इन दिनों सिलीगुड़ी, सिक्किम और उत्तर बंगाल में वस्तुओं की खरीद बिक्री किए बिना ही इनपुट रिटर्न का आवेदन कर जीएसटी को चूना लगाने के मामले में कुछ व्यापारी काफी सक्रिय हो गए हैं. जीएसटी को चूना लगाने वाले यह लोग भारत भूटान सीमा पर अत्यधिक सक्रिय हैं. उनके द्वारा ही सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल के व्यापारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है कि किस तरह से जीएसटी को चूना लगाया जा सकता है. जीएसटी के अधिकारी अब उनके पीछे लग गए हैं.
जीएसटी चोरी कोई नई बात तो है नहीं. कुछ समय पहले तक कुछ व्यापारियों की करतूतों के बारे में अधिकारियों को कुछ पता नहीं चलता था. कुछ व्यापारी तो शुरू में जीएसटी चोरी के बाद अब संभल गए हैं. लेकिन जिन व्यापारियों को चोरी की लत लग चुकी है, अब उनकी मुसीबत बढ़ने लगी है. यह कहा भी जाता है कि एक बार जिसे चोरी की लत लग जाती है, वह कभी ना कभी जरूर पकड़ा जाता है. जीएसटी अधिकारी तब हरकत में आते हैं, जब उन्हें व्यापारी की सच्चाई का पता चलता है.
आपको याद होगा, कुछ दिन पहले सीजीएसटी सिलीगुड़ी यूनिट के अधिकारियों को जीएसटी चोरी के मामले में एक व्यापारी की हरकतों का पता चला तो अधिकारियों ने सिलीगुड़ी से लेकर सिक्किम और गुजरात तक व्यापारियों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी. जैसे-जैसे अधिकारी मामले की तह में पहुंच रहे हैं, वैसे-वैसे उन्हें नई-नई जानकारियां सामने आ रही है. कई और व्यापारियों की कुंडली खंगाली जा रही है.
कुछ व्यापारी टैक्स चोरी के मामले में अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने की ताक में रहते हैं. उन्हें लगता है कि जीएसटी अधिकारियों को कुछ पता ही नहीं होता. परंतु यांत्रिक जमाने में जीएसटी अधिकारियों की कार्य शैली और रणनीति ऐसी हो गई है कि उनकी आंखों में धूल झोंकने वाले व्यापारी को पता ही नहीं चलता कि कब अधिकारी उनकी आंखों में ही धूल झोंकने में सफल हो गए.
अभी कुछ ही दिन हुए. सिलीगुड़ी के एक पान मसाला व्यापारी के खिलाफ 44 करोड रुपए जीएसटी का चूना लगाने के आरोप में अधिकारियों ने सीजीएसटी विभाग की ओर से उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करवा दिया. हालांकि उक्त व्यापारी फिलहाल फरार बताया जा रहा है. अब जो मामला सामने आया है, वह इसी कड़ी का एक अन्य मामला है, जहां सीजीएसटी अधिकारियों ने व्यापारी को गिरफ्तार कर लिया है. उस पर 37.29 करोड रुपए की जीएसटी चोरी का आरोप है. सीजीएसटी अधिकारियों ने व्यापारी को 31 मार्च की रात में ही गिरफ्तार किया था. कल उसे सिलीगुड़ी कोर्ट के संबंधित विभाग में पेश किया जाएगा.
सीजीएसटी सिलीगुड़ी यूनिट के अधिकारियों के द्वारा जिस व्यापारी को अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है, उसका नाम संतोष साहा है. संतोष साहा अलीपुरद्वार के दलसिंहपारा में रहते हैं. गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सीजीएसटी के अधिकारी फिलहाल कागजातों के आधार पर ही उनके खिलाफ आरोप तय कर उन्हें अदालत में प्रस्तुत करने की योजना बना रहे हैं. अभी तक उनका बयान सामने नहीं आया है. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अधिकारी उनसे पूछताछ करेंगे और उन्हें सिलीगुड़ी कोर्ट में पेश करेंगे.
संतोष साहा पर जो आरोप लगाया गया है, उसके अनुसार उन्होंने आईटीसी की वस्तुओं का कारोबार दिखाकर फर्जी तरीके से जीएसटी नंबर ली थी. जीएसटी नंबर से उन्होंने 232 चालान और बिल जारी किए. लेकिन जिन गाड़ियों से उन्होंने माल भेजा अथवा माल लोडिंग अनलोडिंग कराया, वे गाड़ियां सड़क पर चली ही नहीं. इसका मतलब यह हुआ कि सामान की खरीद बिक्री ही नहीं हुई तो लोडिंग अनलोडिंग का सवाल ही कहां था. लेकिन उन्होंने जीएसटी की आंखों में धूल झोंकते हुए इस आधार पर 37 करोड़ 29 लाख 6 हजार 990 रुपए का चालान और बिल भी जारी कर दिया था. मजे की बात है कि उसके आधार पर उन्होंने इनपुट रिटर्न फाइल किया और जीएसटी खजाने से रूपए वसूलने में सफल रहे.
सीजीएसटी सिलीगुड़ी यूनिट के कमिश्नर जितेश नागोरी बताते हैं कि उक्त व्यापारी के खिलाफ कागजातों की संपूर्ण जांच की गई. उसके बाद ही उनकी गिरफ्तारी का फैसला किया गया. उन्होंने बताया कि जीएसटी चोरी के मामले में और भी कई व्यापारियों पर उनकी नजर है. संदिग्ध व्यापारियों की सूची बनाई जा रही है. अधिकारी उनकी फाइल ख॔गाल रहे हैं. जितेश नागौरी ने रहस्योद्घाटन करते हुए कहा कि भारत और भूटान में कारोबार करने वाले भूटान के कुछ व्यापारियों की शह पर यह खेल खेला जा रहा है. आने वाले समय में सिलीगुड़ी से लेकर भूटान तक के कुछ व्यापारी पकड़े जा सकते हैं. ऐसा सीजीएसटी सिलीगुड़ी यूनिट के सूत्रों से संकेत मिल रहा है.
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