्था होनी चाहिए.
सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के सूत्रों के अनुसार उत्तर बंगाल में तस्करी को रोकने के लिए पुलिस ने कुछ मजबूत कदम भी उठाए हैं. जैसे एंटी नारकोटिक्स टॉस्क टीम का गठन, मानव तस्करी रोकने के लिए पुलिस को पहले से ज्यादा अधिकार दिए गए हैं, आरोपियों की गिरफ्तारी और तस्करी में शामिल लोगों की संपत्तियों को अटैच करना, SOG, DD की टीम आदि का गठन इत्यादि प्रावधान किए गए हैं. पुलिस ने हेल्पलाइन भी जारी की है. लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है. जब तक जागरूकता अभियान, हर हाथ को काम और पुनर्वास व्यवस्था को जमीन पर नहीं उतारा जाता है, तब तक तस्करों का शिकार होने से यहां की नौजवान पीढी को बचाना आसान नहीं होगा.
