July 14, 2024
Sevoke Road, Siliguri
उत्तर बंगाल दार्जिलिंग राजनीति सिलीगुड़ी

दिल्ली तक नहीं पहुंची दार्जिलिंग की समस्या !

दार्जिलिंग: दार्जिलिंग कितना सुंदर नाम है और उससे भी सुंदर है दार्जिलिंग की आबोहवा, यहाँ का वातावरण और दार्जिलिंग की खूबसूरत वादियों से गुजरती ऐतिहासिक टॉय ट्रैन, लेकिन कहते है ”दूर के ढोल सुहाने लगते हैं” शायद यह कहावत दार्जिलिंग की राजनीति में सटीक बैठती है |
राजनीति के उतार-चढ़ाव में दार्जिलिंग की जनता आखिर चाहती क्या है ? उनकी क्या मांग है ? क्या इस राजनीति माहौल में दार्जिलिंग की आम जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है ? यह शायद किसी ने सोचा ही नहीं, लेकिन एक ऐसा सख्श है जो दार्जिलिंग वासियों के बारे में सोच रहा है |
भूपेन लेप्चा जो दार्जिलिंग से निर्दलीय उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ने वाले है | साधारण से दिखने वाले भूपेन लेप्चा पेशे से वकील है, इन स्टार प्रचारकों के बीच साधारण तरीके से उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया | भूपेन लेप्चा राजनीति में अच्छा खासा अनुभव भी रखते है, उन्होंने 2011 में एमएलए का चुनाव भी लड़ा था |
देखा जाए तो चुनावी बेगुल बज चूका है, इस लोकतंत्र के महापर्व को लेकर पूरे देश में चर्चाएं शुरू हो चुकी है और इस लोकतंत्र के महापर्व में सब की नजर बंगाल में टिकी हुई है, क्योंकि बंगाल की राजनीति, और राज्यों के मुकाबले हमेशा अलग-थलग रही है | देखा जाए तो बंगाल में कुल 42 सीट है, जिसमें लड़ने के लिए लड़ाकू उम्मीदवार तैयार हो चुके हैं | विभिन्न राजनीतिक दल बड़े-बड़े स्टार प्रचारक के साथ चुनाव प्रचार में जुट चुके हैं, लेकिन बंगाल के इन 42 सीटों में से दार्जिलिंग जिला एक ऐसा जिला है, जिसमें राज्य की मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री की नजर बनी हुई है | राज्य सरकार दार्जिलिंग सीट को जीत कर इतिहास रचना चाहती है और इसके लिए एड़ी चोटी की ताकत लगा रही है, तो वही भाजपा सरकार हर हाल में अपनी जीत कायम रखना चाहती है | इन दोनों पार्टी के पास स्टार प्रचारक है दार्जिलिंग में उम्मीदवार गोपाल लामा ने जिस भव्य अंदाज से नामांकन पत्र भरा वह देखने लायक था, उस दिन दार्जिलिंग थम सी गई थी और अब भाजपा के उम्मीदवार राजू बिष्ट 3 अप्रैल को नामांकन पत्र जमा करेंगे और उस दिन दार्जिलिंग की रफ्तार थमती है या सामान्य रहती है, वह तो उसी दिन जानेंगे, लेकिन स्टार प्रचारक रखने वाले पार्टियों से अलग भूपेन लेप्चा निर्दलीय उम्मीदवार बनाकर नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं, जिन्होंने यह बताया कि, दार्जिलिंग वासियों की आवाज दिल्ली तक पहुंची ही नहीं, हमें बंगाल से अलग होना है और जितने भी नेता मिले वे लिखी, पढ़ी बातें बोलते हैं , यहां की मुख्य समस्या को लेकर कोई बात नहीं करता है, भूपेन लेप्चा दार्जिलिंग की वास्तविक तस्वीर को दिल्ली तक पहुंचाना चाहते हैं |

(अस्वीकरण : सभी फ़ोटो सिर्फ खबर में दिए जा रहे तथ्यों को सांकेतिक रूप से दर्शाने के लिए दिए गए है । इन फोटोज का इस खबर से कोई संबंध नहीं है। सभी फोटोज इंटरनेट से लिये गए है।)

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