January 27, 2026
Sevoke Road, Siliguri
Global warming alert darjeeling HILLS pollution siliguri

ग्लोबल वार्मिंग की मार से कराहता पहाड़!

The mountains are groaning under the impact of global warming!

इस साल सर्दियों ने पहाड़ों पर ग्लोबल वार्मिंग की मार की पुष्टि कर दी है. हड्डियों को ठिठुरा देने वाली और खून को जमा देने वाली ठंड जैसे बीते दिनों की बात बन चुकी है. अब सर्दी बीतने को है. लेकिन दार्जिलिंग से लेकर सिक्किम तक कहीं भी ऐसा नजारा नहीं देखा गया. पहले ठंड का दौर आता था. लगातार कई दिनों तक ठंड पड़ती थी. इस बार ठंड में गिरावट ने जलवायु परिवर्तन का इशारा कर दिया है.

दार्जिलिंग के लोग बताते हैं कि दार्जिलिंग में एक समय सर्दियों में पानी जम जाता था. सप्लाई का पानी पाइपों में नहीं आता था. क्योंकि पाइप में ही पानी जम जाता था. पहले पाइप को गर्म करना पड़ता था, उसके बाद ही लोगों को पेयजल उपलब्ध होता था. लोग घर की टंकी में भी ऐसा ही करते थे. पहले पाइपों को गर्म करते थे. फिर उन्हें पानी नसीब होता था.

इसी तरह से घर में रखे पानी के बर्तन के ऊपर कांच जैसी पतली बर्फ जम जाती थी. यहां के लोग बताते हैं कि हर घर में लोगों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता था और बर्फबारी तो हर दूसरे तीसरे दिन होती ही थी. ठंड इतनी ज्यादा पड़ती थी कि शरीर का खून भी जम जाता था…

आज ये बातें कहीं नहीं सुनाई पड़ती है. दार्जिलिंग के लोग बताते हैं कि वर्तमान में यहां ठंड काफी कम हो गई है. पानी का जमना तो दूर की बात रही. जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, उससे लगता है कि आने वाले समय में दार्जिलिंग के लोगों को ओवरकोट की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. इस साल यहां पड़ने वाली सर्दी की बात करें तो औसत तापमान 5 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान बना हुआ है. लेकिन कभी या 0 डिग्री सेल्सियस अथवा माइनस में नहीं गया.

एक समय था जब दार्जिलिंग में पर्यटक बर्फ के टुकड़ों से खेलते थे और खूब इंजॉय करते थे. जब कभी अधिक बर्फबारी होती थी तो प्रशासन की ओर से पर्यटकों के लिए सावधानी और उन्हें होटलों में रहने के संबंध में गाइडलाइन जारी किया जाता था. आज नौबत यह हो गई है कि लोग मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर नजर जमाए रहते हैं कि कब यहां बर्फबारी होगी!

ग्लोबल वार्मिंग की मार न केवल पहाड़ बल्कि भारत के मैदानी भाग भी झेल रहे हैं. जिस तरह से पिछले साल यहां गर्मी और लू ने लोगों को झुलसाया, उससे पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन किस तेजी से हो रहा है. यहां वर्षा भी अनियमित हो रही है, जिसका असर भारत की आर्थिक, वाणिज्यिक और राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ रहा है. विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि विकास की अंधी दौड़ और जनसंख्या विस्फोट ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण है. अगर मनुष्य नहीं चेता तो आने वाली पीढ़ी को भयानक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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