दार्जिलिंग पहाड़ में वह हुआ जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.इससे पहले कभी नहीं हुआ. पहाड़ के लोगों का कहना है कि बिना किसी सूचना के, बिना किसी सरकारी अधिसूचना और बिना किसी प्रशासनिक फरमान के रातों रात वह हो गया, जिसके बारे में कभी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. पूरा पहाड़ परेशान और चिंतित है. आखिर ऐसा क्या हो गया कि वहां एक अशांत वातावरण बन गया है?
दरअसल दार्जिलिंग, कालिमपोंग और कर्सियांग क्षेत्र में लाखों राशन कार्ड धारकों के नाम राशन उपभोक्ता सूची से हटा दिए गए हैं, जिसके बाद पहाड़ में काफी बवाल मचा हुआ है. पहाड़ के क्षेत्रीय संगठनों से लेकर सामाजिक और अन्य संगठनों ने इस पर हैरानी जताई है कि बिना सोचे विचारे, नोटिस के राशन उपभोक्ताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं.
मिली जानकारी के अनुसार कर्सियांग महकमा में लगभग 50000 उपभोक्ताओं के नाम सूची से गायब हैं. कालिमपोंग जिले में लगभग 40000 राशन कार्ड निष्क्रिय कर दिए गए हैं. जबकि दार्जिलिंग जिले में भी लाखों नाम उपभोक्ता सूची से हटाए गए हैं. मजे की बात तो यह है कि ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन उत्तर बंगाल को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. आखिर यह पूरा मामला क्या है?
दरअसल राशन अधिकारियों ने राशन कार्ड धारकों की जांच के बाद ज्यादातर उन लोगों के नाम उपभोक्ताओं की सूची से बाहर किए हैं, जिनकी वार्षिक आमदनी ₹12 लाख से अधिक है. ऐसे लोग राशन उठा रहे थे, जो नियमों के अनुकूल नहीं है. केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार जिन परिवारों की सालाना आमदनी एक से डेढ़ लाख के बीच में है, वही राशन के हकदार हैं. इसके अलावा नियमों में यह भी कहा गया है कि जिनके पक्के मकान है या घर में वाहन है, उन्हें राशन नहीं मिलेगा. इसी आधार पर राशन कार्ड धारकों की सूची से नाम हटाए गए हैं.
जीएलएफ के प्रवक्ता वाई. लामा का तर्क है कि यह सही है कि सरकार के नियम कुछ इसी तरह के हैं. लेकिन उन्हें यह भी देखना होगा कि दार्जिलिंग की भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं. पहाड़ में बड़े उद्योग धंधे नहीं है. ना ही यहां कृषि कार्य बड़े पैमाने पर होता है. लोगों का जीवन यापन यहां अधिक महंगा है. इसलिए पहाड़ी इलाकों में समतल जैसे नियम नहीं चल सकते हैं. सरकार को यहां राहत देनी चाहिए.
कल पहाड़ में खाद्य आपूर्ति विभाग के जिला कार्यालय में ऐसे लोगों की काफी भीड़ और गहमागहमी थी, जिनके नाम राशन कार्ड की सूची से बाहर किए गए हैं. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ गई. गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के एक प्रतिनिधि मंडल ने जिला अधिकारी हरिशंकर पणिकर से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौपा. जिला अधिकारी ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया है कि इस बारे में राज्य उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है. जल्द ही इसका संतोषजनक समाधान निकलेगा.
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक जयदीप दास कहते हैं कि हमने कोई गलत काम नहीं किया है. ना ही अपनी मर्जी से कोई काम किया है. जो हमें निर्देश मिला है, उसी के अनुसार कार्रवाई की है. जिन परिवारों की वार्षिक आय 12 लाख रुपए से अधिक है तथा जिनके पास वाहन व पक्का मकान है ,उनके ही नाम लाभार्थी सूची से हटाए गए हैं. जयदीप दास स्वीकार करते हैं कि हो सकता है कि इस क्रम में कुछ पात्र नाम भी सूची से हटा दिए गए हो तो उनकी जांच कर उनका नाम सूची में वापस शामिल किया जाएगा.
सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस कार्रवाई को करते समय अधिकारियों को नोटिस देना चाहिए. जो उनकी तरफ से दिया नहीं गया और चुपचाप राशन कार्ड धारकों के नाम सूची से हटा दिए गए. यह तरीका न्याय संगत नहीं है. जाहिर है कि ऐसे में उनमें असंतोष और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी ही.अब इस पूरे मामले को भाजपा सांसद राजू विष्ट और भाजपा विधायक नोमन राई को हस्तांतरित कर दिया गया है.उन्होंने पहाड़ के लोगों को भरोसा दिया है कि जल्द ही इसका सर्वमान्य समाधान ढूंढा जाएगा.
डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि मनोज गुरुंग माग करते हैं कि जब तक मामले की जांच नहीं हो जाती, हटाए गए सभी नाम वापस बहाल किए जाएं. बहरहाल देखना होगा कि राज्य सरकार और खाद्य विभाग इस मामले में अगला क्या कदम उठाता है. उधर कर्सियांग महकमा में भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा महकमा समिति के सचिव भक्तिमान तमांग ने कर्सियांग महकमा शासक से राशन कार्ड सूची से हटाए गए नाम को लेकर इंसाफ की मांग की है.
जो भी हो एक दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री का सरकारी विभागों में बांग्ला भाषा में काम करने के फरमान के बाद अब पहाड़ में लाखों राशन कार्ड निष्क्रिय किए जाने का अच्छा असर नहीं देखा जा रहा है.

