अगर आपके पास ममता बनर्जी की सरकार वाला स्वास्थ्य साथी कार्ड है, तो यह अब बेकार हो चुका है. इसकी कोई उपयोगिता नहीं रह गई है. बंगाल सरकार आयुष्मान कार्ड लेकर आई है. लेकिन अभी तक आयुष्मान भारत को लेकर कोई आधिकारिक विवरण प्राप्त नहीं हो सका है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब आयुष्मान कार्ड पलोर पर भी नहीं है तो स्वास्थ्य साथी कार्ड बंद करना क्या उचित था?
पूर्ववर्ती ममता बनर्जी की सरकार में स्वास्थ्य साथी कार्ड घर-घर में उपलब्ध था. परिवार की मुखिया महिला के नाम पर स्वास्थ्य साथी कार्ड जारी किया गया था. इस कार्ड के जरिए मरीज को निजी अस्पतालों में 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिल जाता था. हालांकि यह सभी जानते हैं कि स्वास्थ्य साथी कार्ड का लाभ सभी को नहीं मिल पाया है. सिलीगुड़ी के 1 से 5% लोगों ने ही इसका लाभ उठाया था. अन्यथा यह कार्ड घर की अलमारी में ही एक ‘धरोहर’ के रूप में सुरक्षित रहा.
जो भी हो, सिलीगुड़ी के कुछ अस्पतालों ने स्वास्थ्य साथी कार्ड के जरिए मरीज का मुफ्त इलाज करने की पहल जरूर की थी. इसका सभी को लाभ मिले या ना मिले, परंतु रोगी और रोगी के परिवार के लिए विश्वास और एक जिम्मेदारी भरा एहसास दिला रहा था. अब दावा किया जा रहा है कि राज्य की भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य साथी कार्ड को बंद कर दिया है. सिलीगुड़ी के कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें इसी महीने ऑपरेशन कराना था. लेकिन जब वे स्वास्थ्य साथी कार्ड लेकर निजी अस्पताल में गए तो वहां उनसे कहा गया कि यह कार्ड बंद हो चुका है.
आपको याद होगा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बहुत पहले अपने एक बयान में कहा था कि जब तक प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड योजना कार्यान्वित नहीं हो जाती है, तब तक बंगाल के लोगों को स्वास्थ्य साथी कार्ड का लाभ मिलता रहेगा.अब जबकि आयुष्मान भारत का कोई अता-पता तक नहीं है और ऐसे में स्वास्थ्य साथी कार्ड को बंद कर दिया जाना अथवा निजी अस्पतालों के द्वारा इस कार्ड को स्वीकार नहीं किया जाना मरीज और उनके परिजनों की चिंता और मुसीबत को बढ़ा रहा है.
सिलीगुड़ी के कुछ मरीजों ने सवाल किया है कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को लागू किए बगैर राज्य सरकार ने स्वास्थ्य साथी कार्ड को क्यों बंद कर दिया? इंसानियत और नैतिकता के दृष्टिकोण से भी यह उचित नहीं है. हालांकि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य साथी कार्ड को बंद किया है या नहीं, इस तरह की कोई आधिकारिक सूचना प्रकाशित नहीं की गई है. कुछ समय पहले जून महीने में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के लोगों को भरोसा दिया था कि जुलाई महीने से आयुष्मान भारत योजना लागू हो जाएगी.
हालांकि अभी तक जनकल्याण शिविरों में फार्म वितरण के अलावा इस पर कोई स्पष्ट कार्यवाही नहीं देखी जा रही है. आपको यह भी याद होगा कि राज्य के मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी ने कहा था कि जिन लोगों के पास स्वास्थ्य साथी कार्ड है, उन्हें आयुष्मान भारत योजना का कार्ड हाथों-हाथ मिल जाएगा. अब राज्य सरकार के पोर्टल अथवा अन्य सूत्रों से यही जानकारी दी जा रही है कि आयुष्मान भारत योजना का कार्ड पहले चरण में केवल 70 प्लस के लोगों को ही दिया जाएगा. दूसरे चरण में गरीबी रेखा से नीचे के राशन कार्ड धारकों को आयुष्मान कार्ड का लाभ मिलेगा.
सवाल यह है कि वर्तमान में आयुष्मान कार्ड योजना से जुड़ी हर बात अधर में है. ऐसे में राज्य सरकार अथवा राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य साथी कार्ड बंद करना, जैसा कि मरीज आरोप लगा रहे हैं, कितना उचित है! सिलीगुड़ी समेत पूरे राज्य में अधिकांश महिलाएं पहले से ही अन्नपूर्णा योजना में लाभ को लेकर अनिश्चितता के भंवर में फंसी हुई है, अब आयुष्मान भारत को लेकर पंचायत और ब्लॉक से लेकर नगर पालिका तक का चक्कर लगाने में उनकी भाग दौड़ बढ़ गई है.
जो लोग स्वास्थ्य साथी कार्ड या आयुष्मान भारत कार्ड के जरिए निजी अस्पतालों में ऑपरेशन अथवा मुफ्त चिकित्सा का सपना देख रहे थे, उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा है. देखना होगा कि उनका इंतजार कब तक पूरा होता है. सूत्रों का दावा है कि आयुष्मान भारत कार्ड के लिए मरीज को और इंतजार करना होगा. आपको बताते चलें कि आयुष्मान कार्ड के जरिए मरीज को भारत के किसी भी निजी अस्पताल में ₹500000 का कैशलेस इलाज प्रति साल मिलेगा.
