April 16, 2024
Sevoke Road, Siliguri
उत्तर बंगाल लाइफस्टाइल सिलीगुड़ी

सिलीगुड़ी वासियों का स्वास्थ्य व सुरक्षा खतरे में! नहीं चेते तो होगी तबाही!

5-7 लाख की आबादी वाला सिलीगुड़ी शहर इस समय संकट के दौर से गुजर रहा है. ग्लोबल वार्मिंग का दंश झेल रहे सिलीगुड़ी और दुनिया के लोग वर्तमान में एक नई मुसीबत का सामना कर रहे हैं. कोलकाता और दिल्ली के बारे में तो पहले भी सुना गया था और अक्सर सुना जाता भी है. परंतु सिलीगुड़ी में भी कमोबेश ऐसा ही हाल हो तो समझा जा सकता है कि स्थिति कितनी गंभीर है. जी हां, बात हो रही है एयर क्वालिटी इंडेक्स की. इस समय सिलीगुड़ी में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक दौर में पहुंच गई है. यह सिलीगुड़ी में कोलकाता से भी ज्यादा खराब है.

पिछले कई दिनों से सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर गिरा है. आज सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में AQI 240 दर्ज किया गया. यह सिलीगुड़ी के वार्ड नंबर 32 से लेकर बाबूपाडा में आज दोपहर 2:30 बजे रिकॉर्ड किया गया. जबकि गंगटोक जीरो पॉइंट में यह 81 था. अगर दिल्ली और कोलकाता की बात करें तो दिल्ली के आर के पुरम में AQI 270 जबकि कोलकाता फोर्ट विलियम में 85 AQI रिकॉर्ड किया गया है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के ऐप समीर से यह जानकारी प्राप्त हुई है. सबसे पहले जानते हैं कि एयर क्वालिटी इंडेक्स है क्या.

एयर क्वालिटी इंडेक्स दैनिक रूप से हवा की गुणवत्ता को प्रदर्शित करता है. इससे पता चलता है कि आप जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह हवा स्वच्छ है या प्रदूषित. AQI मानव के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है. अगर स्वाभाविक रूप से सांस लेने में तकलीफ महसूस हो तो समझ ले कि आपके आसपास की हवा प्रदूषित हो गई है. हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करने के पांच कारक हैं, उनमें ग्राउंड लेवल ओजोन परत, पार्टिकल पॉल्यूशन, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड .

आखिर सिलीगुड़ी में हवा की गुणवत्ता क्यों खराब हो रही है. यह समझना काफी आवश्यक है. पिछले कुछ समय में सिलीगुड़ी में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है. बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों का निर्माण किया गया है. आवास की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं.राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विकास कार्यों को पूरा करने के लिए भी पर्यावरण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.उदाहरण के लिए वर्तमान में सिलीगुड़ी के S FRoad, वर्धमान रोड इत्यादि इलाकों में सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है. सड़कों के किनारे किनारे फुटपाथ तैयार किये जा रहे हैं. इसके लिए अवरोधक पेड़ों को काटा जा रहा है.

किसी समय सिलीगुड़ी जंगली इलाका था.यहां पेड़ पौधे और नदी पर्वत हुआ करते थे. यहां की हवा स्वच्छ होती थी. वर्तमान में ना तो जंगल रहा और ना ही पेड़ पौधे तथा हरियाली. कावाखाली, माटीगाड़ा, सालूगाड़ा, चंपासारी इत्यादि क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के निर्माण और विकास कार्यो ने लोगों को हरियाली से वंचित किया है. यही कारण है पिछले कुछ समय से सिलीगुड़ी और आसपास के क्षेत्रों का तापमान बढ़ रहा है. वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सिलीगुड़ी नगर निगम और पर्यावरण विभाग के द्वारा अभियान तो चलाए जाते हैं, परंतु यह कागजों में ही ज्यादा दिखता है. जमीन पर उसका अनुपालन कम ही किया जाता है.

किसी समय सिलीगुड़ी नगर निगम के द्वारा सिलीगुड़ी में पॉलिथीन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया था. कुछ समय तक बाजार से पॉलिथीन नदारद थी दुकानदार अपनी दुकानों पर पॉलिथीन नहीं रखते थे. पॉलिथीन की जगह कागज दिया जाता था. आज बाजार में खूब पॉलिथीन मिल रही है. इसी तरह से वायु प्रदूषण के जिम्मेदार कारकों की तरफ ना तो सिलीगुड़ी के लोगों का ध्यान है और ना ही प्रशासन का, जिसका परिणाम यह है कि सिलीगुड़ी का AQI स्तर लगातार बढ़ रहा है. यह सिक्किम, दार्जिलिंग, कोलकाता से भी ज्यादा खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है और दिल्ली का मुकाबला कर रहा है.

आपको बताते चलें कि AQI 0 से 50 अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से लेकर 200 तक मध्यम, 201 से लेकर 300 तक निम्न, जबकि 301 से लेकर 400 तक बहुत खराब और 401 से लेकर 500 तक चिंताजनक की श्रेणी में रखा जाता है. इसके अनुसार सिलीगुड़ी की स्थिति इतनी खतरनाक तो नहीं है, परंतु अगर वायु प्रदूषण को कम करने का प्रयास नहीं किया गया तो तेजी से यह चिंता जनक स्थिति में भी पहुंच सकता है. इसके लिए सरकार, प्रशासन और नागरिकों को भी पहल करनी होगी. सरकारी गाइडलाइंस का पालन करना होगा. इसके साथ ही वायु प्रदूषण को कम करने के व्यक्तिगत प्रयास और अच्छी आदतों को अपनाना होगा.

अगर ऐसा नहीं किया गया तो इसका असर न केवल मानव के स्वास्थ्य पर ही पडने वाला है, बल्कि पर्यटन, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में भी बुरा प्रभाव पड़ने से कोई नहीं रोक सकता. अपनी जिस विशेषता के लिए सिलीगुड़ी जाना जाता है,अगर उसका वह मौलिक तत्व ही गायब होता है तो फिर सिलीगुड़ी और दूसरे शहरों में अंतर क्या रह जाएगा!

(अस्वीकरण : सभी फ़ोटो सिर्फ खबर में दिए जा रहे तथ्यों को सांकेतिक रूप से दर्शाने के लिए दिए गए है । इन फोटोज का इस खबर से कोई संबंध नहीं है। सभी फोटोज इंटरनेट से लिये गए है।)

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