February 14, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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Siliguri में घटी एक अमानवीय घटना ने: एक पल की लापरवाही ने छीन ली जिंदगी !

An inhuman incident in Siliguri: A moment's carelessness took away a life

सिलीगुड़ी के रेगुलेटेड मार्केट में हुई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। रोज़ी-रोटी की तलाश में घर से दूर आए एक युवक की जिंदगी महज़ कुछ पलों में खत्म हो गई। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि इंसानियत को झकझोर देने वाली एक ऐसी कहानी बन गया है, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में टीस बनकर रहेगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश निवासी 29 वर्षीय लॉरी चालक विनोद कुमार पाल सामान लेकर सिलीगुड़ी के रेगुलेटेड मार्केट पहुंचा था। देर रात वाहन पार्क करते समय कथित लापरवाही के कारण यह दर्दनाक हादसा हो गया। सड़क किनारे थकान से चूर होकर सो रहे एक युवक के ऊपर अचानक लॉरी चढ़ गई। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि शांत रात में ऐसा भयावह मंजर सामने आ जाएगा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक उठी चीख-पुकार ने आसपास के लोगों को हिला कर रख दिया। लोग दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। देखा कि एक युवक बुरी तरह घायल अवस्था में तड़प रहा है। उसके पेट के ऊपर से भारी वाहन गुजर चुका था। तत्काल स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। हर कोई यही दुआ कर रहा था कि शायद उसकी सांसें बच जाएं।

अस्पताल में कुछ समय तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष चलता रहा। डॉक्टरों की टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन अंततः युवक को मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान चालसा निवासी सुशील ओराव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सुशील काम की तलाश में अक्सर सिलीगुड़ी आता-जाता था और उसी सिलसिले में उस रात मार्केट क्षेत्र में ठहरा हुआ था।

सुशील की असमय मौत की खबर जैसे ही उसके परिजनों तक पहुंची, घर में मातम छा गया। परिवार का कहना है कि वह मेहनती और जिम्मेदार युवक था, जो परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए दिन-रात मेहनत करता था। किसे पता था कि थकान मिटाने के लिए सड़क किनारे ली गई थोड़ी-सी नींद उसकी आखिरी नींद बन जाएगी।

घटना की सूचना मिलते ही प्रधान नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया। उसे सिलीगुड़ी अदालत में पेश किया गया है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसे के समय चालक की स्थिति क्या थी और क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।

यह हादसा कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है—क्या व्यस्त बाजार क्षेत्रों में रात के समय सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था है? क्या भारी वाहनों के चालकों को पार्किंग के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाता है? और सबसे बड़ा सवाल, क्या सड़क किनारे सोने को मजबूर लोगों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम है?

सुशील ओराव की मौत एक परिवार के सपनों का अंत है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि लापरवाही का एक क्षण किसी की पूरी जिंदगी छीन सकता है। जरूरत है अधिक जिम्मेदारी, सतर्कता और संवेदनशीलता की, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

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