शायद आपको यह अविश्वसनीय लगे, किंतु सच है कि हिमालय क्षेत्र से जुड़े इलाकों जिसमें सिक्किम, दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी आदि इलाके शामिल हैं, में म्यांमार से भी बड़ा भूकंप आ सकता है. ऐसे ही विनाशकारी और प्रलयंकारी भूकंप में सब कुछ तबाह हो सकता है. जिस तरह से नेपाल में भूकंप आया था, कुछ और पहले जाएं तो सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल में भूकंप आया था, उससे भी ज्यादा भयानक भूकंप का यहां खतरा मंडरा रहा है.
म्यांमार में जिस तरह का भूकंप आया था, उसकी कल्पना करने से भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं.2000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. जबकि 4000 से अधिक लोग घायल हुए हैं. यह भूकंप सागाइंग फॉल्ट के चलते आया था. इससे म्यांमार और बैंकॉक में भारी तबाही हुई थी वैज्ञानिकों ने बताया है कि सागाइंग फॉल्ट बहुत खतरनाक होता है.
सिलीगुड़ी और हिमालय गैंगेय क्षेत्र इलाकों में गंगा बंगाल फॉल्ट है. इसमें सागाइंग फॉल्ट जैसी गति होती है. यह फॉल्ट जोन सतह पर भी दिखाई देता है. सागाइंग फाल्ट के बारे में कहा जाता है कि यह एक सक्रिय फॉल्ट है, जो म्यांमार में भूकंप का कारण बना. सिलीगुड़ी और हिमालय क्षेत्र के लिए यह एक चेतावनी है. डावकी, कोपली, डिब्रूचौतांग फाल्ट जोन हैं, जो गंगा बंगाल और सागाइंग फाल्ट के बीच स्थित है. इन दोनों फॉल्ट के बीच कई अन्य फॉल्ट लाइन हैं. ऐसी स्थिति में इस बात की पूरी संभावना है कि एक फॉल्ट के सक्रिय होने से दूसरा फॉल्ट भी सक्रिय होगा.
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों का शोध और संभावनाएं काफी हद तक सटीक पाई गई है. आपको याद होगा कि कोरोना के समय में भी आईआईटी कानपुर ने कोरोना के सक्रिय और प्रभाव कम होने को लेकर एक सटीक संभावना व्यक्त की थी, जो काफी हद तक सही भी साबित हुई थी. इस बार भी आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक यह मानते हैं कि हिमालय और गैंगय क्षेत्र में म्यांमार और बैंकॉक से भी ज्यादा अथवा इसके समान भविष्य में भूकंप का खतरा मंडरा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हमें अभी से ही इस दिशा में कार्य करने की जरूरत है. अन्यथा भारत को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है.
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत जोन 5 में है. उत्तर पूर्व का शियर जोन अराकान से अंडमान और सुमात्रा तक के सबडक्शन जोन का एक हिस्सा है. सागाइंग फॉल्ट जमीन के ऊपर दिखाई देता है. जापान और यूरोप के विशेषज्ञों ने इस पर अध्ययन भी किया है. अनेक अध्ययनों से पता चलता है कि इस तरह का भूकंप डेढ़ सौ और 200 वर्षों में एक बार जरूर अपनी पुनरावृति करता है. भूकंप की तीव्रता आठ तक भी हो सकती है. सिलीगुड़ी और हिमालय क्षेत्र को सबसे ज्यादा खतरा क्यों है?
इसके बारे में आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंस विभाग के प्रोफेसर जावेद मलिक बताते हैं कि हिमालय में फॉल्ट लाइन काफी सक्रिय हो गई है. सभी ने फ्रंटल पार्ट्स पर काम करना शुरू कर दिया है. ऊपर भी कई फॉल्ट लाइन है, इसलिए हमें केवल प्लेट सीमा के आसपास भूकंप देखने की आवश्यकता नहीं है. बल्कि इसमें अधिक शोध और अध्ययन करने की जरूरत है. हमें अधिक से अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है तथा इस पर विचार करना चाहिए कि भूकंपों के प्रभाव को कम से कम कैसे किया जाए.
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में ऊर्जा लगातार जमा हो रही है. इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि एक भूकंप दूसरे भूकंप को ट्रिगर कर सकता है. प्रोफेसर मलिक के अनुसार फॉल्ट लाइन की गहराई बहुत अधिक है. यह 100 से 150 किलोमीटर तक की गहराई तक जा सकती है. उन्होंने कहा कि 5, 10 और 20 किलोमीटर की गहराई वाले भूकंप अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं. कम गहराई वाले भूकंप कम गहराई से ऊर्जा प्राप्त करते हैं.
बहरहाल आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों की चेतावनी के बाद इस क्षेत्र में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. भारत सरकार और वैज्ञानिकों को समय रहते इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है. ताकि भविष्य में भूकंप के प्रभाव को कम से कम किया जा सके.
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