तांत्रिक विद्या के दृष्टिकोण से दशहरा से लेकर दीपावली तक का समय काफी संवेदनशील होता है. लोगों में ऐसी धारणा व्याप्त है कि दशहरा से लेकर दीपावली तक तांत्रिक कार्य सिद्धि के लिए तांत्रिक अनुष्ठान करते हैं और किसी निर्दोष को अपनी तांत्रिक साधना की भेंट चढ़ा देते हैं. असम से लेकर बंगाल के सूदूर ग्रामीण इलाकों में तांत्रिकों की कई रोंगट खड़े कर देने वाली घटनाएं कभी भुलाई नहीं जा सकती हैं. यह घटना भी उसी की एक कड़ी है.
कहा जाता है कि पश्चिम बंगाल में तंत्र मंत्र विद्या, तांत्रिकों की साधना, भूत पिशाच इत्यादि कुछ ऐसे शब्द हैं, जो यहां के परिवेश में रचे बसे हैं. असम से लेकर बंगाल तक भूत पिशाच से छुटकारा या मनोकामना सिद्धि के लिए तांत्रिक साधना का जो सबसे अनुकूल समय होता है, वह दशहरा से लेकर दीपावली तक होता है. बंगाल में तांत्रिक इस समय का सदुपयोग सर्वाधिक करते हैं. इस दशहरा में भी ऐसा ही हुआ है.
दशहरा से लेकर दीपावली तक मां कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद तांत्रिक अपनी साधना में जुट जाते हैं. इस क्रम में सिद्धि के लिए आमतौर पर पशु पक्षियों अथवा इंसानों की बलि एक सामान्य घटना है. सिद्धि के लिए तांत्रिक किसी भी हद तक जा सकते हैं. उन्हें तो बस सिद्धि करनी होती है. भले ही इस साधना के चक्कर में किसी इंसान का परिवार उजड़ जाए और उनके अपने खत्म हो जाएं! इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं होता है.
यह कहानी इसी बंगाल की धरती की है. कुछ समय पहले आपने सिलीगुड़ी के नजदीक माटीगाड़ा- बागडोगरा इलाके में एक तांत्रिक की करतूत के बारे में सुना था. अब एक ऐसे तांत्रिक के कारनामे सामने आ रहे हैं, जिनके बारे में आप सुनेंगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. उक्त तांत्रिक ने अपनी तंत्र साधना के क्रम में एक परिवार के दो सदस्यों को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दी.
आश्चर्य है कि इस तांत्रिक ने अपनी साधना पूर्ति के लिए परिवार के एक नौजवान को अपना शिकार बनाया. तांत्रिक के कहने पर लड़के ने अपनी पत्नी और अपने पिता को मौत के घाट उतार दिया तथा उनके कटे अंगों को मंदिर पर चढ़ा दिया. खून से मंदिर लाल हो गया.
पश्चिम बंगाल के कांकशा और बांकुड़ा दो ऐसे जिले हैं, जहां एक नदी के चर के सटे इलाकों में तांत्रिक क्रियाएं सर्वाधिक होती हैं . यह इलाका तांत्रिक साधना के लिए उत्तम माना जाता है, जहां दशहरा से लेकर दीपावली तक तांत्रिकों की तांत्रिक क्रियाएं चलती रहती है. आमतौर पर दशहरा से लेकर दीपावली तक नदी के सटे इलाके में विभिन्न स्थानों पर लाल निशान और तांत्रिकों की तांत्रिक क्रियाएं आप देख सकते हैं. यह घटना बांकुड़ा जिले की ही है.
यहीं एक तांत्रिक रहता था. वह एक स्थान पर अपनी तांत्रिक साधना कर रहा था. उसे दशहरा का इंतजार था जब वह अपनी साधना पूरी करने वाला था. सोनामुखी स्थित गांव में राजेंद्र चौधरी रहते थे. उनका एक लड़का था मंगल चौधरी. राजेंद्र चौधरी ने अपने बेटे की शादी कर दी थी. बहु का नाम रूंपा चौधरी था. इसी परिवार के यहां तांत्रिक का आना जाना था.
बताया जा रहा है कि मंगल चौधरी किसी बड़ी समस्या में पड़ गया था. वह तांत्रिक के पास अपनी समस्या के समाधान के लिए आया था. पहले तो तांत्रिक ने ऊपर से ही झाड़ फूंक कर दी थी. बाद में वह उसके घर भी आने लगा था. बताया जा रहा है कि तांत्रिक ने अपनी तंत्र विद्या से मंगल चौधरी को अपने वश में कर लिया था. ऐसी चर्चा है कि मंगल चौधरी वही कर रहा था जैसा तांत्रिक उससे करवा रहा था.
हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि आखिर मंगल चौधरी तांत्रिक के संपर्क में कैसे आया और तांत्रिक उसकी किस समस्या का समाधान करने के लिए तांत्रिक क्रियाएं कर रहा था. लेकिन एक दिन वह हो गया, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.
दशहरा के एक दिन पहले सोनामुखी गांव में तब हड़कंप मच गया, जब यहां के लोगों ने पिता राजेंद्र चौधरी और उनकी पुत्रवधू रूंपा चौधरी की हत्या तथा उनके कटे अंगों को मंदिर पर देखा. पूरा गांव स्तब्ध था. हत्यारे ने बड़ी बेरहमी से दोनों की हत्या करके उनके अंगों से बहते लहू से मंदिर को पाट दिया था. ग्रामीणों ने पुलिस को खबर दी. तुरंत ही पुलिस मौके पर पहुंच गई.
पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार किया. प्रारंभिक तफ्तीश में पता चला कि इस परिवार का एकमात्र बेटा मंगल चौधरी किसी तांत्रिक के वश में था और तांत्रिक के कहने पर ही उसने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है. पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से मंगल चौधरी को गिरफ्तार कर लिया. इस घटना को नवमी की रात अंजाम दिया गया था. आरंभिक साक्ष्यों से भी पता चलता है कि इस दोहरे हत्याकांड के पीछे तांत्रिक साधना हो सकती है.
पुलिस को अब तक जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार मंगल चौधरी अपनी पत्नी रूंपा चौधरी के साथ रोजाना इस मंदिर में आता था. यह पूरा इलाका लाल बाबा मनाचर कहलाता है.यह तांत्रिक साधना के लिए मशहूर है. सोनामुखी थाने की पुलिस ने इस बर्बर हत्याकांड की एफआईआर दर्ज कर ली है. हालांकि थाने में मंगल चौधरी पुलिस को अब तक इस दोहरे हत्याकांड का राज नहीं बता पाया है. पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है.
पुलिस दोहरे हत्याकांड के आरोपी से पूछताछ कर रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस दोहरे हत्याकांड के पीछे कहीं तांत्रिक अनुष्ठान तो नहीं था. क्योंकि हालात और सबूत चीख चीख कर बता रहे हैं कि घटना के पीछे तांत्रिक साधना जिम्मेदार है. पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. इसके साथ ही आरोपी से पूछताछ जारी है.
