April 16, 2024
Sevoke Road, Siliguri
उत्तर बंगाल लाइफस्टाइल सिलीगुड़ी

श्रीराम में समाता सिलीगुड़ी शहर!

22 तारीख को अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है. इसको लेकर देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी धूम है. भारत की सनातनी संस्कृति के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है. इसकी खुशी और उल्लास सिलीगुड़ी में भी देखा जा रहा है. सिलीगुड़ी में जगह-जगह सड़क, चौराहे, बाजार, गली, सब जगह श्री राम के झंडे और टी-शर्ट बिक रहे हैं.

लोग अपने स्कूटर, बाइक और चार पहिया वाहनों में भी श्री राम के झंडे लगाकर घूम रहे हैं. सनातनी संगठनों के लोग जगह-जगह भगवान श्री राम की धुन बजा रहे हैं. इसके अलावा कई मंदिरों में भी पंडितों के द्वारा श्री रामचरितमानस की चौपाइयां सुनाई जा रही है. सिलीगुड़ी के लगभग सभी मंदिरों को सजाया जा रहा है. श्री रामचरितमानस की चौपाइयां सुनने के लिए लोग मंदिरों में उमड़ रहे हैं. विधान मार्केट, खालपाड़ा, नया बाजार, चंपासारी आदि बाजारो में कई दुकानों पर श्री राम के भजन और गोस्वामी तुलसीदास के श्लोक सुनाई पड़ते हैं. यहां खरीददार भी अधिक आ रहे हैं.

अयोध्या में मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 16 जनवरी से प्रारंभ हो जाएगा. 17 जनवरी को मूर्ति के साथ अयोध्या धाम में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. 18 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा की विधि आरंभ होगी. 19 जनवरी को अग्नि स्थापना की जाएगी. 20 जनवरी को मंदिर के गर्भ गृह को सरजू से लाए गये जल से पवित्र किया जाएगा. 21 जनवरी को राम लला को 125 कलशो से दिव्य स्नान कराया जाएगा और 22 जनवरी को मृगशिरा नक्षत्र में प्रभु श्री राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी. प्रभु श्री राम की मूर्ति की एक विशेषता यह भी है कि इसे अगर जल और दूध से स्नान कराया जाएगा तो इसका नकारात्मक प्रभाव पत्थर पर नहीं पड़ेगा.

सिलीगुड़ी के कुछ सनातनी संगठन 17 जनवरी को सिलीगुड़ी में शोभा यात्रा निकाल सकते हैं. इसके अलावा 22 जनवरी को यहां मंदिरों में अयोध्या के श्रीराम लला मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को टीवी के माध्यम से लाइव दिखाए जाने की भी तैयारी चल रही है. कई सनातनी संगठन लोगों को श्री राम से जोड़ रहे हैं. यहां विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक स॔घ जैसे संगठन भगवान श्री राम की अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में सिलीगुड़ी में भी कुछ नए कार्यक्रम करने जा रहे हैं.

फिलहाल सिलीगुड़ी श्री राम के गेरुए रंग में रंगती नजर आ रही है. नौजवान, बड़े बुजुर्ग और व्यवसाईयों में श्री राम की आस्था का रंग चढ़ रहा है. मिली जानकारी के अनुसार श्री राम भक्तों के लिए टी-शर्ट, झंडे ,आदि बनाने के यहां के श्रीराम भक्त व्यवसाईयों को विभिन्न सनातनी संगठनों की ओर से भारी आर्डर मिले हैं. सिलीगुड़ी के कुछ मिठाई दुकानदारों ने बताया कि उन्हें 22 जनवरी के कार्यक्रम को लेकर मिठाई के भी आर्डर मिले हैं. इसी तरह से वर्धमान रोड पर दीए बनाने का काम करने वाली आशा दादी ने भी बताया कि उन्हें सिलीगुड़ी के कई सनातनी परिवारों से भारी संख्या में दीए बनाने का आर्डर मिला है.

मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी में घर-घर 22 जनवरी को श्री राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में दीए जलाए जाएंगे. आजकल घरों में महिलाएं बस श्री राम प्रभु की ही चर्चा करती हैं. जानकी देवी बताती है कि ऐसा लगता है कि भगवान श्री राम वनवास के बाद अयोध्या लौट रहे हैं. हमें ऐसा लगता है कि हम लोग सतयुग में लौट गए हैं. कई घरों में तो सुबह-सुबह गोस्वामी तुलसीदास की चौपाइयां भी गुनगुनायी जा रही है.

जैसे-जैसे श्री राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि नजदीक आ रही है, सिलीगुड़ी में श्री राम की भक्ति और आस्था का रंग भी गहरा होता जा रहा है. 22 जनवरी के कार्यक्रम को लेकर पूरा सिलीगुड़ी तैयार है. बस 22 तारीख का इंतजार है, जब अयोध्या में श्री राम लला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के जरिए एक नए सनातनी युग का आगाज होगा.

श्री राम जन्मभूमि मंदिर की कुछ विशेषताएं बताते चलूं. यह मंदिर परंपरागत नागर शैली में बनाया जा रहा है. मंदिर की लंबाई पूर्व से पश्चिम 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट होगी. यह मंदिर तीन मंजिला होगा. प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट रहेगी. मंदिर में कुल 392 खंबे तथा 44 द्वार होंगे. मंदिर के प्रथम तल पर श्री राम दरबार होगा. मंदिर में पांच मंडप होंगे.नृत्य मंडप, रंग मंडप,सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप. मंदिर में पूर्व दिशा से 32 सीढ़ियां चढ़कर सिंह द्वार से प्रवेश होगा.

प्रभु श्री राम लला की मूर्ति को गर्भ गृह में इस प्रकार से स्थापित किया जा रहा है कि प्रत्येक वर्ष रामनवमी को भगवान सूर्य स्वयं उनका अभिषेक करेंगे. भारत के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की सलाह पर मूर्ति की लंबाई और उसे स्थापित करने की ऊंचाई को इस तरह से रखा गया है कि हर साल रामनवमी तिथि को दोपहर 12:00 बजे सूर्य की किरणें प्रभु श्री राम के ललाट पर पड़ेंगी.

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