हर शहर में रेड लाइट एरिया होता है. रेड लाइट एरिया में स्थित कोठों पर हर दिन एक नई कहानी जन्म लेती है, जो शाम को शुरू होती है और देर रात खत्म हो जाती है. यहां कोठों की कहानी अलग और इन कोठों पर महफिल सजाने की भी कहानी अलग होती है. हालांकि कोठों की कहानी कोठों की दीवारों में घुट कर दम तोड़ देती है. इस तरह से अधिकांश कहानियां गुमनाम सी होती हैं. कुछ कहानियां ही समाज के बीच प्रकाश में आती हैं.
हमारे समाज ने कोठों की महफिल सजाने वाली लड़कियों को आमतौर पर अबला मान लिया है और यही कारण है कि कोठों पर लाने के बाद उनका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न शुरू होता है. हर दिन यहां एक नई कहानी बनती है और कोठों की दीवारों में ही दफन हो जाती है. कभी भी कानून या राजनीतिक दलों ने यौन कर्मियों के पेशे पर सवाल नहीं उठाया था. उन्हें उनका अधिकार बताया था.
बस यहीं से कोठा मालकिन को लड़कियों पर अत्याचार करने और उनका मानसिक तथा शारीरिक शोषण करने का जैसे लाइसेंस मिल जाता है. ऐसे मामलों में पुलिस तभी हस्तक्षेप करती है, जब पुलिस को शिकायत मिलती है. यहां लाई गई लड़कियों की बस एक ही कहानी होती है. प्रेमी या अपनों से मिला धोखा. कई लड़कियां मानव तस्कर की भेंट चढ़ कर यहां लाई गई होती हैं. लेकिन कोई भी लड़की या महिला यहां अपनी मर्जी से नहीं आती. ज्यादातर मामले धोखे के ही होते हैं.
सिलीगुड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. असम की रहने वाली एक लड़की एक प्रेमी के जाल में पड़कर अपना घर बार छोड़ कर सिलीगुड़ी आ गई लड़की का अपने प्रेमी पर कितना भरोसा था यह इसी बात से समझा जा सकता है कि जब युवक महिला को लेकर सिलीगुड़ी आया तो महिला ने अपने पर्स में रखें सभी नगदी गाने और यहां तक की मोबाइल भी प्रेमी को रखने के लिए दे दिया महावीर राजस्थान में महिला का कथित प्रेमी मौका देखकर उसकी सारी हाथी लेकर फरार हो गया
मासूम नाबालिक और बोध लड़कियां तो आसानी से बरगलाई जा सकती है लेकिन जब एक शादीशुदा और वह भी एक बेटे की मैन किसी प्रेमी के धोखे का शिकार हो जाए तो दुख होता है जिस महिला को उसका प्रेमी सिलीगुड़ी लेकर आया था उसकी गोद में एक दूध मोही बच्ची भी थी प्रेमी तो उसकी उसका सारा माल लूट कर चला गया नौ द 2:11 हो गया अब महिला क्या करें उसके पास कुछ भी नहीं था यहां तक की खाने के पैसे भी नहीं थे इसलिए वह सिलीगुड़ी की सड़कों पर दुखों का पहाड़ समेट भटकती रही
जब सिलीगुड़ी के विवेकानंद रोड पर अपनी बच्ची को गोद में चिपकाए निर्देश भटक रही थी तभी कुछ लोगों को संदेह हुआ उन्होंने महिला को रोकर पूछा और उसके बाद खलपारा चौकी पुलिस को मामले की जानकारी दे दी का खाना चौकी पुलिस ने मां बेटी दोनों को अपने संरक्षण में लिया और थाने में रखा इसके बाद पुलिस ने असम मैं रहने वाले उसके माता-पिता को सूचना देकर सिलीगुड़ी बुला लिया और महिला को उसके परिजनों को सौंप दिया अगर पुलिस ने महिला की मदद नहीं की होती तो समाज की भूखे हुए लिए उसे के साथ क्या करते या केवल कल्पना ही की जा सकती है और महिला को किसी गलत जगह जाने से बचा
