जिस तरह से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सिलीगुड़ी नगर निगम कार्यालय का दौरा करके सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र के विस्तार की संभावना पर बल दिया है, उससे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं. अगर नगर निगम का विस्तार होने वाला है तो फिर प्रस्तावित वार्ड परिसीमन का क्या होगा? क्या यह काम अधर में लटकने वाला है?
पहले विस्तार और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया अपनाई जाती है. या तो सिलीगुड़ी नगर निगम के विस्तार की कार्रवाई को फिलहाल रोकना होगा या फिर परिसीमन का जो मसौदा है, उसको उसी रूप में लागू करना होगा. लेकिन इस पर भी एक मुश्त राय कायम नहीं हो रही है.
दूसरा महत्वपूर्ण सवाल है. क्या सिलीगुड़ी नगर निगम के चुनाव फरवरी में ही होंगे. जैसा कि मुख्यमंत्री ने कहा है. यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि अगर सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र का विस्तार होगा, तो इस मुद्दे पर अभी कोई तैयारी भी नहीं की गई है. उधर कोलकाता नगर निगम और हावड़ा का चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है.
सिलीगुड़ी नगर निगम की तरह ही कोलकाता नगर निगम के वार्ड परिसीमन को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच कोलकाता हाई कोर्ट ने नगर निगम चुनाव की तैयारी पर फिलहाल रोक लगा दी है. हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं करने का निर्देश दिया है. जाहिर है कि जब कोलकाता नगर निगम का चुनाव समय पर नहीं होगा तब सिलीगुड़ी नगर निगम का चुनाव भला कैसे मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए निर्दिष्ट समय पर हो सकता है.
प्रस्तावित योजना के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्डों की संख्या 47 से बढ़कर 63 करने की बात है. एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है. लेकिन सीमांकन और प्रक्रिया में उठ रही खामियों को लेकर विपक्ष के साथ-साथ भाजपा भी सवाल उठाने लगी है. जैसे कुछ इलाकों में 10000 या उससे अधिक आबादी होने के बावजूद वार्डो का विभाजन नहीं किया गया है, जिस पर विपक्ष सवाल उठाने लगा है और यह आरोप लगाया जा रहा है कि राजनीतिक उद्देश्य से ही वार्डो का परिसीमन किया जाएगा.
दार्जिलिंग जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुबीन भौमिक कह चुके हैं कि वार्ड परिसीमन में राज्य चुनाव आयोग की भूमिका होनी चाहिए थी. लेकिन नगर निगम और राज्य सरकार ने स्वयं ही ड्राफ्ट सूची तैयार की है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि आम लोगों से भी कोई राय नहीं ली गई है. सुबीन भौमिक का सवाल अपनी जगह सही है. क्योंकि चुनाव, चुनाव आयोग का विषय है और इसमें चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
इधर सिलीगुड़ी शहर की आबादी बढी है और उसका विस्तार भी तेजी से हो रहा है. सरकार सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र का विस्तार करना चाहती है ताकि एक बड़ी आबादी को सिलीगुड़ी नगर निगम के दायरे में लाया जा सके. पहले से भी इसकी मांग उठती रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि तब मौजूदा 63 वार्डों के ड्राफ्ट का क्या होगा? क्योंकि सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र का विस्तार होगा तो कई नए इलाके जुड़ेंगे और वार्डो का विस्तार होता जाएगा. तब नए सिरे से परिसीमन होगा और इस प्रक्रिया में काफी समय लगेगा.
