सुबह के लगभग 6:00 बज रहे थे. भक्ति नगर थाना क्षेत्र के जसोदा रेजिडेंसी के मकान मालिक पशुपति शाह गायों को चारा देने जा रहे थे. उन्होंने अपने मकान में कुछ कमरों को किराए पर भी उठा रखा था. उसी समय उन्होंने देखा कि किराएदार के कमरों से एक व्यक्ति तेजी से निकला और आगे बढ़ गया. उस व्यक्ति ने अपना चेहरा ढक रखा था.
पशुपति शाह ने उस व्यक्ति को बार-बार आवाज लगाई. लेकिन जैसे उसने उनकी आवाज को अनसुना कर दिया था. इससे उन्हें उस व्यक्ति पर संदेह बढ़ गया. उन्होंने उसे रोकने की कोशिश की. लेकिन वह रुका नहीं. इस बीच पशुपति शाह को पता चला कि वह व्यक्ति एक ट्रांसजेंडर है, जो महिला के गेटअप में था. उन्होंने कुछ किराएदारों को घर भाडा दे रखा था. लेकिन उनमें यह व्यक्ति उनका किराएदार नहीं था.
पशुपति शाह को अपने किराएदारों पर ही संदेह होने लगा. कुछ देर के बाद उक्त ट्रांसजेंडर वापस किराएदारों के कमरे में चला गया. पशुपति शाह ने उस व्यक्ति से पूछताछ करनी शुरू कर दी. आखिर वह वहां क्यों आया था और किससे मिलने आया था. कई तरह के सवाल उनके दिमाग में घूम रहे थे. पशुपति शाह ट्रांसजेंडर से पूछते रह गए. लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया. धीरे-धीरे यह मामला तूल पकड़ता चला गया.
इसी दौरान वहां कुछ और लोग जमा हो गए. अगर किराएदार के घर में कोई अजनबी व्यक्ति आए तो मकान मालिक तो पूछ ही सकता है. पशुपति शाह ने कोई गलती नहीं की थी. उन्हें जानने का हक था. लेकिन इस तरह से अज्ञात व्यक्ति को रोकने-टोकने से कई किराएदार नाराज हो गये. उन किराएदारों में तीन ट्रांसजेंडर थे. इस तरह से दोनों तरफ से विवाद शुरू होता देखकर वहां किराएदार भी अपने-अपने कमरे से निकल कर आ गए थे. उन्होंने अजनबी व्यक्ति का बचाव किया.
इससे किराएदार ट्रांसजेंडर और मकान मालिक के बीच विवाद बढा. मकान मालिक को अपने किराएदार पर ही संदेह होने लगा. उन्होंने कहा कि अगर कोई घटना घट जाती तो पकड़ा कौन जाता. जबकि किराएदार मकान मालिक को बार-बार चुप रहने के लिए कह रहे थे. विवाद कुछ इस कदर बढ़ गया कि दोनों तरफ से हाथापाई भी शुरू हो गई थी.
पशुपति शाह का एक बेटा एडवोकेट है. उस समय उनका बेटा घर पर नहीं था. लेकिन जब विवाद बढा तो पशुपति शाह ने अपने बेटे को फोन करके घर पर बुला लिया. भक्ति नगर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई लिखित शिकायत में भी कहा गया है कि उन पर हमला करने वालों में ट्रांसजेंडर भी थे, जो महिलाओं के वेश में थे. वे सभी किराएदार के कमरे में ठहरे हुए थे. इस बात से मकान मालिक और भी तेज गुस्से में थे. वह किराएदारों पर कई तरह के आरोप लगा रहे थे. इसी बीच किरायेदारों को गुस्सा आया तो उन्होंने उन पर हमला कर दिया.
उधर सूचना पाते ही एडवोकेट निखिल शाह घर पर पहुंच गए. अपने पिता को हमले से बचाने के लिए निखिल शाह ने ट्रांसजेंडर्स को रोकने की कोशिश की. लेकिन तब तक ट्रांसजेंडर्स का पशुपति शाह पर हमला हो चुका था. वह लहुलुहान थे. एडवोकेट निखिल शाह को भी गुस्सा आ गया. फिर दोनों पक्ष में जमकर तू तू मैं मैं शुरू हो गई.
इसी बहस के बीच विवाद और बढा, तो किराएदारों ने पिता को छोड़कर पुत्र पर ही अपना गुस्सा उतार लिया. निखिल शाह की किसी बात पर एक ट्रांसजेंडर किराएदार ने गुस्से में आकर उनपर जानलेवा हमला कर दिया. उन लोगों ने उन पर लोहे के राड से हमला कर दिया. इससे निखिल गंभीर रूप से घायल हो गये.
पिता पुत्र दोनों के सर से खून बह रहा था. घर के लोगों और पास पडोस के शुभचिंतकों ने पिता पुत्र दोनों को गाड़ी में बैठाकर अस्पताल पहुंचाया. निखिल शाह को परिजनों ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चल रहा है. उनकी हालत काफी गंभीर है.
सूचना पाकर भक्ति नगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी. भक्ति नगर थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में हमलावरों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने उनके गले की सोने की चेन छीन ली. घर में भी तोड़फोड़ की. इसके अलावा घर के लैपटॉप और प्रिंटर तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए. सवाल यह है कि एक छोटी सी घटना को लेकर इतना बड़ा विवाद कैसे हो गया कि जान पर बन आयी. क्या ट्रांसजेंडर होने का कुछ लोग फायदा उठा रहे थे?
हालांकि अभी कोई स्पष्ट कारण का पता नहीं चल सका है . चर्चा है कि इसके पीछे ट्रांसजेंडर्स का दबदबा दिखाना था. हालांकि कुछ लोग कुछ और बात कहते हैं. सच्चाई तो पुलिस ही बता पाएगी. पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है. अभी तक इस संबंध में कोई विस्तृत विवरण प्राप्त नहीं हो सका है.
मिली जानकारी के अनुसार भक्ति नगर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 307 व अन्य धाराओं में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. क्योंकि जब तक पुलिस मामले की सत्यता की जांच नहीं कर लेती ,तब तक घटना के कारणों का भी ठीक ठीक पता नहीं चल सकता. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या समाज में ट्रांसजेंडर का दबदबा बढ़ रहा है? क्या ट्रांसजेंडर्स अपने मिले अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं? क्योंकि कई बार यह देखा भी गया है और यह भी देखा गया है कि बहुत से ट्रांसजेंडर्स आपातकाल के समय लोगों की मदद करते नजर आए थे.
किसी भी व्यक्ति को संविधान से मिले अधिकारों का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं है. हमेशा सच को वरीयता देनी चाहिए. समाज में विभिन्न धर्म और जातियों के लोग रहते हैं. उन सभी की अपनी-अपनी मर्यादा है. अगर समाज में दबदबा लाना है तो वह एकता का दबदबा होना चाहिए. सहिष्णुता का दबदबा होना चाहिए और शांति का दबदबा होना चाहिए. ना कि किसी को झुकाने, उत्पीड़ित करने और अपने पद एवं प्रतिष्ठा का नाजायज लाभ उठाने का दबदबा होना चाहिए?
